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बाबू की मौत से एआरटीओ विभाग में हड़कंप, परिजनों ने लगाया ये गंभीर आरोप

Mon, 12 Mar 2018 09:21 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Mon, 12 Mar 2018 09:21 PM IST
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Fear in ARTO Department from Babu's death, this is serious allegation
फाइल फोटो

मुजफ्फरनगर में एआरटीओ कार्यालय में तैनात बाबू दीपेंद्र सिंह की मेरठ में हुई मौत के मामले में एआरटीओ प्रशासन घिर गए हैं। बाबू के परिजनों ने एआरटीओ पर वेतन रोकने और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। इससे विभाग में अफरातफरी का माहौल है। 

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उधर, विभागीय अफसर मृतक बाबू द्वारा दिए गए मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच कराने में लगे हैं। परिजनों के आरोप को लेकर आला अफसरों तक में खलबली मची है। 

मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी बाबू दीपेंद्र सिंह मुजफ्फरनगर में एआरटीओ में काफी समय से तैनात थे। विभाग में पहले वह पंजीयन पटल देखते थे, लेकिन शिकायतों के बाद उनसे यह विभाग ले लिया गया था। दीपेंद्र की मेरठ में मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने एआरटीओ राजीव कुमार बंसल पर दीपेंद्र सिंह का मानसिक उत्पीड़न और वेतन रोकने के आरोप लगाए हैं। इसको लेकर परिजनों ने कंकरखेड़ा थाने पर एआरटीओ के विरुद्ध तहरीर दी है। 
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इस मामले को लेकर एआरटीओ विभाग में हड़कंप मच गया है। बताते हैं कि कार्यालय में तैनाती के दौरान बाबू का रिकार्ड बेहतर नहीं रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2017 में बाबू बिना बताए लगातार कई माह तक छुट्टी पर रहे थे। इसको लेकर एआरटीओ ने स्पष्टीकरण मांगा, तो दीपेंद्र ने मेडिकल सर्टिफिकेट दिए थे। हालांकि यह मेडिकल किस बीमारी को लेकर दिए गए हैं, विभाग इसकी जांच करा रहा है। हाल ही में दस जनवरी को आला अधिकारियों के निर्देश पर दीपेंद्र सिंह को कार्यालय में ज्वाइनिंग दी गई।
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Fear in ARTO Department from Babu's death, this is serious allegation
फाइल फोटो

एआटीओ राजीव कुमार बंसल का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। वेतन उनके स्तर से नहीं रोका गया है। आला अधिकारियों ने उनके मेडिकल की जांच करने को कहा है। हालांकि फरवरी माह का वेतन उनके खाते में ट्रांसफर किया गया है। पूर्व में अवकाश पर रहे समय का वेतन देना उनके हाथ में नहीं है। 

मृतक आश्रित कोटे में मिली थी नौकरी
दीपेंद्र सिंह के पिता आरपी सिंह एआरटीओ रहे हैं। जिनकी काफी समय पूर्व एक हादसे में मौत होना बताया गया है। पिता की मृत्यु के बाद दीपेंद्र सिंह को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दी गई थी। पिछले छह साल से वह मुजफ्फरनगर एआरटीओ कार्यालय में तैनात थे।

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