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UP News: ...जब गांधीजी ने कहा था मेरठ जैसा करें तो मिट जाए हिंदुस्तान से छुआछूत, पढ़ें खास स्टोरी

Mon, 30 Jan 2023 05:43 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 30 Jan 2023 05:43 PM IST
सार

1929 में मेरठ आए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि जमींदारियां और राजा महाराजा अपने मंदिरों में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए प्रवेश खोल दें तो हिंदुस्तान से छुआछूत मिट जाएगी।

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Gandhi had said that untouchability would end in India if doors of temple were opened for Scheduled Castes
महात्मा गांधी

विस्तार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मेरठ से बेहद करीबी नाता रहा है। 1929 में उन्होंने मेरठ जिले का सघन दौरा किया। जगह-जगह जाकर जनसभाएं कीं। वह असौड़ा रियासत के चौधरी रघुवीर नारायण सिंह के महल में गए तो वहां उनके मंदिर को देखकर उन्होंने पूछा कि क्या यहां सुबह को अनुसूचित जाति के लोग आते हैं, इस पर लोगों ने बताया कि इस मंदिर में सभी जाति के लोग आते हैं। इस पर गांधी जी बहुत प्रसन्न हुए। 

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इस बात का जिक्र उन्होंने अपने अखबार नवजीवन और हरिजन में करते हुए लिखा था कि हिंदुस्तान में हजारों जमींदारियां और राजा महाराजा हैं, जिनके अपने निजी मंदिर हैं। यदि वे अपने मंदिरों में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए प्रवेश खोल दें तो हिंदुस्तान से छुआछूत मिट जाएगी, जैसा कि असौड़ा रियासत में चौधरी रघुवीर नारायण सिंह ने किया हुआ है।
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इतिहासकार प्रो. विघ्नेश कुमार त्यागी बताते हैं कि गांधी जी का 1929 का दूसरी बार का मेरठ दौरा बेहद सघन था। गांधी जी रघुवीर नारायण सिंह की कार से जगह-जगह जाते थे। वह सफर के दौरान गाड़ी में ही अपनी नींद पूरी करते थे। इस दौरे में वह मेरठ कॉलेज भी गए। यहां छात्रों ने उन्हें सौ स्वर्ण मुद्राएं भेंट की थीं।
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1920 में आए थे पहली बार मेरठ
प्रो. विघ्नेश कुमार बताते हैं कि इससे पहले गांधीजी 22 जनवरी, 1920 को पहली बार मेरठ आए थे। देवनागरी स्कूल में सुबह के 9.30 बजे गांधी जी पहुंचे तो उनको देखने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था। उन्हें एक बग्घी में बैठाकर शहर में ले जाया गया था। यहां से गांधीजी वेस्ट एंड रोड पर कैसल व्यू पहुंचे थे। पत्तल की थाली में भोजन किया था। टाउन हॉल में सभा को संबोधित किया था।

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मेरठ कॉलेज में चला था 196 घंटे हवन
गांधीजी ने जब 1943 में उपवास रखा तो उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। मेरठ कॉलेज के छात्रों ने उनकी सेहत के लिए कॉलेज में 196 घंटे तक हवन किया था। उसके बाद यहां वट वृक्ष का रोपण किया था।

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