गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड: नौ आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज, शीबा को मिली राहत
इजलाल ने शीबा के कहने पर अपने साथियों के साथ मिलकर तीन युवकों को गुदड़ी बाजार में बुलाकर सरेआम मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में आरोपियों पर दोष सिद्ध हो चुका है।
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मेरठ के गुदड़ी बाजार में करीब साढ़े 16 साल पहले हुए तिहरे हत्याकांड के नौ हत्यारों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जबकि वारदात के लिए उकसाने की दोषी शीबा सिरोही को राहत देते हुए कोर्ट ने जमानत दे दी है।
पिछले वर्ष अगस्त माह में कोर्ट ने 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कैदी इजहार, देवेंद्र आहूजा, वसीम, रिजवान, अब्दुल रहमान उर्फ कलवा और बदरूद्दीन को पिछले माह आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। इजलाल, अफजाल, महराज और शीबा मेरठ जेल में हैं।
23 मई 2008 की दोपहर बागपत और मेरठ जिले की सीमा पर बालैनी नदी के किनारे तीन युवकों के शव पड़े मिले थे। इनकी पहचान मेरठ निवासी 27 वर्षीय सुनील ढाका निवासी निवासी ढिकौली बागपत, 22 वर्षीय पुनीत गिरि निवासी खटकी परीक्षितगढ़ और 23 वर्षीय सुधीर उज्ज्वल निवासी सिरसलगढ़ बिनौली बागपत के रूप में हुई थी।
जांच में सामने था आया कि 22 मई की रात कोतवाली के गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी ने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर तीनों की हत्या की थी।
इजलाल की दोस्त शीबा सिरोही को हत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया गया था। 22 अगस्त 2008 को कोतवाली पुलिस ने तिहरे हत्याकांड में 14 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपी इसरार और माजिद की मौत हो गई थी। अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे में रोजाना सुनवाई करने के आदेश दिए थे। दस जुलाई 2024 तक लगातार हर रोज सुनवाई हुई। 14 साल तक सभी को जेल में रहना पड़ा।
इजलाल और कैप्टन की तलाकशुदा पत्नी शीबा की दोस्ती थी। सुनील ढाका, सुधीर उज्ज्वल और पुनीत गिरि इसका विरोध करते थे। बाद में इजलाल ने तीनों युवकों से समझौता कर लिया था। शीबा को इजलाल का तीनों से मिलना पसंद नहीं था। उसने इजलाल को तीनों की हत्या के लिए उकसाया। 22 मई 2008 की रात इजलाल ने तीनों को बात करने के बहाने बुलाया और मार डाला था।