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नींद से नहीं जागा सिस्टम,सवालों के घेरे में जांच अधिकारी, आखिर कब खुलेगा जमीन में दबे तेल का 'खजाना'

Fri, 15 Nov 2019 12:14 PM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 15 Nov 2019 12:14 PM IST
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Fake Petrol Diesel Case, after 69 days, officers have not disclosed in the case of fake oil
परतापुर में कुंडा स्थित रतिराम खूबचंद तेल डिपो - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में 69 दिन बाद भी संजय कुमार के रतिराम खूबचंद केरोसिन ऑयल डिपो की खुदाई नहीं हो पाई है। आईओसीएल के अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी। सारा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। तेल कंपनी के साथ परतापुर थाने में दर्ज मुकदमे के जांच अधिकारी और पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। 

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आखिर शुरुआती तेजी दिखाने वाला पुलिस-प्रशासन किस दबाव में अब सुस्त नजर आ रहा है? डिपो की निगरानी में अब तक तमाम सरकारी विभागों के द्वितीय श्रेणी के 276 अधिकारी मजिस्ट्रेट तैनात किए जा चुके हैं। जिससे इन विभागों का कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है, सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंच रहा है। 
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मिलावटी तेल के काले कारोबार का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने केरोसिन डिपो की भी जांच कराई थी। इस जांच के दौरान गोपनीय सूत्रों से प्रशासन को पता चला था कि रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो में केरोसिन का अवैध स्टॉक है। जिस पर सात सितंबर को एडीएम सिटी के नेतृत्व में आपूर्ति विभाग की टीम ने इस डिपो की गहनता से जांच की। इस दौरान स्टॉक रजिस्टर में केरोसिन का वितरण पूरी तरह होना पाया गया। जब टैंकर की जांच की तो पता चला कि डिपो के टैंकरों में करीब 72 हजार लीटर केरोसिन का अवैध स्टॉक है। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर उसी दिन इस ऑयल डिपो पर मजिस्ट्रेट के साथ सुरक्षाकर्मी नियुक्त कर दिए गए और सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए। इसके साथ ही आपूर्ति विभाग की तरफ से ऑयल डिपो के मालिक संजय गुप्ता और प्रबंधक के खिलाफ परतापुर थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया था।
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69 दिन में जांच पूरी होना तो दूर टैंकर तक नहीं खुले 
इस मामले को 69 दिन हो चुके हैं। आज तक जांच पूरी होना तो दूर संदिग्ध भूमिगत टैंकरों की खुदाई कर वास्तविकता का पता भी पुलिस प्रशासन नहीं लगा पाया है। प्रशासन की तरफ से एडीएम सिटी जांच कर रहे हैं। उन्होंने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से एक दर्जन बिंदुओं पर जवाब मांगा, लेकिन आज तक सभी बिंदुओं पर न तो आईओसीएल का जवाब आया और न ही आईओसीएल ने इन टैंकरों की खुदाई को अपने तकनीकी विशेषज्ञ को भेजे।

विभागों का कामकाज प्रभावित होने के साथ सरकारी खजाने को भी नुकसान
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुकदमे के जांच अधिकारी पर है। परतापुर थाने के एसएसआई इसकी जांच कर रहे हैं। पहले दबिश के नाम पर पुलिस ने खानापूर्ति की। जिसका लाभ ऑयल डिपो मालिक और प्रबंधक को कोर्ट से मिला और दोनों को अग्रिम जमानत मिल गई। अब जांच अधिकारी भी जांच के नाम पर खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं। क्योंकि अभी तक भी जांच अधिकारी की तरफ से कोई पत्र प्रशासन को इस तरह का नहीं भेजा गया, जिसमें मजिस्ट्रेट नियुक्त कर भूमिगत टैंकरों की खुदाई कराने की मांग की गई हो। 

- रोजाना चार अधिकारी 
रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो पर रोजाना चार मजिस्ट्रेट नियुक्त होते हैं। इनकी ड्यूटी 12-12 घंटे की होती है। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक और रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक दो-दो मजिस्ट्रेट तैनात रहते हैं। हिसाब लगाएं तो अब 276 अधिकारी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हो चुके हैं। 

- इन विभागों के अधिकारी बनाए जा रहे मजिस्ट्रेट 
एमडीए, पीडब्ल्यूडी, आरईएस, आवास एवं विकास परिषद, वाणिज्यकर, गन्ना विभाग, बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, लेखा विभाग, जल निगम, सिंचाई विभाग, विकास विभाग।

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सरकारी काम प्रभावित, उठ रहे सवाल 
इन मजिस्ट्रेटों की नियुक्त से तय है कि सरकारी काम प्रभावित हो रहा है। यदि एक अधिकारी के एक दिन के वेतन का औसत लगाएं तो जो मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये हैं, उनका वेतन करीब 5.50 लाख रुपये बैठता है। जो सरकारी काम में अड़चन के साथ सरकारी कोष को भी सीधे नुकसान पहुंच रहा है। सीसीटीवी कैमरों का किराया भी हर दिन अलग से बढ़ रहा है। वहीं, इस मामले में जिस तरह पुलिस प्रशासन अब ढुलमुल रवैया अपना रहा है। उसे लेकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। छापे के बाद से ही चर्चा थी कि तेल कारोबार से जुड़े लोगों की स्थानीय पुलिस प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक गहरी पैठ है। अब जिस तरह कार्रवाई चल रही है, उससे लोगों के बीच शुरू में उठी चर्चाओं को लगातार बल मिल रहा है। 

आईओसीएल को लिखी चिट्ठी
रतिराम खूबचंद फर्म स्थित टैंकरों की खुदाई करने के लिए पुलिस ने कई बार संबंधित विभाग को पत्र भेजे हैं। तीन टैंकरों में केरोसिन की जांच आपूर्त्ति विभाग कर चुका, चौथे टैंकर की जांच के लिए आईओसीएल को पत्र लिखा है। - डॉ. एएन सिंह, एसपी सिटी

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