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Exclusive: सीएम के दखल के बाद शुरू होगा मध्य गंगा नहर का काम, 12 साल से रुकी थी परियोजना

Thu, 26 Nov 2020 04:35 PM IST
Dimple Sirohi अजीत चौधरी, अमर उजाला, बिजनौर
अजीत चौधरी, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 26 Nov 2020 04:35 PM IST
सार


4400 करोड़ की मध्य गंगा नहर परियोजना 2008 में हुई थी शुरू
2016  में वन विभाग के पक्ष में आ चुका है कोर्ट का फैसला
जमीन अधिग्रहण के समय भू-अभिलेखों में किसानों के नाम पर थी जमीन
नक्शे में वन विभाग के नाम पर थी जमीन 

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Exclusive: work of the Central Ganga Canal will start in bijnor after intervention of CM yogi, project was stopped for years
गंगा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद 12 साल से अधर में लटकी मध्य गंगा नहर परियोजना के पूरा होने की आस जगी है। सिंचाई विभाग और वन विभाग के बीच एक हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद था, जिसकी वजह से 150 मीटर लंबाई में नहर का निर्माण रुका हुआ था। सिंचाई विभाग ने जमीन के लिए वन विभाग को प्रस्ताव भी भेज दिया है। शासन के निर्णय के बाद जमीन सिंचाई विभाग को दी जा सकती है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडल स्तर पर रुके हुए बड़े निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। तब मध्य गंगा परियोजना द्वितीय चरण का मामला उनकी जानकारी में आया था। मुख्यमंत्री ने इसे जल्दी पूरा कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से वन विभाग और सिंचाई विभाग जमीन के मालिकाना हक के लिए सजग हो गए थे।
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सिंचाई विभाग के एक्सईएन पीपी गौतम ने इस संबंध में डीएफओ डा.एम सेम्मारन को पत्र लिखकर जमीन सिंचाई विभाग को स्थानांतरित करने को कहा है। अब शासन स्तर पर यह मामला सुलझाया जाएगा। 4400 करोड़ की इस नहर परियोजना के शुरू होने से बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, बदायूं की फसलों की सिंचाई होगी।
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यह है पूरा विवाद
 इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर वन विभाग और गांव वालों के बीच सालों से विवाद चल रहा है और नहर का विवाद 2016 में वन विभाग के हक में फैसला होने से पुराना है। जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दो दस्तावेज होते हैं। गजट और नक्शा। सिंचाई विभाग के अफसरों के अनुसार वन विभाग के दोनों दस्तावेज राज्यपाल से अनुमोदित होते हैं।

गजट में रामपुर ठकरा की 254 बीघा जमीन में से 5.2 हेक्टेअर जमीन किसानों के नाम दर्ज थी। जबकि मानचित्र में पूरी जमीन को वन विभाग की ही दर्शाया गया था। वन विभाग के गजट के अनुसार जमीन का सीमांकन नहीं किया गया था। सिंचाई विभाग ने जमीन को किसानों की मानते हुए उसे खरीद किसानों से खरीदा। तब जमीन पर कब्जा भी किसानों का ही था।

बाद में डीएम के निर्देश पर हुई जांच में सही हुए मानचित्र से पता चला कि जमीन वन विभाग के नाम ही है।  वन विभाग की एक हेक्टेअर जमीन पर नहर बन चुकी थी। नहर की जितनी विवादित टुकड़ा वह 44 किलोमीटर लंबी नहर में मात्र 150 मीटर है।

बन रही पक्की नहर
परियोजना में बनने वाली मुख्य नहर 44 किलोमीटर लंबी है। यह नहर पूरी तरह पक्की बनाई गई है। जिले में पानी की कोई कमी नहीं है। इसलिए एक एक बूंद पानी दूसरे जिलों में पहुंचाने के लिए नहर पक्की बनी है। अमरोहा, बदायूं में कहीं कहीं भूगर्भ जल का स्तर 200 फीट तक पहुंच गया है। भूगर्भ को रिचार्ज करने व फसलों की सिंचाई के लिए यह नहर बनाई गई है।

जल्दी मंजूर होने की उम्मीद
सिंचाई विभाग के जेई कविराज सिंह का कहना है कि वन विभाग को मध्य गंगा नहर परियोजना से जुड़ी जमीन को स्थानांतरित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्दी ही इसके मंजूर होने की उम्मीद है।

अफसरों को कराया अवगत
डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि पूरे मामले से आला अफसरों को अवगत करा दिया गया है। अफसरों के निर्देश पर ही आगे का काम किया जाएगा।

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