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कार्बनिक क्षमता घटने से उर्वरा शक्ति होती है कम, जमीन हो सकती है बंजर
Mon, 08 Jul 2019 04:36 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Mon, 08 Jul 2019 04:36 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी में कृषि भूमि में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा घटती जा रही है। ऐसे में वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ रही है, क्योंकि कार्बनिक पदार्थों की मात्रा घटने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर काम नहीं किया गया तो इसका विपरीत असर फसलों पर नजर आने लगेगा। इसी को देखते हुए ऑर्गेनिक मैटर मिशन 2025 योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कृषि विवि के वैज्ञानिकों को भी इस योजना पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है।
हाल ही में लखनऊ में प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि शिक्षा अनुसंधान अमित मोहन प्रसाद ने बैठक की। बैठक में कृषि विश्वविद्यालय और आईसीएआर के वैज्ञानिकों के साथ ही प्रदेश के कृषि निदेशक, उपनिदेशक और महानिदेशक उपकार भी शामिल हुए।
बैठक में प्रदेश में मिट्टी में घटती कार्बनिक पदार्थों की मात्रा को कैसे बढ़ाया जाए इस विषय पर चर्चा हुई। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस वक्त प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर कृषि भूमि में कार्बनिक पदार्थों की 0.2 से 0.4 के बीच है, जो मानक से कम है। इसे बढ़ाने के लिए ही सरकार ऑर्गेनिक मैटर मिशन 2025 योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है।
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हाल ही में लखनऊ में प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि शिक्षा अनुसंधान अमित मोहन प्रसाद ने बैठक की। बैठक में कृषि विश्वविद्यालय और आईसीएआर के वैज्ञानिकों के साथ ही प्रदेश के कृषि निदेशक, उपनिदेशक और महानिदेशक उपकार भी शामिल हुए।
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बैठक में प्रदेश में मिट्टी में घटती कार्बनिक पदार्थों की मात्रा को कैसे बढ़ाया जाए इस विषय पर चर्चा हुई। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस वक्त प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर कृषि भूमि में कार्बनिक पदार्थों की 0.2 से 0.4 के बीच है, जो मानक से कम है। इसे बढ़ाने के लिए ही सरकार ऑर्गेनिक मैटर मिशन 2025 योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है।
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ये जिले है सबसे ज्यादा प्रभावित
मोदीपुरम। वैज्ञानिकों के अनुसार, मेरठ, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, बदायू, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, मथुरा, आगरा, गौतमबुद्धनगर, हाथरस, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, शाहजाहपुर, बरेली समेत प्रदेश में कई ऐसे जिले हैं जहां मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा 0.2 से .3 तक ही रह गई है।
किसानों को ऑर्गेनिक खेती पर देना होगा जोर
इस योजना के मुताबिक मिट्टी की घटती कार्बनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए किसानों को ऑर्गेनिक खेती पर जोर देना होगा। इसके लिए उन्हें फसलों में पेस्टीसाइड का कम उपयोग करना होगा। साथ ही ज्यादा से ज्यादा फसल अवशेषों को मिट्टी में बनाए रखना होगा जिससे मिट्टी में कार्बन पदार्थों की मात्रा बढ़ सके। इसके अलावा ढैंचा, सनई, लोबिया की फसल से भी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है।
फसलों को होता है नुकसान
कृषि भूमि में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा 0.5 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए। कार्बनिक पदार्थ मृदा उत्पादकता को बनाए रखने, मृदा व जल प्रदूषण को कम करने व जलवायु परिवर्तन के प्रति खेती को टिकाऊ बनाने में सहायक है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा घटने से मृदा की उर्वरा शक्ति कम होती है। जिसके कारण फसलों को भी नुकसान होता है।
मोदीपुरम। वैज्ञानिकों के अनुसार, मेरठ, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, बदायू, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, मथुरा, आगरा, गौतमबुद्धनगर, हाथरस, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, शाहजाहपुर, बरेली समेत प्रदेश में कई ऐसे जिले हैं जहां मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा 0.2 से .3 तक ही रह गई है।
किसानों को ऑर्गेनिक खेती पर देना होगा जोर
इस योजना के मुताबिक मिट्टी की घटती कार्बनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए किसानों को ऑर्गेनिक खेती पर जोर देना होगा। इसके लिए उन्हें फसलों में पेस्टीसाइड का कम उपयोग करना होगा। साथ ही ज्यादा से ज्यादा फसल अवशेषों को मिट्टी में बनाए रखना होगा जिससे मिट्टी में कार्बन पदार्थों की मात्रा बढ़ सके। इसके अलावा ढैंचा, सनई, लोबिया की फसल से भी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है।
फसलों को होता है नुकसान
कृषि भूमि में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा 0.5 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए। कार्बनिक पदार्थ मृदा उत्पादकता को बनाए रखने, मृदा व जल प्रदूषण को कम करने व जलवायु परिवर्तन के प्रति खेती को टिकाऊ बनाने में सहायक है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा घटने से मृदा की उर्वरा शक्ति कम होती है। जिसके कारण फसलों को भी नुकसान होता है।
कार्बनिक पदार्थों की कमी से ये होता है नुकसान
मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है।
उत्पादन पर असर पड़ता है, फसल समय से पहले खराब हो जाती।
फसलों को पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।
मृदा अपरदन से भूमि बंजर हो जाती है।
यह चिंता का विषय है
वेस्ट यूपी की कृषि भूमि में घटती कार्बनिक पदार्थ की मात्रा चिंता का विषय है। अगर इसमें लगातार गिरावट आएगी तो मिट्टी खराब हो जाएगी और फसल उत्पदन पर भी असर पडेगा। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए आर्गेनिक मैटर मिशन 2025 शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कृषि विवि में भी इस पर काम किया जाएगा। - डा यूपी शाही, वैज्ञानिक मृदा विज्ञान विभाग, कृषि विवि
मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है।
उत्पादन पर असर पड़ता है, फसल समय से पहले खराब हो जाती।
फसलों को पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।
मृदा अपरदन से भूमि बंजर हो जाती है।
यह चिंता का विषय है
वेस्ट यूपी की कृषि भूमि में घटती कार्बनिक पदार्थ की मात्रा चिंता का विषय है। अगर इसमें लगातार गिरावट आएगी तो मिट्टी खराब हो जाएगी और फसल उत्पदन पर भी असर पडेगा। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए आर्गेनिक मैटर मिशन 2025 शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कृषि विवि में भी इस पर काम किया जाएगा। - डा यूपी शाही, वैज्ञानिक मृदा विज्ञान विभाग, कृषि विवि