Exclusive: प्रशासन के लिए मुसीबत बने पैरोल पर छोड़े गए बंदी, नहीं लौटे वापस, अन्य राज्यों में कर रहे काम
- अहमदाबाद, जयपुर में काम कर रहे पैरोल पर छोड़े गए बंदी
- कोरोना काल में गए 45 में से 14 बंदी अब तक वापस नहीं आए
विस्तार
जेल में न लौटने वाले कुछ बंदी तो अब अपने घरों पर ही नहीं मिले हैं। वे अहमदाबाद, जयपुर और मुंबई जैसे शहरों में काम कर रहे हैं। कोई वुडकार्विंग का काम कर रहा है तो कोई कपड़े की दुकान पर नौकरी करके परिवार के लिए पैसा जुटा रहा है। इन बंदियों के परिजनों ने यह जानकारी दी तो टीमें हैरान रह गईं। बाहर काम करने वाले ये बंदी इसी जिले के गंगोह और अन्य क्षेत्रों के रहने वाले हैं।
अब ऐसे बंदियों के परिवारों को चेतावनी दी गई है कि वे जल्द ही उन्हें बुलवाकर जिला कारागार भिजवाएं, अन्यथा उनकी वहीं से गिरफ्तारी की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें बाहर रहने की अवधि तक की सजा अतिरिक्त भुगतनी होगी।
कोरोना काल में जिला जेल से सात साल तक की सजा वाले 45 बंदियों को पैरोल पर भेजा गया था। पहले आठ सप्ताह का समय था। बाद में इसे बढ़ाया जाता रहा। अब पैरोल की अवधि पूरी होने पर बंदी लौटना तो शुरू हो गए, लेकिन इनमें से 14 बंदी अब भी नहीं लौटे हैं।
लौटने में देरी करेंगे तो अतिरिक्त सजा भुगतेंगे: शर्मा
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि पैरोल पर गए अधिकतर बंदी तो लौट आए हैं, लेकिन जो नहीं लौटे हैं और बाहर काम कर रहे हैं। उनकी तलाश जारी है। वे जेल आने में जितनी देर करेंगे, उन्हें उतनी ही अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
डकैती, चोरी, मारपीट सहित अन्य मामलों में हुई है सजा
अब तक जेल में नहीं लौटने वाले बंदियों में अधिकतर डकैती, चोरी और मारपीट सहित अन्य मामलों में सात साल तक की सजा वाले हैं। इनमें 10 बंदी तो सहारनपुर जिले के ही हैैं। बाकी बंदी हरदोई, फैजाबाद, आजमगढ़ और शामली के रहने वाले हैं। ये बंदी सात साल तक की सजा वाले हैं।
सात बंदियों को उपलब्ध कराए वकील, तीन को दिलवाए जमानती
अनलॉक पीरियड के बाद अब तक सात बंदियों को निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करवाए गए, जबकि तीन बंदियों को जमानतदार उपलब्ध करवाए गए। इसमें विधिक सेवा प्राधिकरण का सहयोग लिया गया। फिलहाल कोई ऐसा बंदी नहीं है जिसे जमानती न मिलने की परेशानी हो।
इन बंदियों के लिए तेज हुआ तलाशी अभियान
- नीरज, गांव खैरसाल, थाना गंगोह सहारनपुर
- सुखबीर, गांव पुवांरका, थाना कोतवाली देहात, सहारनपुर
- इकराम, झिंझाना, थाना झिंझाना, शामली
- अफजाल, कुरैशियान, थाना गंगोह, सहारनपुर
- राजवीर, नगला जोडियो, थाना मिर्जापुर, सहारनपुर
- यशपाल, उमरी खुर्द, रामपुर मनिहारान, सहारनपुर
- शावेज, खान आलमपुरा, थाना जनकपुरी, सहारनपुर
- उस्मान, कोतवाली नगर, सहारनपुर
- अजय कुमार, शाहपुर सोरेन, अधरौली, आजमगढ़
- अफजाल, दुमझेड़ी, थाना चिलकाना, सहारनपुर
- इरफान, खिड़का भटकवा, थाना बेहट, सहारनपुर
- विकास, नया पुरवा, थाना मवई चौराहा, फैजाबाद
- विकास कुमार, गांव कुड़वा, थाना सलीमा चौराहा, हरदोई
- संतोष, जनक नगर, थाना जनकपुरी, सहारनपुर
मेरठ जिला कारागार से पैरोल पर छोड़े 48 में से 10 कैदी अभी नहीं लौटे
मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में से अप्रैल में पैरोल पर छोड़े गए 48 कैदियों में से 38 कैदी ही जिला जेल लौटे हैं। 10 कैदी नहीं लौटे हैं। इनकी पैरोल अवधि पूर्व में ही खत्म हो चुकी है।
मेरठ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक बीडी पांडे का कहना है कि 319 बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इन बंदियों के मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। विचाराधीन बंदियों में उन्हें छोड़ा गया है, जिनके मामलों की केस में सजा की अवधि सात साल से कम है।
जेल अधीक्षक का कहना है इनमें अधिकांश कैदी और बंदी स्थानीय हैं। जिन कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया, शासन द्वारा गठित कमेटी ने उनका आठ सप्ताह का समय और बढ़ाया गया था।
पैरोल का समय पूरा होने के बाद इन कैदियों को वापस जिला आना होता है।
48 कैदियों में से 38 कैदी जिला जेल लौट आए हैं, जो 10 बचे हैं उनकी प्रक्रिया चल रही है। इनमें 8 मेरठ के और दो दूसरे जिलों के रहने वाले हैं। 250 विचाराधीन बंदी हैं उनकी जमानत की प्रक्रिया भी चल रही है।