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सहकारी और प्राइवेट केंद्रों पर किसानों नहीं मिल रहा यूरिया
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सुनसान पड़ी तारापुर की साधन सहकारी समिति स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। इन दिनों किसानों को यूरिया खाद लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, परंतु क्षेत्र में किसी भी सहकारी और प्राइवेट केंद्र पर यूरिया नहीं है। इस कारण किसानों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
इन दिनों किसानों के खेतों में धान और गन्ने की फसल खड़ी हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इस समय यूरिया खाद के छिड़काव की आवश्यकता है, परंतु एक सप्ताह से हस्तिनापुर क्षेत्र के किसी भी सहकारी या प्राइवेट केंद्र पर किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल रही है। गांव तारापुर निवासी किसान सुंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 एकड़ धान की फसल लगाई हुई है और पिछले एक सप्ताह से खाद की जरूरत है, परंतु क्षेत्र में किसी भी केंद्र पर उन्हें यूरिया खाद नहीं मिला।
समय पर फसलों में यूरिया खाद का छिड़काव न होने से फसलों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होगी। करीब एक महीने पहले भी क्षेत्र में यूरिया खाद का संकट गहराया था, परंतु कुछ दिनों बाद यूरिया का वितरण शुरू हो गया था। इस बार अभी यूरिया का वितरण शुरू नहीं हुआ है, जबकि किसानों के सामने यूरिया के स्थान पर और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। सहकारिता विभाग भले ही हाईटेक होने के दावे करता हो, परंतु हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।
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आज पहुंच जाएगा यूरिया
दो रैक लग चुकी हैं। बृहस्पतिवार तक लगभग सभी सहकारिता केंद्रों पर यूरिया पहुंच जाएगा। -देवेंद्र चौहान, एडीओ, सहकारिता हस्तिनापुर
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इन दिनों किसानों के खेतों में धान और गन्ने की फसल खड़ी हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इस समय यूरिया खाद के छिड़काव की आवश्यकता है, परंतु एक सप्ताह से हस्तिनापुर क्षेत्र के किसी भी सहकारी या प्राइवेट केंद्र पर किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल रही है। गांव तारापुर निवासी किसान सुंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 एकड़ धान की फसल लगाई हुई है और पिछले एक सप्ताह से खाद की जरूरत है, परंतु क्षेत्र में किसी भी केंद्र पर उन्हें यूरिया खाद नहीं मिला।
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समय पर फसलों में यूरिया खाद का छिड़काव न होने से फसलों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होगी। करीब एक महीने पहले भी क्षेत्र में यूरिया खाद का संकट गहराया था, परंतु कुछ दिनों बाद यूरिया का वितरण शुरू हो गया था। इस बार अभी यूरिया का वितरण शुरू नहीं हुआ है, जबकि किसानों के सामने यूरिया के स्थान पर और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। सहकारिता विभाग भले ही हाईटेक होने के दावे करता हो, परंतु हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।
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आज पहुंच जाएगा यूरिया
दो रैक लग चुकी हैं। बृहस्पतिवार तक लगभग सभी सहकारिता केंद्रों पर यूरिया पहुंच जाएगा। -देवेंद्र चौहान, एडीओ, सहकारिता हस्तिनापुर