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एक साल बाद भी नहीं मिला बखरवा अग्निकांड पीड़ितों को इंसाफ
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एक साल बाद भी नहीं मिला बखरवा अग्निकांड पीड़ितों को इंसाफ
मोदीनगर। नगर से सटे बखरवा गांव में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण अग्निकांड को आज एक साल हो गया, लेकिन अभी तक अग्निकांड पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल पाया। घटना में आठ श्रमिक जिंदा जल गए थे तथा दो ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था। कुल दस लोगों की मौत हुई थी, जबकि 10 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार सहायता राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन एक मृतक तथा सभी घायलों को अभी तक सहायता राशि नहीं मिली। इसे लेकर कई बार तहसील पर हंगामा भी हुआ।
बखरवा गांव में घनी आबादी के बीच संकरी गली में करीब 200 वर्ग गज के प्लाट में नितिन चौधरी की पटाखा और मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी थी। यहां बाल श्रमिकों के अलावा महिलाएं भी काम करतीं थी। बीते साल 5 जुलाई 2020 को पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी। घटना को लेकर लोगों में आक्रोश था। लखनऊ तक अग्निकांड की गूंज पहुंच गई थी। स्थिति बिगड़ती देख तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। प्रशासन ने कुल नौ मृतकों को मुआवजा राशि दे दी थी। जबकि नौ दिन तक जिंदगी मौत से जूझने के बाद जंग हारने वाली लक्ष्मी के परिजनों तथा घायलों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजे के लिए ग्रामीण कई बार आंदोलन भी कर चुके है।
लक्ष्मी के पिता ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, इसलिए बेटी पटाखा फैक्टरी में मजदूरी करने चली जाती थी। अग्निकांड में वह गंभीर रूप से झुलस गई थी। लोगों से कर्जा लेकर बच्ची का उपचार कराया था। मेरठ स्थित अस्पताल में नौ दिन तक लक्ष्मी का उपचार चला, लेकिन उसकी जान नहीं बची। प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली।
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थाना प्रभारी और चौकी इंजार्च हुए थे निलंबित
भीषण अग्निकांड में चौकी इंजार्च रफीक अहमद की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। चौकी इंजार्च पर अवैध पटाखा फैक्टरी से वसूली करने का आरोप लगा था। जिसके बाद तत्कालीन कप्तान कलानिधि नैथानी ने थाना प्रभारी निरीक्षक और चौकी इंजार्च को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के भी आदेश दिए गए थे। फैक्टरी संचालक नितिन चौधरी और फरूखनगर निवासी सलीम को गिरफ्तार किया था। जिन पर रासुका लगाने की बात कही गई थी। मगर ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की हिलाहवाली से अग्निकांड के दोषियों को घटना के कुछ दिन बाद ही जमानत मिल गई थी और अब वह खुले घूम रहे हैं। एसडीएम आदित्य प्रजापति ने कहा कि मुआवजे के लिए फाइल शासन को भेजी हुई है। वहां से मंजूरी मिलते ही पीड़ितों को सहायता राशि दे दी जाएगी।
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मोदीनगर। नगर से सटे बखरवा गांव में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण अग्निकांड को आज एक साल हो गया, लेकिन अभी तक अग्निकांड पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल पाया। घटना में आठ श्रमिक जिंदा जल गए थे तथा दो ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था। कुल दस लोगों की मौत हुई थी, जबकि 10 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार सहायता राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन एक मृतक तथा सभी घायलों को अभी तक सहायता राशि नहीं मिली। इसे लेकर कई बार तहसील पर हंगामा भी हुआ।
बखरवा गांव में घनी आबादी के बीच संकरी गली में करीब 200 वर्ग गज के प्लाट में नितिन चौधरी की पटाखा और मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी थी। यहां बाल श्रमिकों के अलावा महिलाएं भी काम करतीं थी। बीते साल 5 जुलाई 2020 को पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी। घटना को लेकर लोगों में आक्रोश था। लखनऊ तक अग्निकांड की गूंज पहुंच गई थी। स्थिति बिगड़ती देख तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। प्रशासन ने कुल नौ मृतकों को मुआवजा राशि दे दी थी। जबकि नौ दिन तक जिंदगी मौत से जूझने के बाद जंग हारने वाली लक्ष्मी के परिजनों तथा घायलों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजे के लिए ग्रामीण कई बार आंदोलन भी कर चुके है।
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लक्ष्मी के पिता ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, इसलिए बेटी पटाखा फैक्टरी में मजदूरी करने चली जाती थी। अग्निकांड में वह गंभीर रूप से झुलस गई थी। लोगों से कर्जा लेकर बच्ची का उपचार कराया था। मेरठ स्थित अस्पताल में नौ दिन तक लक्ष्मी का उपचार चला, लेकिन उसकी जान नहीं बची। प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली।
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थाना प्रभारी और चौकी इंजार्च हुए थे निलंबित
भीषण अग्निकांड में चौकी इंजार्च रफीक अहमद की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। चौकी इंजार्च पर अवैध पटाखा फैक्टरी से वसूली करने का आरोप लगा था। जिसके बाद तत्कालीन कप्तान कलानिधि नैथानी ने थाना प्रभारी निरीक्षक और चौकी इंजार्च को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के भी आदेश दिए गए थे। फैक्टरी संचालक नितिन चौधरी और फरूखनगर निवासी सलीम को गिरफ्तार किया था। जिन पर रासुका लगाने की बात कही गई थी। मगर ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की हिलाहवाली से अग्निकांड के दोषियों को घटना के कुछ दिन बाद ही जमानत मिल गई थी और अब वह खुले घूम रहे हैं। एसडीएम आदित्य प्रजापति ने कहा कि मुआवजे के लिए फाइल शासन को भेजी हुई है। वहां से मंजूरी मिलते ही पीड़ितों को सहायता राशि दे दी जाएगी।