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National Epilepsy Day 2023: अंधविश्वास से नहीं, इलाज से ठीक होगी मिर्गी, पढ़िए डॉक्टर क्या बोले...

Fri, 17 Nov 2023 01:43 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 17 Nov 2023 01:43 PM IST
सार

National Epilepsy Day 2023 : मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कमलेंद्र किशोर ने बताया कि किसी भी इंसान को झटके आने को हल्के में न लें, क्योंकि बार-बार झटका आने से बीमारी गंभीर हो सकती है।

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Epilepsy can be cured by treatment, not by superstition.
मिर्गी - फोटो : free pick

विस्तार

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (मस्तिष्क संबंधी विकार) है, जो अत्यधिक नशीले पदार्थों के सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने, ब्रेन ट्यूमर और मानसिक सदमे से भी हो सकता है। मरीज को झटके आने पर उसे जूता, मोजा सुंघाने से बचें, इससे और नुकसान होता है। इसका इलाज संभव है। मेडिकल साइंस में इसकी दवाएं मौजूद हैं। समय रहते अगर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। लिहाजा अंधविश्वास से दूर रहें और इलाज कराएं।

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इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। मेरठ में पीएल शर्मा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में हर माह इस बीमारी के 60 से 70 मरीज आते हैं। डॉक्टर बीमारी से बचाव के लिए न सिर्फ इलाज कर रहे हैं, बल्कि काउंसिलिंग कर उनको जागरूक भी कर रहे हैं। अंधविश्वास से दूर रहने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।

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झटके को हल्के में न लें
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कमलेंद्र किशोर ने बताया कि किसी भी इंसान को झटके आने को हल्के में न लें, क्योंकि बार-बार झटका आने से बीमारी गंभीर हो सकती है। झटके आने के बाद बेहोश हो जाना, मुंह से झाग आने लगना ये मिर्गी के लक्षण हैं। जागरूकता का ही असर है कि लोग अब नीम हकीमों और अंधविश्वास को छोड़ अस्पताल पहुंचने लगे हैं। मिर्गी के लक्षण पाए जाने के बाद इसका तुरंत इलाज शुरू करा देना चाहिए। बार-बार झटके आने से बीमारी गंभीर हो जाएगी।

क्या है मिर्गी
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तरुण पाल ने बताया कि मिर्गी में रोगी को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। दौरे के समय मरीज का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और वो लड़खड़ा कर गिर जाता है। बेहोश हो जाता है और करीब 4-5 मिनट तक बेहोश रहता है। इसमें शरीर अकड़ जाता है। ऐसे मरीजों को बाइक चलाने, कुएं, नदी, नहर और आग के पास जाने से बचाना चाहिए।

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दौरा पांच मिनट से ज्यादा हो तो मरीज को ले जाएं अस्पताल
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि राणा ने बताया कि 90 फीसदी दौरे दो मिनट के होते हैं। दौरा पांच मिनट से ज्यादा का है तो नाक के जरिये दवा दी जाती है। मुंह के जरिए कुछ भी नहीं देना चाहिए। पांच मिनट से ज्यादा के दौरे की स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। मिर्गी का रोगी महज आधे घंटे में ठीक हो जाता है। इन रोगियों को नौकरी से निकालना या समाज में भेदभाव करना गलत है। सबसे आम प्रकार की मिर्गी कम उम्र में होती है और इसके कारण आनुवांशिक हैं। दूसरे प्रकार की मिर्गी अचानक होती है।

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मिर्गी आने पर यह करें
मिर्गी आने पर मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें या उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें, ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाएं। मरीज के पास से फर्नीचर, तेज, नुकीली, चुभने वाली या धारदार वस्तुएं हटा दें।

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