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किसान जान जोखिम में डालकर पार करते हैं गंगा
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गांव बिहारगढ़ का किसान गंगा के बीच से भैंसा बुग्गी निकालते हुए।
- फोटो : KHATAULI
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किसान जान जोखिम में डालकर पार करते हैं गंगा
मोरना। गंगा किनारे बसे गांव बिहारगढ़ के किसान जान जोखिम में डालकर गंगा के पानी से गुजरते हुए खेतीबाड़ी करने जाते हैं। गंगा पार करते वक्त कई किसान सहित पशुओं की मौतें हो चुकी हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस उपाय नहीं हो सके।
हजारों लोगों की आबादी के इस गांव में चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार की योजना और विकास की इस गांव की ओर पगडंडी नहीं जाती। गंगा खादर के तलहटी में यह गांव बसा हुआ है, जिसमें चौहान, दलित, ब्राह्मण, सैनी जाति के लोग आदि सहित आसपास पंजाब और हरियाणा से आए किसानों के डेरे बने हुए हैं। किसानों की ज्यादातर जमीन गंगा के खादर क्षेत्र में आने से गंगा के गहरे पानी के बीच भैंसा बुग्गी के सहारे पार करना होता है, जिसमें प्रतिदिन उनकी जान का खतरा बना रहता है। गांव किसान शिवकुमार, सोनू, राहुल, मनोज, विक्रम, विजयपाल, मोहन, विकास, बिजेंद्र, नवीन, सोम, मांगे आदि ने बताया वर्षों से लगातार गंगा पार करते समय कई किसानों सहित पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्राम प्रधान बुद्धराम चौहान का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव के मजरा गांव इलाहाबास में जच्चा बच्चा केंद्र तो बना हुआ है, लेकिन वहां कोई सुविधा न होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सहायता नहीं मिल पाती। गंगा पार करने के लिए एक अस्थायी पुल बनाए जाने की मांग सरकार से कई बार की जा चुकी है।
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मोरना। गंगा किनारे बसे गांव बिहारगढ़ के किसान जान जोखिम में डालकर गंगा के पानी से गुजरते हुए खेतीबाड़ी करने जाते हैं। गंगा पार करते वक्त कई किसान सहित पशुओं की मौतें हो चुकी हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस उपाय नहीं हो सके।
हजारों लोगों की आबादी के इस गांव में चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार की योजना और विकास की इस गांव की ओर पगडंडी नहीं जाती। गंगा खादर के तलहटी में यह गांव बसा हुआ है, जिसमें चौहान, दलित, ब्राह्मण, सैनी जाति के लोग आदि सहित आसपास पंजाब और हरियाणा से आए किसानों के डेरे बने हुए हैं। किसानों की ज्यादातर जमीन गंगा के खादर क्षेत्र में आने से गंगा के गहरे पानी के बीच भैंसा बुग्गी के सहारे पार करना होता है, जिसमें प्रतिदिन उनकी जान का खतरा बना रहता है। गांव किसान शिवकुमार, सोनू, राहुल, मनोज, विक्रम, विजयपाल, मोहन, विकास, बिजेंद्र, नवीन, सोम, मांगे आदि ने बताया वर्षों से लगातार गंगा पार करते समय कई किसानों सहित पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्राम प्रधान बुद्धराम चौहान का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव के मजरा गांव इलाहाबास में जच्चा बच्चा केंद्र तो बना हुआ है, लेकिन वहां कोई सुविधा न होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सहायता नहीं मिल पाती। गंगा पार करने के लिए एक अस्थायी पुल बनाए जाने की मांग सरकार से कई बार की जा चुकी है।
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