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Meerut News: पर्यावरण निगरानी सेल ने किया कूड़ा प्लांट और ट्रांसफर स्टेशनों का मुआयना
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मेरठ। पर्यावरण निगरानी सेल (एनवॉयरमेंट मॉनीटरिंग सेल) ने दूसरे दिन शुक्रवार को भी महानगर में नगर निगम की टीम के साथ मुआयना किया है। टीम ने जांच की कि कूड़ा प्रबंधन, भूगर्भ और जहरीली हवा पर शिकंजा कसने के लिए क्या इंतजाम हैं। निगम के अधिकारियों ने कूड़ा प्लांट के साथ एमआरएफ सेंटर और ट्रांसफर स्टेशन का भी निरीक्षण किया। मॉनीटरिंग सेल ने कूड़ा प्रबंधन पर नाराजगी जताई तो कई सुझाव भी दिए।
एनएमयू प्रभारी अखिलेश गौतम और उनकी टीम के सदस्य दीक्षा चौहान, रूपम कुमार ने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह, एसबीएम टीम को लेकर शुक्रवार को लोहियानगर कूड़ा प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट में खराबी होने के कारण वह बंद मिला। इसके बाद टीम ने अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नौचंदी ग्राउंड में बने कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन और एमआरएफ सेंटर का मुआयना किया। जहां पर कूड़े का प्रबंधन करने में नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च करता है। वर्ष 2021 में ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए पांच स्थानों पर कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण किया था। जिसमें दो अभी अधर में लटके हैं।
महानगर में 1.66 करोड़ की लागत से 11 जगह पर एमआरएफ सेंटर के निर्माण स्वीकृत हुए थे। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण एमआरएफ की मशीन नहीं खरीदी। खानापूर्ति के लिए सिर्फ एक ही व्यक्ति को देकर सिर्फ 4 एमआरएफ सेंटर का संचालन कराया जा रहा है। नगर निगम ने एनएमयू को वह ट्रांसफर स्टेशन और एमआरएफ सेंटर दिखाए हैं, जहां पर कूड़ा प्रबंधन संबंधित काम चल रहा है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते एक्यूआई, भूगर्भ और वायु दूषित की समस्या देखते हुए मेरठ में एनएमयू ने दो दिन निरीक्षण किया है। एनएमयू अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करेंगे।
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एनएमयू प्रभारी अखिलेश गौतम और उनकी टीम के सदस्य दीक्षा चौहान, रूपम कुमार ने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह, एसबीएम टीम को लेकर शुक्रवार को लोहियानगर कूड़ा प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट में खराबी होने के कारण वह बंद मिला। इसके बाद टीम ने अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नौचंदी ग्राउंड में बने कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन और एमआरएफ सेंटर का मुआयना किया। जहां पर कूड़े का प्रबंधन करने में नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च करता है। वर्ष 2021 में ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए पांच स्थानों पर कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण किया था। जिसमें दो अभी अधर में लटके हैं।
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महानगर में 1.66 करोड़ की लागत से 11 जगह पर एमआरएफ सेंटर के निर्माण स्वीकृत हुए थे। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण एमआरएफ की मशीन नहीं खरीदी। खानापूर्ति के लिए सिर्फ एक ही व्यक्ति को देकर सिर्फ 4 एमआरएफ सेंटर का संचालन कराया जा रहा है। नगर निगम ने एनएमयू को वह ट्रांसफर स्टेशन और एमआरएफ सेंटर दिखाए हैं, जहां पर कूड़ा प्रबंधन संबंधित काम चल रहा है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते एक्यूआई, भूगर्भ और वायु दूषित की समस्या देखते हुए मेरठ में एनएमयू ने दो दिन निरीक्षण किया है। एनएमयू अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करेंगे।
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