फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Father's Day 2021: fathers cries remembering their son after seeing her photo after losing them due to Corona

फादर्स डे : पापा ! बेटे कमाने लगे हैं, अब आप आराम करो..., हाथों में लाडलों की तस्वीर लिए फफक पड़ते हैं पिता

Sun, 20 Jun 2021 10:23 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 20 Jun 2021 10:23 AM IST
सार

कोरोना ने न जाने कितने ही बेटों को मौत की नींद सुला दिया। आज 'फादर्स डे' के मौके पर बेटों को खो चुके पिता उनकी तस्वीरों को निहारकर नम आंखों से उनकी यादों में खोए हैं।

विज्ञापन
Father's Day 2021: fathers cries remembering their son after seeing her photo after losing them due to Corona
ग्रेगरी राफेल अपने जुड़वां बेटों के साथ जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी - फोटो : amar ujala

विस्तार

पापा बहुत काम कर लिया... अब बस आराम करो। तुम्हारे बेटों ने अब कमाना शुरू कर दिया है। बेटों की ये बातें सुनकर पिता मुस्कुराने लगते... बोलते- ठीक है। मैं कहां कुछ कर रहा हूं। लेकिन कोरोना महामारी ने ऐसे कितने ही बेटों को अपने पिता से छीन लिया। आज फादर्स डे के मौके पर ऐसे पिता के दर्द को बयां नहीं किया जा सकता। कोई पिता बेटे की फ्रेम में जड़वाई हुई फोटो को देखकर आंसू बहा रहा है तो कोई गिफ्ट किया हुआ पेन देखकर बिलख रहा है। शहर में ऐसे भी तमाम परिवार हैं जिन्होंने एक नहीं दो-दो जवान बेटे खो दिए। पिता अब बेटे की याद को जिंदा रखने के लिए उसके देखे सपने को पूरा करेंगे, किसी बच्चे को गोद लेकर पढ़ाएंगे। ऐसे पिता के हौसले को सलाम।

विज्ञापन


‘त्योहार की तरह मनाते थे फादर्स डे’
विधि का विधान है कि आज फादर्स डे पर बेटा मेरे साथ नहीं है। आज का दिन घर में त्योहार की तरह मनाया जाता था। राजीव ने कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ा। हर जरूरी चीज समय से पहले आ जाती थी। तीनों बेटों में राजीव हर सुख-दुख में पूरे परिवार की मदद करता। हर किसी का सहयोग करता था। राजीव के संस्कार ही हैं जो एक बेटा प्रखर एमटेक कर रहा है। बेटी कृतिका ने सीए किया है। राजीव के जाने से पूरा परिवार टूट गया है। लेकिन बच्चों ने हर कसर को पूरा किया है। आज भी जब डोर बेल बजती है तो ऐसा लगता की राजीव आ गया है। उसकी यादें हमेशा सबको रुलाती रहेंगी। कुछ ऐसा करेंगे कि उसको हमेशा यादों में जिंदा रखें। - हरि भगवान रस्तोगी, शास्त्री नगर
विज्ञापन


‘मेरी हर जरूरत को पूरा करता था बेटा’
बेटे पंकज ग्रोवर पर घर की जिम्मेदारी थी। होटल से लेकर सारे काम वही करता था। मेरे दामाद की पिछले साल मौत हो गई। बेटी भी भाई के पास ही रह रही थी। मेेरी हर जरूरत को पूरा करता था। फादर्स डे के दिन हम सभी लोग सेलिब्रेट करते थे। पंकज, मैं, पोती रादिमा, केशव सभी साथ मिलकर खुशियां मनाते थे। वह सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेता था। उसके दोस्त उसे प्यार से शेरू बुलाते थे। इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा। अभी तक हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये सब क्या हो गया। ये दिन मेरे और पोती-पोते के लिए बहुत मुश्किल है। वो हमेशा सबकी यादों में रहेगा। किसी और परिवार को भगवान ऐसा दिन न दिखाए। किसी बच्चे के सिर से उसके पिता का साया ऐसे न उठे। - विनोद ग्रोवर, देवपुरी

विज्ञापन
विज्ञापन

‘बेटे के सपनों को पूरा करने की रहेगी कोशिश’
बीटेक करने के बाद ही बेटे सिद्धांत झुनझुनवाला की नौकरी लग गई। उसको समाज सेवा का इतना शौक था कि नौकरी लगते ही तीन अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना शुरू कर दिया। कुछ दिन पहले जॉब छोड़ने के बाद अब वह ऑनलाइन शॉपिंग बिजनेस कर रहा था। उसे पशु-पक्षियों से भी बहुत प्यार था। रोज कुत्तों को खाना खिलाता था। फादर्स डे कभी वैसे नहीं मनाया, लेकिन वो विश जरूर करता था। मेरी सभी बातें मानता था। अब वो मेरा सहारा बन गया था। छोटी बहन हिमांशी का आईआईटी जोधपुर में एडमिशन हुआ तो उसने उसका जाने के लिए हौसला बढ़ाया। मुझसे कहता था कि पापा आप चिंता मत करो। मैं काम करने लगा हूं। उसने जिन बच्चों को गोद लिया, कोशिश रहेगी, उनको आगे पढ़ाएं।   - पवन झुनझुनवाला, शिव सरोवर, गढ़ रोड

‘पिछले साल फ्रेम में फोटो जड़वाकर दिया था’ 
मेरे दोनों इंजीनियर बेटे रजा हुसैन जैदी और शुजा हुसैन जैदी एक साथ छोड़कर चले गए। मैं रिटायर हुआ तो कहते थे कि पापा अब आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। हम कमाने लगे हैं। फादर्स डे पर हर बार विश करते थे। पिछली बार तो बेटों ने अपने साथ खिंचाई फोटो फ्रेम में जड़वाकर दी थी। कहा था पापा हमारी तरफ से फादर्स डे पर ये आपका गिफ्ट है। दोनों मेरा सहारा थे। कहते थे आपने बहुत काम कर लिया अब हम हैं। कोरोना ने खुशियां छीन लीं। अब फादर्स डे पर उनकी सिर्फ यादें हैं। किसी और परिवार को ऊपर वाला ये दिन न दिखाए। रजा की सिर्फ चार महीने की बेटी है। छोटा बेटा मुर्तजा भी आज के दिन उनको बहुत याद कर रहा है। - वकार हुसैन जैदी, शास्त्री नगर सेक्टर-10 

‘दोनों साथ लाए थे खुशियां, साथ ले गए’
मेरे दोनों जुड़वां बेटे जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी दुनिया से चले गए। फादर्स डे पर हर बार विश करते थे। इस बार ये दिन बहुत भारी लग रहा है। उनकी यादें कितनी हैं, इस बारे में बता नहीं सकता हूं। दोनों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब बनाया, नौकरी लगी तो दिल को सुकून मिला कि अब मुझे सहारा मिलेगा। लेकिन कोरोना ने खुशियां छीन लीं। कुछ भी कहने को शब्द नहीं हैं। ऐसा दिन भगवान किसी को न दिखाए। एक साथ आए थे, एक साथ चले गए। जितनी खुशियां थीं सब बिखर गईं। दोनों कोरिया और जर्मनी जाना चाहते थे, लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई, इसका उम्रभर मलाल रहेगा। - ग्रेगरी राफेल, शिक्षक, कैंट

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed