जीएसटी : आज से बिल काटते समय वस्तु कोड अनिवार्य, इसलिए लाया गया नया नियम
- फर्जी बिलिंग पर रोक लगाने और पारदर्शिता के लिए नया नियम
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मेरठ में व्यापारियों और सेवा प्रदाता को अब एक अप्रैल से जीएसटी में बिल काटते समय वस्तु कोड देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर जीएसटी विभाग जुर्माना वसूलेगा। इस व्यवस्था के बाद फर्जी बिलिंग के मामलों में तेजी से कमी आने की संभावना है।
जीएसटी प्रक्रिया में किसी भी वस्तु पर लगने वाले टैक्स की दर पता करने के लिए यह कोड दर्ज किया जाता है। अब तक डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों को इसमें छूट दी गई थी, लेकिन अब अधिकतर प्रमुख उत्पादों के व्यापार में इसे आवश्यक कर दिया गया है। जिले में जीएसटी में 50 हजार से ज्यादा पंजीकृत व्यापारी हैं।
इन सभी को एक अप्रैल से बिल के साथ वस्तु कोड लिखना अनिवार्य होगा। एसजीएसटी विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था के बाद फर्जी बिलिंग पर रोक लगेगी और काम में पारदर्शिता आएगी। हालांकि इसे लागू करने में शुरुआत में कुछ परेशानी जरूर आ सकती है।
कर अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने बताया कि नए नियम में पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए माल विक्रय करने पर चार डिजिट का एचएसएन कोड बिल पर अंकित करना अनिवार्य है, लेकिन अगर बिक्री सीधे उपभोक्ता को की गई है तो उस केस में एचएसएन कोड डालना अनिवार्य नहीं है।
टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से अधिक है तो छह डिजिट का एचएसएन कोड अंकित होगा और यदि माल एक्सपोर्ट कर रहे हैं तो आठ डिजिट का एचएसएन कोड रहेगा। यह नियम गुड्स एंड सर्विसेज दोनों पर ही लागू रहेगा।
इस व्यवस्था से आसान होता है वस्तुओं का वर्गीकरण
इस व्यवस्था में क्रय विक्रय में शामिल होने वाली वस्तुओं का वर्गीकरण काफी आसान हो जाता है। अलग-अलग डिजिट के आधार पर कोड के कारण किसी भी सत्यापन अधिकारी के लिए वस्तुओं की बिलिंग और उसके आधार पर टैक्स वैल्यू निकालने में मदद मिलती है। वहीं, व्यापारियों की ओर से हेरफेर की संभावना कम हो जाती है।
जो माल बिकेगा, उसी की बिलिंग दिखानी होगी
एसजीएसटी के एडिशनल कमिश्नर संपूर्णानंद पांडेय का कहना है कि अब तक कुछ व्यापारी ऐसा करते थे कि बिल किसी और चीज का होता था और माल कुछ और आता था लेकिन वस्तु कोड डालने के बाद ऐसा नहीं हो सकेगा। अब व्यापारी वही माल बेच सकेंगे, जिसकी बिलिंग होगी। इससे काम में पारदर्शिता आएगी, इससे फर्जी बिलिंग भी रुकेगी। इसका लाभ उन व्यापारियों को मिलेगा, जिनका सभी काम कागजों में सही रहा है।