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60 लाख खर्च करने के बाद भी पेयजल मयस्सर नहीं
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60 लाख खर्च करने के बाद भी पेयजल मयस्सर नहीं
खरखौदा। क्षेत्र का भूजल दूषित हो रहा है। इसके चलते गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए टंकियों का निर्माण कराया गया है। गांव उलधन में एक वर्ष पहले टंकी बनाई गई थी। वहीं, ठेकेदार द्वारा घटिया क्वालिटी की पाइप लाइन बिछाने से ट्यूबवेल चालू होते ही पाइप फट गए। इस वजह से एक वर्ष से पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है।
हापुड़ रोड पर बनी मीट फैक्टरियों द्वारा प्रदूषण फैलाने एवं धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने से कई बड़ी फैक्टरियों ने गंदेे पानी को रिबोर करके भूमि में उतार दिया है। वहीं, पास में बह रही काली नदी में दूषित पानी आने से हापुड़ से मेरठ के बीच के अधिकतर गांवों का भूजल दूषित हो रहा है। जिससे कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से लोगों की जान जा रही है। हापुड़ से मेरठ के बीच में कई गांवों में भूजल दूषित होने के कारण लोगों की मांग पर जल निगम द्वारा पानी की टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। गांव उलधन में एक वर्ष पहले पानी की टंकी का निर्माण किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा गांव के काफी हिस्सों में पाइप लाइन बिछा दी गई। बजट कम होने के कारण पूरे गांव में लाइन नहीं बिछ पाई। जिस हिस्से में पाइप लाइन बिछाई गई वह भी घटिया स्तर की थी। टंकी से पानी छोड़ा गया तो पाइप लाइन जगह-जगह से फट गई। इससे गांव के जिस हिस्से में पाइप लाइन बिछी भी थी तो वह भी चालू नहीं हो पाई। इससे ग्रामीण हैंडपंपों का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। गांव उलधन एवं उसके मजरा मढ़ैया दोनों गांवों की आबादी करीब 10 हजार है। यहां 60 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद सभी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पेयजल से गांव में बीमारियां फैल रही हैं।
जितना पैसा मिला था उससे टंकी के निर्माण समेत गांव के काफी हिस्से में पाइप लाइन बिछ गई है। कई जगह पर पाइप लाइन फट गई थी। जिसे ठेकेदार दोबारा से बिछाएगा।
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-इकबाल अहमद, ग्राम प्रधान उलधन
गांव में पाइप लाइन फटी है। इसकी जल्द ही जांच कराई जाएगी। वहीं, जल्द ही गांव के दूसरे हिस्से में पाइप लाइन बिछाकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
-एमपी सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम।
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खरखौदा। क्षेत्र का भूजल दूषित हो रहा है। इसके चलते गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए टंकियों का निर्माण कराया गया है। गांव उलधन में एक वर्ष पहले टंकी बनाई गई थी। वहीं, ठेकेदार द्वारा घटिया क्वालिटी की पाइप लाइन बिछाने से ट्यूबवेल चालू होते ही पाइप फट गए। इस वजह से एक वर्ष से पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है।
हापुड़ रोड पर बनी मीट फैक्टरियों द्वारा प्रदूषण फैलाने एवं धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने से कई बड़ी फैक्टरियों ने गंदेे पानी को रिबोर करके भूमि में उतार दिया है। वहीं, पास में बह रही काली नदी में दूषित पानी आने से हापुड़ से मेरठ के बीच के अधिकतर गांवों का भूजल दूषित हो रहा है। जिससे कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से लोगों की जान जा रही है। हापुड़ से मेरठ के बीच में कई गांवों में भूजल दूषित होने के कारण लोगों की मांग पर जल निगम द्वारा पानी की टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। गांव उलधन में एक वर्ष पहले पानी की टंकी का निर्माण किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा गांव के काफी हिस्सों में पाइप लाइन बिछा दी गई। बजट कम होने के कारण पूरे गांव में लाइन नहीं बिछ पाई। जिस हिस्से में पाइप लाइन बिछाई गई वह भी घटिया स्तर की थी। टंकी से पानी छोड़ा गया तो पाइप लाइन जगह-जगह से फट गई। इससे गांव के जिस हिस्से में पाइप लाइन बिछी भी थी तो वह भी चालू नहीं हो पाई। इससे ग्रामीण हैंडपंपों का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। गांव उलधन एवं उसके मजरा मढ़ैया दोनों गांवों की आबादी करीब 10 हजार है। यहां 60 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद सभी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पेयजल से गांव में बीमारियां फैल रही हैं।
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जितना पैसा मिला था उससे टंकी के निर्माण समेत गांव के काफी हिस्से में पाइप लाइन बिछ गई है। कई जगह पर पाइप लाइन फट गई थी। जिसे ठेकेदार दोबारा से बिछाएगा।
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-इकबाल अहमद, ग्राम प्रधान उलधन
गांव में पाइप लाइन फटी है। इसकी जल्द ही जांच कराई जाएगी। वहीं, जल्द ही गांव के दूसरे हिस्से में पाइप लाइन बिछाकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
-एमपी सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम।