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गाजियाबाद हादसा: एक साथ उठीं छह अर्थियां, रुदन देखकर कांप उठा कलेजा, धनपुर गांव में नहीं जले चूल्हे

Wed, 12 Jul 2023 12:38 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 12 Jul 2023 12:38 AM IST
सार

मंगलवार सुबह गाजियाबाद में हुए हादसे में छह लोगों की खबर जिसने भी सुनी वहीं सहम गया। मेरठ के धनपुर गांव निवासी परिवार खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए कार में सवार होकर निकला था लेकिन शायद ही किसी को इस बात का अंदेशा था कि खाटू श्याम के दर्शन से पहले ही उन्हें मौत के दर्शन हो जाएंगे। गांव से जब एकसाथ छह अर्थियां निकलीं तो पूरा गांव रो पड़ा।

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Ghaziabad accident: Six death in one accident, heart trembled seeing crying, mourn in Dhanpur village
accident - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मेरठ के धनपुर गांव के लिए मंगलवार की रात बेहद मनहूस थी। इतनी कि आज तक कभी किसी परिवार पर ऐसा कहर नहीं टूटा। परिवार के छह लोगों की अर्थियां एक साथ उठीं तो हर किसी का कलेजा कांप उठा। महिलाएं बेहोश हो गईं। रुदन मच गया। छह अर्थियों को गांव के श्मशान घाट में ले जाया गया। वहां जगह तक कम पड़ गई। अलग से टीनशेड लगाना पड़ा। एक साथ सामूहिक चिताएं बनाकर तीनों बच्चों, दोनों महिलाओं और नरेंद्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। लोग बस यही कह रहे थे कि ऐसा दिन किसी को न दिखाए।
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धनपुर गांव में सोमवार सुबह हादसे की सूचना मिलने के बाद जयपाल यादव के घर में सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रहीं थीं। चीत्कार मचा था। परिवार के छह लोगों की मौत के बाद कोई समझ नहीं पा रहा कि पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाएं तो कैसे? जयपाल के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। कभी बेटे नरेंद्र का नाम लेते तो कभी बहू अनिता और बबीता का नाम लेकर रोने लगते। तीनों बच्चे दीपांशु, हिमांशु और वंशिका का नाम लेते हुए कई बार बदहवास हो गए।
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परिचित-रिश्तेदार गमगीन हैं कि अचानक ये क्या हो गया। नरेंद्र का पूरा परिवार उजड़ गया। धर्मेंद्र की पत्नी और बेटी चली गई। रात को सवा नौ बजे शव गांव पहुंचे तो हाहाकार मच गया। शवों को तीन एंबुलेंस से लाया गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर परिवार के लोग बदहवास हो गए।

 

कुछ देर तक देहरी पर रखने के बाद छह अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। हर किसी की आंख से आंसू बहने लगे। गांव के श्मशान घाट में एक साथ सामूहिक छह चिताएं बनाई गईं। जितेंद्र के 17 वर्षीय बेटे प्रियांक ने सभी छह शवों को मुखाग्नि दी। पिता जयपाल की हालत बिगड़ने के बाद उनको श्मशान में नहीं ले जाया गया।
 
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आठ साल के कार्तिक की हालत बेहद गंभीर
धर्मेंद्र के हाथ और पैर में फ्रैक्चर है। उनको परिवार के लोग घर ले आए। आठ साल के कार्तिक के सर में 22 टांके हैं, उसकी हालत बेहद गंभीर है। वह गौतमबुद्धनगर के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है।
 

एक सप्ताह पहले दोस्तों के साथ गए थे नरेंद्र
नरेंद्र और परिवार के लोग अक्सर खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए जाते रहते थे। एक सप्ताह पहले नरेंद्र दोस्तों के साथ भी दर्शन करने गए थे। इस बार परिवार के साथ प्रोग्राम बनाया था।

 

विद्यापीठ ग्लोबल स्कूल में पढ़ते थे तीनों बच्चे
दीपांशु, हिमांशु और वंशिका तीनों मवाना के विद्यापीठ ग्लोबल स्कूल में पढ़ते थे। दीपांशु ने इसी साल 88 फीसदी नंबरों के साथ 10वीं पास की थी। वह पढ़ने में बेहद होनहार था। हादसे में बच्चों के मरने की खबर जिसने भी सुनी वो सदमे में आ गया। गांव में हर कोई बच्चों के बारे में कहता रहा कि तीनों पढ़ने में बहुत तेज थे।

दीपांशु के जाने का नहीं था मन
दीपांशु का खाटू श्याम के दर्शन को जाने का मन नहीं था। दोस्त राजन ने बताया कि दीपांशु पहले मना कर रहा था, अचानक सुबह चला गया। दीपांशु सेना में अधिकारी बनना चाहता था, इसके लिए उसने एनडीए की कोचिंग भी शुरू कर दी थी। गांव के लोग कह रहे थे कि वो नहीं जाता तो बच जाता।
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