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रिकार्ड में बंद फैक्टरी मौके पर चालू मिली
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खरखौदा। कई वर्षों से गांव अल्लीपुर में किराए की जमीन लेकर मीट का कारोबार कर रहे म्यांमार निवासी व्यापारी बिना अनुमति के चीन तक मीट निर्यात करता रहा है। उसने बाद में पीपलीखेड़ा के जंगल में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि खरीदकर कारोबार शुरू किया। सूबे में सरकार बदलते ही हिंदू संगठनों के विरोध के चलते पुलिस, प्रशासन व पशुपालन विभाग ने इस फर्म को 2014 से बंद दिखाया था। हालांकि शनिवार को एमडीए टीम वहां पहुंची तो वहां मीट का कारोबार धड़ल्लेे से चलता मिला। अब एमडीए ने इसे सील किया है।
म्यांमार से वांछित चल रहे एक व्यापारी ने करीब 15 वर्ष पहले अल्लीपुर मोड़ पर जमीन किराए पर लेकर कारोबार शुरू किया था। पहले कोको टोक नाम चल रही इस मीट फैक्टरी में पशुओं के अवशेषों को साफ कर चीन समेत कई अन्य देशों को निर्यात किया जाता था। करोड़ों के मुनाफे के चलते इस व्यापारी ने दो वर्ष पहले किराए की जमीन में चल रहे प्लांट को बंदकर गांव पीपलीखेड़ा में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि खरीदकर नई फैक्टरी तैयार की। एमडीए, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति के बिना ही यहां से मीट विदेश भेज रहा था। जब इस फैक्टरी का निर्माण किया गया तो एमडीए अधिकारियों ने वहां जाना उचित नहीं समझा था। प्रदेश की सरकार बदली तो अल्लीपुर समेत पीपलीखेड़ा के जंगल में अवैध रूप से चल रही कई फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हिंदू संगठनों ने भी मीट के अवैध कारोबार का विरोध किया तो प्रशासन की नींद टूटी थी। पुलिस, प्रशासन व पशुपालन विभाग ने 2014 से फैक्टरी को फाइलों में बंद दिखा रखा था। जब विरोध हुआ तो एमडीए की टीम को पिछले वर्ष जांच के लिए भेजा गया। हालांकि फैक्टरी पर सील भी लगी बताई थी। एमडीए टीम शनिवार को फिर से अवैध फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निकली। वह कोको टोक फैक्टरी पर पहुंची तो इसका नाम बदलकर केकेटी मिला। सूत्रों के अनुसार फैक्टरी चालू मिली।
फाइलों में कई बार सील हो चुकी फैक्टरी
पिछले वर्ष व्यापार संघ व हिंदू संगठनों ने इस मीट फैक्टरी का विरोध किया था तो जिलाधिकारी ने एमडीए टीम जांच के लिए भेजी थी। जिसमें एमडीए ने उस पर सील लगाना बताया था। वहीं, पशुपालन विभाग ने भी कंपनी को बंद बताया था।
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जिन मीट फैक्टरियों में पशुओं का कटान होता है उन्हीं में पशु चिकित्सक तैनात किया जाता है। जिस फैक्टरी में अवशेषों का प्रयोग किया जाता है। वहां का क्षेत्रीय चिकित्सक उनमें जाकर जांचकर सकता है। पशुपालन विभाग के रिकार्ड में फर्म बंद है। -एके सिंह, सीवीओ मेरठ
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म्यांमार से वांछित चल रहे एक व्यापारी ने करीब 15 वर्ष पहले अल्लीपुर मोड़ पर जमीन किराए पर लेकर कारोबार शुरू किया था। पहले कोको टोक नाम चल रही इस मीट फैक्टरी में पशुओं के अवशेषों को साफ कर चीन समेत कई अन्य देशों को निर्यात किया जाता था। करोड़ों के मुनाफे के चलते इस व्यापारी ने दो वर्ष पहले किराए की जमीन में चल रहे प्लांट को बंदकर गांव पीपलीखेड़ा में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि खरीदकर नई फैक्टरी तैयार की। एमडीए, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति के बिना ही यहां से मीट विदेश भेज रहा था। जब इस फैक्टरी का निर्माण किया गया तो एमडीए अधिकारियों ने वहां जाना उचित नहीं समझा था। प्रदेश की सरकार बदली तो अल्लीपुर समेत पीपलीखेड़ा के जंगल में अवैध रूप से चल रही कई फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हिंदू संगठनों ने भी मीट के अवैध कारोबार का विरोध किया तो प्रशासन की नींद टूटी थी। पुलिस, प्रशासन व पशुपालन विभाग ने 2014 से फैक्टरी को फाइलों में बंद दिखा रखा था। जब विरोध हुआ तो एमडीए की टीम को पिछले वर्ष जांच के लिए भेजा गया। हालांकि फैक्टरी पर सील भी लगी बताई थी। एमडीए टीम शनिवार को फिर से अवैध फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निकली। वह कोको टोक फैक्टरी पर पहुंची तो इसका नाम बदलकर केकेटी मिला। सूत्रों के अनुसार फैक्टरी चालू मिली।
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फाइलों में कई बार सील हो चुकी फैक्टरी
पिछले वर्ष व्यापार संघ व हिंदू संगठनों ने इस मीट फैक्टरी का विरोध किया था तो जिलाधिकारी ने एमडीए टीम जांच के लिए भेजी थी। जिसमें एमडीए ने उस पर सील लगाना बताया था। वहीं, पशुपालन विभाग ने भी कंपनी को बंद बताया था।
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जिन मीट फैक्टरियों में पशुओं का कटान होता है उन्हीं में पशु चिकित्सक तैनात किया जाता है। जिस फैक्टरी में अवशेषों का प्रयोग किया जाता है। वहां का क्षेत्रीय चिकित्सक उनमें जाकर जांचकर सकता है। पशुपालन विभाग के रिकार्ड में फर्म बंद है। -एके सिंह, सीवीओ मेरठ