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अस्सी की उम्र में भी जवां है गीत लिखने की ललक, गीतकार संतोष आनंद से अमर उजाला की खास बातचीत

Wed, 29 Aug 2018 09:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 29 Aug 2018 09:03 PM IST
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Geetkar santosh aanand has a young desire to write bolywood songs in the age of eighty
गीतकार संतोष आनंद और उनकी पत्नी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अपने गीतों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले जाने माने गीतकार संतोष आनंद ने कहा है कि फिल्मी दुनिया में उनके गीतों की आज भी बहुत डिमांड है। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया में किसी जमाने में उनकी बादशाहत रही है। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने पुरानी यादों को टटोलते हुए कहा कि वह भी कुछ और दौर था, ये भी कुछ और दौर है। 80 बरस की संतोष आनंद की गीत लिखने की ललक कम नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक गीत लिखने में ज्यादा समय नहीं लगता। चंद मिनट में ही उन्होंने एक गीत लिखकर उन्होंने गुनगुनाकर सुनाया।  ‘ये जग वाले खुशियों का भी दम भरने नहीं देते, जीने भी नहीं देते, मरने भी नहीं देते’।
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मंगलवार रात बिजनौर के कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी में आयोजित कवि सम्मेलन में शिरकत करने आए मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने डाक बंगले में अमर उजाला से एक मुलाकात में कहा कि कविता कब कहां रही, सब कुछ झूठ चल रहा है। कहा कि आज के दौर में नया करने की कोई नहीं सोच रहा है। कहा कि फिल्मी दुनिया में एक जमाने में राजकपूर की तूती बोलती थी।

राजकपूर ने जिसे चाहा आसमान पर बैठा दिया। उन्होंने राजकपूर का बहुत साथ दिया। मनोज कुमार के साथ जुड़ने से राजकपूर उनसे नाराज थे। राजकपूर नहीं चाहते थे कि संतोष आनंद व सिने अभिनेता मनोज कुमार एक साथ काम करे। मनोज कुमार उन्हें नहीं छोड़ना चाहते थे। राजकपूर ने उन्हें आर के बैनर से निकाल दिया। उन्होंने कहा कि वह अकेले ऐसे शख्स हैं, जिन्हें आर के बैनर का फिल्म फेयर अवार्ड मिला।

उन्होंने कहा कि एक बार राजकपूर ने उनसे कहा था कि वह बड़े आदमी हैं, तभी से उन्होंने राजकपूर का साथ छोड़ने का मन बना लिया था। संतोष आनंद ने कहा कि फिल्मी दुनिया में वे जब तक गीतकार व लक्ष्मीकांत और प्यारे लाल संगीतकार रहे उनकी बादशाहत कायम रही। लक्ष्मीकांत और प्यारे लाल और वे फोन पर ही बात करके गीत बना लेते थे। कई फिल्में उनके गीतों के दम ही हिट हुई है। क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान जैसी कई फिल्में उनकी लिखे गीतों के बल पर ही चली। 

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नीरज जी से प्यार भी था तकरार भी  

Geetkar santosh aanand has a young desire to write bolywood songs in the age of eighty
गीतकार संतोष आनंद

संतोष आनंद ने कहा कि मशहूर गीतकार व कवि गोपालदास नीरज से उन्हें प्यार था व तकरार भी थी। वह अकेले ऐसे थे कि गोपाल दास नीरज को जो कहना होता था, उनके मुंह पर कह देते थे। उनसे वह प्यार भी करते थे। 
 
इश्क में लिखे गीत ने खूब बटोरी सुर्खियां  
संतोष आनंद के मुताबिक उन्हें भी किसी से इश्क हो गया था। इश्क में उन्होंने एक गीत लिखा ‘एक प्यार का नगमा है, मौजो की रवानी है, जिंदगी और कुछ नहीं तेरी मेरी कहानी है’। यह गीत शोर फिल्म में इतना हिट हुआ कि देश-विदेश में भी इसकी घूम रही।  

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मीडिया से खफा नजर आए  

संतोष आनंद देश की मीडिया से बेहद खफा नजर आए। उन्होंने कहा कि देश इस समय बेहद खराब दौर से गुजर रहा है। यह सब मीडिया की देन है। टीवी चैनलों पर रोज हिंदू-मुसलमानों को लड़ाया जा रहा है। यह बंद होना चाहिए। सब को देश के बारे में सोचना चाहिए, पर कोई नहीं सोच रहा।  

बिजनौर के पेड़े के दीवाने हो गए 
संतोष आनंद को बिजनौर का पेड़ा बहुत पसंद आया। बार-बार वह नगर पालिका के सभासद दीपक गर्ग से पेड़े की डिमांड करते रहे। कई पेड़े उन्होंने खाए। एक किलो पेड़े अपने साथ घर ले जाने को अलग से मंगवाए।

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