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Meerut News: अधिग्रहण की शर्तों पर अड़े किसान, आंदोलन की चेतावनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने के लिए दूसरे चरण में प्रस्तावित 292 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का मामला फिर गरमा गया है। करीब दो वर्षों से खरखौदा के छतरी मोड़ पर धरना दे रहे तीन गांवों के करीब 800 किसानों ने बुधवार को संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल सिंह के नेतृत्व में बैठक कर अपनी मांगों पर चर्चा की। किसानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो धरने को आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए तीन गांवों की कृषि भूमि चिह्नित की गई है। किसान भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। जून में एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश सिंह समेत कई अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की थी।
बुधवार की बैठक में किसानों ने कहा कि तीनों गांवों के पूरे रकबे का समान मूल्य निर्धारित किया जाए। छतरी, खड़खड़ी और गोविंदपुरी के किसानों को उच्चतम बाजार मूल्य 4,880 रुपये प्रति वर्ग मीटर के चार गुना यानी करीब 19,520 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाए। सभी किसानों को अधिग्रहित भूमि के बदले 10 प्रतिशत भूखंड देने की मांग की गई। किसानों ने गांव की 200 मीटर की परिधि में आने वाली जमीन को अधिग्रहण से मुक्त रखने और योजना से जुड़े प्रत्येक किसान परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग भी रखी है।
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बैठक में निर्णय लिया कि किसान अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। चेतावनी दी कि अधिकारियों और कर्मचारियों को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इस मौके पर नीलू नागर, इंद्रमुनि त्यागी, संतरपाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
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खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने के लिए दूसरे चरण में प्रस्तावित 292 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का मामला फिर गरमा गया है। करीब दो वर्षों से खरखौदा के छतरी मोड़ पर धरना दे रहे तीन गांवों के करीब 800 किसानों ने बुधवार को संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल सिंह के नेतृत्व में बैठक कर अपनी मांगों पर चर्चा की। किसानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो धरने को आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए तीन गांवों की कृषि भूमि चिह्नित की गई है। किसान भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। जून में एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश सिंह समेत कई अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की थी।
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बुधवार की बैठक में किसानों ने कहा कि तीनों गांवों के पूरे रकबे का समान मूल्य निर्धारित किया जाए। छतरी, खड़खड़ी और गोविंदपुरी के किसानों को उच्चतम बाजार मूल्य 4,880 रुपये प्रति वर्ग मीटर के चार गुना यानी करीब 19,520 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाए। सभी किसानों को अधिग्रहित भूमि के बदले 10 प्रतिशत भूखंड देने की मांग की गई। किसानों ने गांव की 200 मीटर की परिधि में आने वाली जमीन को अधिग्रहण से मुक्त रखने और योजना से जुड़े प्रत्येक किसान परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग भी रखी है।
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बैठक में निर्णय लिया कि किसान अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। चेतावनी दी कि अधिकारियों और कर्मचारियों को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इस मौके पर नीलू नागर, इंद्रमुनि त्यागी, संतरपाल सहित कई लोग मौजूद रहे।