फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Four months later, the corporation's trash car

चार माह बाद भी बिना नंबर दौड़ रहीं निगम की कूड़ा गाड़ियां

Mon, 18 Mar 2019 03:26 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 18 Mar 2019 03:26 AM IST
विज्ञापन
Four months later, the corporation's trash car
मेरठ - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
 सावधान, महानगर की सड़कों पर दौड़ने वाली निगम की कूड़ा गाड़ियों से जरा बचकर चलें। क्योंकि खरीद के चार माह बाद भी इन गाड़ियों पर अभी तक रजिस्ट्रेशन नंबर ही नहीं है, ऐसे में दुर्घटना होने की स्थिति में इन गाड़ियों की पहचान नहीं हो सकेगी। अब से पहले भी दुर्घटना के कारण निगम की कई गाड़ियां थानों में बंद हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन इन्हें आज तक नहीं छुड़ा पाया है।

चार माह पहले खरीदी गयी 158 कूड़ा गाड़ी
- नगर निगम ने शहर से डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए करोड़ों रुपये से 158 छोटे हाथी खरीदे। साथ ही 22 ट्रैक्टर की भी खरीद की गई। इन सभी वाहनों को शहर की सड़कों पर उतारा जा चुका है। मुख्य मार्ग ही नहीं बल्कि छोटी छोटी गलियों में निगम के छोटे हाथी और ट्रैक्टर कूड़ा उठाते दौड़ रहे हैं, लेकिन एक भी वाहन की नंबर प्लेट पर गाड़ी नंबर नहीं है। ऐसे में इन गाड़ियों से दुर्घटना होने की स्थिति में कार्रवाई होना तो दूर गाड़ी चोरी होने पर निगम प्रशासन इसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करा पाएगा।
विज्ञापन


सरकार के आदेश को हवा में उड़ा रही निगम  की गाड़ी
- मोटर वाहन एक्ट के मुताबिक कोई भी वाहन बगैर इंश्योरेंस और गाड़ी नंबर लिए सड़क पर नहीं उतरना चाहिए। यदि इसके बावजूद गाड़ी सड़क पर उतरी तो गाड़ी को सीज करने के साथ ही चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन नगर निगम प्रशासन चार माह बाद भी रजिस्ट्रेशन नंबर न लेकर नियमों का मखौल उड़ा रहाहै। नगर निगम प्रशासन ने कूड़ा गाड़ियों की खरीद ऑनलाइन पोर्टल से की थी। जिसके कारण न तो गाड़ियों का इंश्योरेंस ही मिला और न ही आरटीओ में रजिस्ट्रेशन नंबर। जबकि अगर किसी एजेंसी से वाहनों की खरीद होती तो सभी वाहनों का इंश्योरेंस और आरटीओ से गाड़ी नंबर लेने की जिम्मेदारी उसी एजेंसी की होती। निगम को गाड़ी आपूर्ति के समय ही सभी गाड़ियों के नंबर आरसी भी मिलती। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब नगर निगम को इसके लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।  
विज्ञापन
विज्ञापन


गाड़ी नंबर हैं नहीं, फिर भी जीपीएस पर कैसी लोकेशन  
- कहने को तो नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों में जीपीएस लगा है। जीपीएस सिस्टम पर निगरानी रखने के लिए नगर निगम में कंट्रोल रूम भी खुला है। लेकिन हब सवाल है कि जब वाहनों के गाड़ी नंबर ही नहीं हैं तो जीपीएस पर किस गाड़ी नंबर के आधार पर लोकेशन ट्रैक की जा रही है।

मेडिकल थाने में गल रही है निगम की कूड़ा गाड़ी
- नगर निगम की कूड़ा गाड़ी से आठ साल पहले एक दुर्घटना हो गयी थी। उसको मेडिकल पुलिस ने थाने में खड़ा कर लिया था। लेकिन गाड़ी पर रजिस्ट्रेशन नंबर न होने के कारण वह गाड़ी थाने में खड़ी-खड़ी गल गई है। इस लापरवाही के कारण निगम को कम से कम दस लाख रुपये का नुकसान हुआ है।


पिछले माह भेजी जा चुकी है फाइल
 नगर निगम ने सभी नई गाड़ी और ट्रैक्टर के इंश्योरेंस करा लिए हैं। रजिस्ट्रेशन नंबर के लिए आरटीओ में फाइल पिछले माह भेजी जा चुकी है। नंबर मिलने में देरी कैसे हो रही है दिखवाया जाएगा। रही बात जीपीएस से गाड़ी के लोकेशन की तो उसके लिए निगम ने अपने स्तर से गाड़ी नंबर बनाए हुए हैं। आरटीओ से गाड़ी नंबर मिलने के बाद उन्हीं का उपयोग किया जाएगा।
             मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed