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कभी नहीं भुलाया जा सकता आपातकाल : डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी
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मेरठ..कंवलजीत..आपातकाल के पचास वर्ष पूर्ण होने पर आईएमए हाल में प्रेसवार्ता करते राज्य मंत्री क
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मेरठ। विकास भवन सभागार में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आपातकाल दिवस कार्यक्रम हुआ। इस दौरान सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी, जिलाधिकारी डाॅ. वीके सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल ने लोकतंत्र सेनानियों व उनके आश्रितों को सम्मानित किया। आपातकाल पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत ने कहा कि आपातकाल ऐसा काला अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस दौरान अपर जिलाधिकारी नगर बृजेश सिंह, पीडीडीआरडीए सुनील कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
भारतीय लोकतंत्र का कलंकित अध्याय है आपातकाल : सुरेश राणा
मेरठ। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे दुखद और कलंकित अध्याय है। इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर पूरे देश को बंधक बना लिया था। आपातकाल में देश के चारों स्तंभों को कमजोर कर दिया गया और विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया। आपातकाल से हमें वास्तविक राजनीतिक लोकतंत्र मिला, जबकि सांस्कृतिक लोकतंत्र हमें बाद में मिला और वैचारिक लोकतंत्र के लिए अभी भी संघर्ष जारी है।
आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने भाजपा जिला व महानगर इकाई द्वारा बुधवार को कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, विनीत अग्रवाल शारदा, जिला सहकारी बैंक चेयरमैन विमल शर्मा, कमलदत्त शर्मा, मनिंदर पाल सिंह ने भी अपने विचार रखें। संचालन अरविंद गुप्ता मारवाड़ी और फिरेराम धनतला ने किया।
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खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं सोनिया-राहुल : कृष्णपाल गुर्जर
मेरठ। केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या करके ही आपातकाल लगाया था। यह आपातकाल किसी युद्ध या विद्रोह के कारण नहीं लगा था, बल्कि इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए लगाया था। आज भी सोनिया और राहुल गांधी खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं।
आईएमए हॉल में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कांग्रेस नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के नेताओं के परिवार में मृत्यु होने पर उनके अंतिम संस्कार में भी जाने की अनुमति नहीं थी। रक्षामंत्री राजनाथ को अपनी मां के अंतिम संस्कार में जाने की अनुमति भी कांग्रेस ने नहीं दी। 1977 में अगर कांग्रेस को जनता नहीं हराती तो इंदिरा गांधी देश में एकदलीय प्रणाली लागू कर देती।
उन्होंने कहा कि बिना संवैधानिक दायित्व के संजय गांधी सत्ता का केंद्र था और सारे निर्णय लेता था। उसी तरह 2004 से 2014 तक सरकार का मुखौटा कोई ओर था और सत्ता का केंद्र कोई ओर था। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बनाकर सोनिया को चेयरमैन बनाया गया। राहुल गांधी की कुर्सी पर खतरा आने पर आधी रात को आपात बैठक बुलाई। इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित करने वाले जस्टिस खन्ना को सीनियर होने के बाद भी चीफ जस्टिस नहीं बनाया।
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भारतीय लोकतंत्र का कलंकित अध्याय है आपातकाल : सुरेश राणा
मेरठ। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे दुखद और कलंकित अध्याय है। इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर पूरे देश को बंधक बना लिया था। आपातकाल में देश के चारों स्तंभों को कमजोर कर दिया गया और विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया। आपातकाल से हमें वास्तविक राजनीतिक लोकतंत्र मिला, जबकि सांस्कृतिक लोकतंत्र हमें बाद में मिला और वैचारिक लोकतंत्र के लिए अभी भी संघर्ष जारी है।
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आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने भाजपा जिला व महानगर इकाई द्वारा बुधवार को कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, विनीत अग्रवाल शारदा, जिला सहकारी बैंक चेयरमैन विमल शर्मा, कमलदत्त शर्मा, मनिंदर पाल सिंह ने भी अपने विचार रखें। संचालन अरविंद गुप्ता मारवाड़ी और फिरेराम धनतला ने किया।
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खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं सोनिया-राहुल : कृष्णपाल गुर्जर
मेरठ। केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या करके ही आपातकाल लगाया था। यह आपातकाल किसी युद्ध या विद्रोह के कारण नहीं लगा था, बल्कि इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए लगाया था। आज भी सोनिया और राहुल गांधी खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं।
आईएमए हॉल में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कांग्रेस नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के नेताओं के परिवार में मृत्यु होने पर उनके अंतिम संस्कार में भी जाने की अनुमति नहीं थी। रक्षामंत्री राजनाथ को अपनी मां के अंतिम संस्कार में जाने की अनुमति भी कांग्रेस ने नहीं दी। 1977 में अगर कांग्रेस को जनता नहीं हराती तो इंदिरा गांधी देश में एकदलीय प्रणाली लागू कर देती।
उन्होंने कहा कि बिना संवैधानिक दायित्व के संजय गांधी सत्ता का केंद्र था और सारे निर्णय लेता था। उसी तरह 2004 से 2014 तक सरकार का मुखौटा कोई ओर था और सत्ता का केंद्र कोई ओर था। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बनाकर सोनिया को चेयरमैन बनाया गया। राहुल गांधी की कुर्सी पर खतरा आने पर आधी रात को आपात बैठक बुलाई। इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित करने वाले जस्टिस खन्ना को सीनियर होने के बाद भी चीफ जस्टिस नहीं बनाया।