Meerut: महंगे ईंधन ने बढ़ाई उद्योगों की मुश्किलें, हर माह 200 करोड़ का अतिरिक्त बोझ, सराफा कारोबार भी सुस्त
मेरठ में डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से उद्योगों पर हर माह करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों और कारीगरों की कमी से सराफा कारोबार भी मंदी की मार झेल रहा है।
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पेट्रोल -डीजल की बढ़ती कीमतों का असर उद्योगों पर पड़ गया है। शहर का करीब 4000 करोड़ रुपये महीने का कारोबार करने वाला औद्योगिक क्षेत्र ईंधन की महंगाई की वजह से अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर है। उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से की इंडस्ट्री पर हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
यह दावा परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन, आईआईए और ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने किया है। परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन बताते हैं कि बीते 15 दिन में दूसरी बार डीजल-पेट्रोल के रेट बढ़ने का सबसे अधिक असर कंस्ट्रक्शन और बिल्डिंग मैटेरियल से जुड़े कारोबार पर पड़ा है।
इसी तरह मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा के मुताबिक ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से निर्माण सामग्री महंगी हो गई है। निर्माण क्षेत्र में करीब पांच प्रतिशत तक तेजी आई है।
ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पुंडीर का कहना है कि डीजल आधारित परिवहन व्यवस्था महंगी होने से कच्चे माल की ढुलाई और तैयार माल की सप्लाई दोनों प्रभावित है। इसके अलावा मेरठ के प्रमुख उद्योगों में शामिल खेल सामग्री, जिम उपकरण, ट्रांसफार्मर, ट्रैक्टर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उत्पादों की लागत भी बढ़ गई।
इसी तरह आईआईए के वाइस चेयरमैन राजीव अग्रवाल का मानना है कि पहले से ही उत्पादन लागत बढ़ी हुई है। बाजार की प्रतिस्पर्धा के बीच ईंधन की महंगाई ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सर्वाधिक एमएसएमई पर प्रभाव पड़ा है। यदि ईंधन कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो जल्द ही सीधा असर बाजार में दिखेगा। उत्पादों की कीमतों का बढ़ना तय हो गया है।
कभी देर रात तक जगमगाने वाला मेरठ का सराफा बाजार इन दिनों सूनी गलियों और टूटती उम्मीदों फसाना बन गया है। सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों और आयात शुल्क में बढ़ोतरी ने कारोबार की चमक फीकी कर दी है। विवाह सीजन होने के बावजूद बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल गायब है।
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बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में मेरठ से 12 हजार कारीगर गए थे। ये कारीगर वापस नहीं लौटे हैं। ऑर्डर न होने के कारण ठेकेदार उन्हें बुला भी नहीं रहे हैं। कारीगर को मेरठ बुलाकर खाली बैठने के स्थान पर उनके खातों में पैसा डाल दिया गया है।
अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि सोना-चांदी के लगातार बढ़ते दामों ने भी ग्राहकों को बाजार से दूर कर दिया है। पहले नील गली जैसे बाजार में देर शाम तक तक भीड़ रहती थी, अब अधिकांश दुकानें सुबह से शाम तक सूनी रहीं।
11 दिन में हुआ 550 करोड़ रुपये का घाटा
बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन, चैंबर फॉर डेवलपमेंट एंड प्रमोशन ऑफ एमएसएमई, मेरठ बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन से मिले आंकड़ों के अनुसार इस मंदी के कारण प्रतिदिन करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। मेरठ बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन महामंत्री डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि छोटे कारोबारियों और कारीगरों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है। छोटे यूनिट बंद हो गई हैं। सराफ बाजार सिर्फ सुनारों के फायदे-नुकसान तक सीमित नहीं है। यह बाजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शहर के दो लाख लोगों को रोजगार देता है।
नगर निगम के वार्ड-81 तारापुरी के लोगों ने सोमवार को नगर निगम के खिलाफ हंगामा कर दिया। आरोप है कि तारापुरी में कूड़े के ढेर लगे हैं और जलभराव हो रहा है। बकरीद के त्योहार पर भी सफाई नहीं कराई गई है। गंदगी से संक्रमण फैलने का खतरा जताकर निगम की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। सपा नेता शकील भारती ने सफाई नायक को हटाने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए नगर आयुक्त को शिकायत पत्र दिया।
वार्ड- 81 में लंबे समय से कूड़ा जमा होने और नियमित सफाई न होने का आरोप लगाया। लोगों का कहना कि बकरीद के मौके पर भी सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। उन्होंने सफाई नायक को दोषी ठहराया। पार्षद पति अफजाल ने बताया कि लिसाड़ी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में कूड़े के ढेर से निकलना मुश्किल है। कई स्थानों पर नालियां चोक पड़ी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है।