एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: इंवेस्टर समिट में दिया करोड़ों का प्रस्ताव ड्राप, बैंकों ने नहीं दिया लोन
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना में बैंक ही बाधा बन गए हैं। फरवरी 2018 को लखनऊ में हुए इंवेस्टर समिट में जिले के 24 उद्यमियों ने 2200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया था। इनमें से 800 करोड़ का सबसे बड़ा प्रस्ताव देने वाले उद्यमी मयंक बिंदल ने बैंक से फाइनेंस नहीं होने के चलते अपना प्रस्ताव छोड़ दिया है। अब तक तीन उद्यमी अपने आइडिया ड्राप कर चुके हैं। चार उद्यमी बैंक से फाइनेंस का इंतजार कर रहे हैं। पांच को उद्योग के लिए जमीन ही नहीं मिली है। केवल सात उद्योग ही स्थापित हो पाए हैं।
मुजफ्फरनगर जिले में नए उद्योगों को स्थापित करने की केंद्र और प्रदेश सरकार की योजना यहां फलीभूत नहीं हो पा रही है। बैंकों से फाइनेंस नहीं होने और जमीन नहीं मिलने से उद्योग लगाने में बाधा आ रही है। फरवरी 2018 में लखनऊ में इंवेस्टर समिट में जिले से 24 उद्यमियों ने लगभग 2200 करोड़ का निवेश कर 2000 लोगों को रोजगार देने के प्रस्ताव दिए थे। इनमें सबसे बड़ा प्रस्ताव 800 करोड़ का टीशू पेपर बनाने के लिए मयंक बिंदल का था। इसमें 1200 लोगों को रोजगार दिया जाना था। काफी प्रयास करने के बाद भी जब बैंक ने फाइनेंस नहीं किया तो बिंदल ने अपना आइडिया ड्राप कर लिया है। इसी तरह फूड सप्लीमेंट मैन्यूफेक्चरिंग के लिए निशुल्क जमीन नहीं मिलने पर विवेक कौशिक अपना प्रस्ताव छोड़ चुके हैं। इस उद्योग में पांच करोड़ का निवेश होना था और 50 लोगों को रोजगार मिलना था। रबर और प्लास्टिक प्रोडक्ट के लिए एक करोड़ से उद्योग लगाने का आइडिया अनमोल अग्रवाल ने भी ड्राप कर दिया है। पांच उद्यमी अपना उद्योग लगाने के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। इन्हें अभी तक जमीन नहीं मिली है। इनमें अवधेश अग्रवाल का दो करोड़, जुनैद आलम का 50 लाख, अंकित संगल का एक करोड़, अंकुर गर्ग का सात करोड़ और राघव अग्रवाल का 200 करोड़ पूंजी निवेश होना है। इसी तरह बैंक से फाइनेंस नहीं होने से उद्यमी सुरेंद्र सिंह, सचिन अग्रवाल, नागेंद्र पंवार, मोहित मित्तल अपना उद्योग स्थापित नहीं कर पाए। उद्यमी सुशील अग्रवाल वन विभाग से जमीन की एनओसी नहीं मिलने के कारण उद्योग नहीं लगा पाए।
ये उद्योग हो पाए चालू
जिले में केवल सात उद्योग ही चालू हो पाए हैं। इनमें विपिन सिंघल ने 1.10 करोड़ से फूड प्रोसेसिंग का प्लांट लगाया है। नीरज केडिया ने 6.50 करोड़ से केमिकल प्रोडक्ट का प्लांट स्थापित किया। 150 करोड़ से अक्षय जैन ने राइटिंग एवं प्रिंटिंग पेपर का प्लांट लगाया। 100 करोड़ का प्रोजेक्ट टिकौला शुगर मिल में चालू हुआ। रेशू गोयल ने 10 करोड़ का आर्गेनिक प्लांट का प्रोजेक्ट शुरू किया। दस करोड़ से हरेंद्र सिंह ने अपना उद्योग स्थापित किया। पर्यटन के क्षेत्र में हरेंद्र सिंह ने हाइवे पर 35 करोड़ का निवेश कर देवराना रेस्टोरेंट बनाया। इन उद्योगों के माध्यम से जिले में लगभग 1600 लोगों को रोजगार दिया गया है।
नए उद्योगों के सामने बड़ा संकट: कुशपुरी
आईआईए के चेयरमैन कुशपुरी का कहना है कि बैंक से लोन लेने में इस समय उद्यमियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इसी के चलते जिले में कई बड़े प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाए। दूसरी जमीन की बड़ी समस्या है। हमारे पास बेगराजपुर इंडस्ट्रियल एरिया और मेरठ रोड का इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां जमीन चार हजार रुपये मीटर है। इतनी महंगी जमीन में उद्योग लगाना संभव नहीं है। उद्यमियों ने हाल ही में प्रदेश के लघु उद्यम सचिव भुवनेश कुमार से शुक्रताल क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर का निर्माण कराने की मांग की थी, जिससे उद्यमियों को सस्ती जमीन मिल सके।
जिले में लग चुके हैं सात उद्योग: मौर्य
उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य का कहना है कि फरवरी 2018 में इंवेस्टर समिट हुआ था, इसमें जिले में 24 उद्यमियों ने उद्योग लगाने के लिए प्रस्ताव दिया था। सात उद्योग यहां चालू हो चुके हैं, इनके माध्यम से लोगों को रोजगार भी मिला है। यह सच है कि कुछ उद्यमियों के सामने बैंक से फाइनेंस और जमीन की समस्या आ रही है। अभी तक तीन उद्यमियों ने ही योजना को ड्राप किया है।
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