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हर जीव के हृदय में हैं प्रभु, पहचानने की जरूरत : भाव भूषण महाराज
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कैलाश पर्वत मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के समापन अवसर पर विधानाचार्य सौरभ जैन शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अनिल जैन, अमित जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा विकास जैन ने की। दीप प्रज्वलन रीना जैन, रेखा जैन, निर्मल जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
आदिनाथ भगवान की पूजा और सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। विधान कराने वाले धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। विश्व की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए हवन किया गया।
गुरुवर भाव भूषण महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि प्रभु प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान रहते हैं। उन्हें बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है बल्कि अपने भीतर झांकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि जो दिखाई नहीं देता उसका अस्तित्व ही न हो। जैसे वायु हमें दिखाई नहीं देती लेकिन उसका अस्तित्व हर पल महसूस होता है। उसी प्रकार प्रभु भी भले ही दृष्टिगोचर न हों लेकिन वह सर्वत्र विद्यमान हैं और हमारे जीवन को संचालित करते हैं।
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गुरुवर ने कहा कि हमारी भक्ति भी कई बार दिखाई नहीं देती, लेकिन वह हमारे अंतर्मन में विद्यमान रहती है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि हम अपनी भक्ति को जाग्रत करें और उसे अपने आचरण व व्यवहार में प्रकट करें। सच्ची श्रद्धा और विश्वास से ही व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मुकेश जैन, मनोज जैन, प्रेम जैन का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के समापन अवसर पर विधानाचार्य सौरभ जैन शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अनिल जैन, अमित जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा विकास जैन ने की। दीप प्रज्वलन रीना जैन, रेखा जैन, निर्मल जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
आदिनाथ भगवान की पूजा और सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। विधान कराने वाले धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। विश्व की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए हवन किया गया।
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गुरुवर भाव भूषण महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि प्रभु प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान रहते हैं। उन्हें बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है बल्कि अपने भीतर झांकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि जो दिखाई नहीं देता उसका अस्तित्व ही न हो। जैसे वायु हमें दिखाई नहीं देती लेकिन उसका अस्तित्व हर पल महसूस होता है। उसी प्रकार प्रभु भी भले ही दृष्टिगोचर न हों लेकिन वह सर्वत्र विद्यमान हैं और हमारे जीवन को संचालित करते हैं।
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गुरुवर ने कहा कि हमारी भक्ति भी कई बार दिखाई नहीं देती, लेकिन वह हमारे अंतर्मन में विद्यमान रहती है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि हम अपनी भक्ति को जाग्रत करें और उसे अपने आचरण व व्यवहार में प्रकट करें। सच्ची श्रद्धा और विश्वास से ही व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मुकेश जैन, मनोज जैन, प्रेम जैन का सहयोग रहा।