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तैराकी के अवैध कारोबार में 12 लाख लीटर पानी बर्बाद

Wed, 12 Apr 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 12 Apr 2017 01:49 AM IST
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fake business of swimming pool, 12 lakh leter water waste
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर में जगह-जगह स्वीमिंग पूल खुल गए हैं। ना कोई नियम, ना कोई कानून। बस धंधे की तरह गलियों में स्वीमिंग पूल शुरू कर दिए हैं। पूल संचालकों के पास न तो कोई एनओसी है और न ही प्रशिक्षित कोच। नियमों को दरकिनार कर खोले गये इन स्वीमिंग पूल में रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है। ऐसे में लगातार भूजल दोहन से भूगर्भ जल स्तर गिर रहा है। लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। निगम अधिकारियों को तो ये तक नहीं पता कि पूल खोलने के लिए कोई नियम भी होता है। एमडीए वीसी का कहना है कि बिना एनओसी स्वीमिंग पूल पूरी तरह अवैध हैं, इनको तुड़वाया जाएगा।
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शहर में गंगानगर, मवाना रोड़, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, माधवपुरम सैक्टर तीन-चार, खत्ता रोड, शास्त्रीनगर, बाईपास के कुछ फार्म हाउस आदि में इस समय दो दर्जन से ज्यादा स्वीमिंग पूल चल रहे हैं। एक भी नियमानुसार नहीं है। इनमें एक दर्जन तो ऐसे हैं जो प्लाट की चारदीवारी कर तैयार कर दिए गए हैं। माधवपुरम में एक घर के अंदर स्वीमिंग पूल बनाया गया है। सबमर्सिबल से पूल में सुबह पानी भरा जाता है और रात को यह पानी पंप से नालों में बहा दिया जाता है। एक स्वीमिंग पूल में औसतन 50 हजार लीटर पानी भरा जाता है। ऐसे में साफ है कि प्रतिदिन करीब 12 लाख लीटर पानी स्वीमिंग पूल संचालक बर्बाद कर रहे हैं। 
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कमाई मोटी  
पूल संचालक 40 से 50 रुपये प्रति घंटे की दर से पूल में स्वीमिंग कराते हैं। मासिक सदस्य बनना है तो 1500 रुपय से 2500 रुपये मासिक शुल्क है। स्वीमिंग पूल पर पार्टियां भी आयोजित होती हैं। जिनका मोटा चार्ज अलग से लिया जाता है। बीयर पार्टी के लिए भी व्यवस्था की जाती है। कुल मिलाकर एक पूल से लाखों की इनकम की जा रही है।
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कोई मानक नहीं पूल संचालन का 
इन स्वीमिंग पूल में जरूरी मानकों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। यदि इनमें कोई बच्चा गिर जाये तो अनहोनी भी हो सकती है। करीब चार साल पहले लिसाड़ी क्षेत्र में ऐसे ही एक स्वीमिंग पूल में बच्चे की डूबने से मौत हो गयी थी। इसके साथ ही पूल की सफाई के मानकों पर कोई ध्यान नहीं है। पानी में क्लोरीन डालाना तो दूर इसे रिसाइकिल भी नहीं किया जाता। वहीं एक भी स्वीमिंग पूल ऐसा नहीं है जहां प्रशिक्षित तैराक को कोच या सेफ्टी गार्ड के रूप में रखा गया हो। 

अंधाधुंध जल दोहन, नहीं किसी की नजर 
भूगर्भ जल दोहन में नियमावाली स्पष्ट है। इसके लिए प्रदूषण, भूगर्भ जल विभाग के साथ ही नगर निगम से एनओसी लेनी होती है। जल दोहन करने वाले को उतना ही जल भूगर्भ में रिचार्ज करना होता है। इसके लिए वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट आदि लगाना होता है। लेकिन किसी भी स्वीमिंग पूल संचालक ने ऐसा कोई सिस्टम अपने यहां नहीं लगाया है। जबकि नियमानुसार पूल में भरे पानी को रिसाइकिल कर दोबारा प्रयोग करना चाहिए। लेकिन ये लोग अंधाधुंध जल दोहन कर रोजाना पूल के पानी को नालों में बहा रहे हैं। 


स्वास्थ्य के लिए हानिकारक 
शहर के प्रसिद्ध डाक्टर विश्वजीत बैंबी का कहना है कि ऐसे मानकविहीन स्वीमिंग पूल में नहाना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसमें नहाने से त्वचा रोग के साथ ही पेट की तमाम बीमारियां हो सकती हैं। क्योंकि पूल में उतरने से पहले व्यक्ति को बाहर अच्छी तरह नहाना जरूरी है। इसके साथ ही अंडरवियर भी धुला हुआ होना चाहिए। लेकिन ऐसे किसी भी मानकों का पालन यहां नहीं हो रहा है। इससे संक्रामक के साथ ही अन्य बीमारी होने का पूरा खतरा रहता है। 


 
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