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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Exclusive: Exclusive: Sugar Supply trapped in farmers movement in Bijnor, prices reduced by 100 rupees quintal

Exclusive: किसानों के आंदोलन में फंसी चीनी की आपूर्ति, सौ रुपये क्विंटल तक घट गए दाम

Fri, 18 Dec 2020 05:53 PM IST
Dimple Sirohi अजीत चौधरी, अमर उजाला, बिजनौर
अजीत चौधरी, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 18 Dec 2020 05:53 PM IST
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Exclusive: Exclusive: Sugar Supply trapped in farmers movement in Bijnor, prices reduced by 100 rupees quintal
चीनी - फोटो : अमर उजाला
एमएसपी की मांग और कृषि कानूनों के विरोध में यूपी की सीमा पर चल रहे धरने का असर खुद किसानों पर भी पड़ रहा है। किसानों के आंदोलन की वजह से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से पंजाब, दिल्ली व हरियाणा को जाने वाली चीनी नहीं उठ रही है। चीनी नहीं उठने से मिलों को पैसे नहीं मिल रहे और इससे किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान रुक रहा है। माल का उठान कम होने से चीनी के दाम भी 100 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं।
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यूपी व दिल्ली को जोड़ने वाली सीमा पर किसानों ने 20 दिन से जाम लगा रखा है, जिसमें जिले के किसान भी शामिल हैं। किसानों की सरकार से मांग है कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिकने की गारंटी मिले और कानून बनाया जाए। किसान कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग पर भी अड़े हुए हैं। जिले की चीनी मिलों का सबसे बड़ा बाजार दिल्ली, पंजाब व हरियाणा है।
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इन राज्यों को जाने वाले रास्तों में किसान सड़क पर वाहन खड़े करके धरना देकर बैठे हैं। जिसके कारण मिलों की चीनी इन तीनों राज्यों को नहीं जा पा रही है। इससे हर रोज करीब दस हजार क्विंटल चीनी कम उठ रही है। जिसकी कीमत सवा तीन करोड़ रुपये बैठती है। मिलों को किसानों का भुगतान चीनी बेचकर ही करना है। चीनी जितनी कम बिकेगी या कम कीमत पर बिकेगी किसानों को भी भुगतान उतना ही देर से मिलेगा।
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3200 रुपये क्विंटल रह गए चीनी के दाम
किसानों के आंदोलन से पहले चीनी के दाम 3300 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे थे। दामों में तेजी आने से चीनी मिल के अफसरों को भी राहत मिली थी। लेकिन अब उठान कम होने से चीनी के दाम भी गिर गए हैं। लेकिन अब चीनी के दाम 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गए हैं।

चीनी का उठान कम होने से मिल अफसर परेशान हैं। गोदाम लगातार चीनी से भर रहे हैं और उठान कम हो गया है। पिछले साल की भी चीनी बची हुई है। इससे मिलों के गोदामों में चीनी रखने के लिए भी जगह कम पड़ती जा रही है। यही हालात रहे तो मिलों के सामने चीनी रखने की भी दिक्कत हो जाएगी।

जाम की वजह से नहीं जा रही चीनी
बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार मिल से औसतन रोज पांच हजार क्विंटल चीनी बेची जाती है। किसान आंदोलन के कारण इसमें तीन हजार क्विंटल चीनी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जाती है। इन राज्यों में चीनी नहीं जा पा रही है।

आंदोलन से 40 प्रतिशत उठान प्रभावित
बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने बताया कि किसान आंदोलन में रास्ते बंद होने के करण चीनी का उठान 40 प्रतिशत तक प्रभावित है। चीनी की बिक्री न होने से मिलों के सामने वित्तीय  परेशानी आ रही हैं।

चीनी का गोदाम भरने को तैयार
धामपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप शर्मा का कहना है कि मिल में चीनी रखने की जगह खत्म होती जा रही है। चीनी का उठान बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, बरकातपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक विश्वासराज सिंह के अनुसार रास्ते बंद होने की वजह से चीनी का उठान बहुत प्रभावित हुआ है। चीनी के दाम भी कम चल रहे हैं।
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