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यूपी: किसानों को नहीं मिलेगा नई मुआवजा नीति का लाभ, डीएम अनिल ढींगरा ने ठुकराई मांगें

Sun, 20 Oct 2019 02:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sun, 20 Oct 2019 02:42 AM IST
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Farmers will not get the benefit of new compensation policy
किसानों की बैठक लेते डीएम व अन्य अधिकारी। - फोटो : aaa

शताब्दी नगर में 620 एकड़ जमीन को किसानों के कब्जे से मुक्त कराने को लेकर दूसरे दिन भी प्रशासनिक अफसर किसानों को मनाने में लगे रहे। जहां किसान नई मुआवजा नीति से मुआवजा लेने की मांग पर अड़े रहे।

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वहीं जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया और किसानों से विकास कार्यों में सहयोग करने के लिए कहा। इस पर गुस्साए किसानों ने बैठक में नारेबाजी शुरू कर दी और आर-पार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। किसानों ने कहा कि वे मर जाएंगे, लेकिन जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाएगी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
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बता दें, शुक्रवार को प्रशासन और एमडीए की टीम ने शताब्दीनगर पहुंचकर किसानों की जमीन पर कब्जा लेने का प्लान तैयार किया था, लेकिन किसानों के विरोध के चलते यह प्लान फेल हो गया। जिसके चलते शनिवार को बचत भवन में बैठक बुलाकर किसानों को समझाने का प्रयास किया गया।
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जिलाधिकारी ने किसानों से कहा कि वर्ष-1987, 1988 में भूमि अधिग्रहण की धारा 4 (6) लागू की गई और अवॉर्ड वर्ष-1990 में की गई। 1620 एकड़ में से 1000 एकड़ पर एमडीए द्वारा कब्जा प्राप्त कर वहां कार्य भी कराए गए। उन्होंने कहा कि 620 एकड़ पर किसानों ने मुआवजा लेने के बाद भी कब्जा नहीं दिया। वहीं, तीन बार किसानों ने बढ़ा प्रतिकर भी ले लिया।

शासन और हाईकोर्ट ने किया किनारा
बैठक मे एमडीए तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि शताब्दीनगर के 874 किसानों द्वारा जिला न्यायालय में मूल मुआवजे में बढ़ोत्तरी के लिए वाद दायर किया गया। जिस पर न्यायालय द्वारा दो और सात रुपये प्रतिवर्ग गज मुआवजा बढ़ाने का निर्णय दिया गया। जिसका भुगतान एमडीए द्वारा कर दिया गया था।

वहीं, वर्ष-2011 मेें किसानों ने दोबारा से विरोध किया। जिस पर एमडीए द्वारा दोबारा 690 रुपये प्रतिवर्ग गज के हिसाब से बढ़ा हुआ प्रतिकर देने पर सहमति बनी। जिसके लिए 8 अप्रैल 2011 को समझौता हुआ। वर्ष-2011 में हुए समझौते के बाद 165 किसानों को बढ़े हुए प्रतिकर की शेष धनराशि और 709 किसानों को बढ़े हुए प्रतिकर के हिसाब से मुआवजा दिया गया। इसके बाद किसान हाईकोर्ट पहुंच गए। इस बार उन्हें यहां से झटका लग गया। वहीं, शासन ने भी किसानों की मांग पर कोई विचार नहीं किया था।

इसलिए गंभीर है मामला
शताब्दीनगर स्थित सेक्टर छह योजना तीन में आठ आवंटी प्लॉट पर कब्जा न मिल पाने के कारण हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने एमडीए को प्लॉट पर कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। जिसकी अगली सुनवाई 23 अक्तूबर को होनी है। इसका जवाब देने के लिए एमडीए अधिकारियों में खलबली मची है। जिस कारण अधिकारी किसानों को मनाने का प्रयास कर रहे हैं।

महिलाओ ने सुनाई खरी-खोटी
बैठक में महिलाओं ने भी डीएम को जमकर खरी-खोटी सुनाई। महिलाओं ने कहा कि हमारे घर के घर बर्बाद हो गए। लोग मर जाएंगे, लेकिन इनका क्या जाएगा। इस बार पुरुषों से आगे महिलाएं होंगी फिर देखते हैं ये अफसर कैसे दबाव बनाएंगे। वहीं, कलक्ट्रेट में किसानों ने ट्रैक्टरों पर बैठकर भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद के नारे लगाए।

भट्टा पारसौल संभव
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यहां भी भट्टा पारसौल हो सकता है। किसानों ने कहा कि जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि बैठक में बुलाकर प्रशासन और एमडीए अधिकारी हमारे ऊपर दबाव बना रहे थे।

ये रहे मौजूद
बैठक में एसएसपी अजय साहनी, एडीएम सिटी अजय तिवारी, एमडीए सचिव प्रवीणा अग्रवाल, एमडीए मुख्य अभियंता दुर्गेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

भाकियू नेता विजयपाल घोपला का अनशन जारी
अधिक मुआवजे की मांग को लेकर भाकियू नेता विजयपाल घोपला का अनशन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। उनका कहना है कि ज तक किसानों को नई नीति के तहत मुआवजा नहीं मिलेगा अनशन जारी रहेगा। हालांकि धरने के दूसरे दिन विजयपाल की तबियत बिगड़ गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने धरनास्थल पर पहुंचकर उनकी जांच की।
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