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एक साल बाद मिली मुक्ति, गंगा में हुआ अस्थियों का विसर्जन
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एक साल बाद मिली मुक्ति, गंगा में हुआ अस्थियों का विसर्जन
मेरठ। सूरजकुंड श्मशान घाट में सात कोविड वाले शवों की अस्थियां थीं, जिन्हें एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई लेने नहीं आया। अमर उजाला के प्रयास के बाद जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी ने आगे आकर अस्थियों के विसर्जन की पहल की। राम नवमी के पावन अवसर पर गढ़ गंगा में इन अस्थियों को प्रवाहित किया गया। कोरोना काल में बहुत से ऐसे मृतक हैं जिन्हें अंत समय में अपनी संतान या रिश्तेदार से मुखाग्नि भी प्राप्त नहीं होती है। पिछले वर्ष अंतिम संस्कार के बाद सात लोगों की अस्थियों को भी कोई लेने नहीं आया था।
जन कल्याण कल्याण वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा और अन्य सदस्य गंगा मोटर कमेटी से अनुमति लेकर बुधवार सुबह सात बजे सूरजकुंड श्मशान पहुंचे। यहां सुबह फूल चुनने का कार्य चल रहा था। कोई अपने पिता की अस्थियां लेने आया था तो कोई अपने रिश्तेदार की अस्थियों को इकट्ठा कर रहा था। कमरा खुलते ही एक के बाद अस्थियां निकलते देख वहां खड़े लोग भी आश्चर्य चकित हो गए।
गढ़ गंगा में पंडित ने किया दक्षिणा से इंकार
- समिति के पदाधिकारी अस्थियों को लेकर सुबह 9:30 बजे गढ़ गंगा पहुंचे। एक के बाद एक अस्थियों को देख आचार्यों ने मामले की जानकारी ली। इस दौरान पूजन करने वाले आचार्य ने दक्षिणा लेने से इंकार कर दिया। विधिविधान से पूजन किया गया। इस बीच काफी संख्या में स्थानीय लोग इस पुण्य कार्य में शामिल हुए। दुष्यंत रोहटा ने बताया कि मोटर बोट संचालक ने कहा कि वह भी इस पावन कार्य में हिस्सा बनना चाहता है और वह पैसा नहीं लेगा। बोट को गंगा में मध्य में ले जाकर अस्थि विसर्जन किया गया।
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मेरठ। सूरजकुंड श्मशान घाट में सात कोविड वाले शवों की अस्थियां थीं, जिन्हें एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई लेने नहीं आया। अमर उजाला के प्रयास के बाद जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी ने आगे आकर अस्थियों के विसर्जन की पहल की। राम नवमी के पावन अवसर पर गढ़ गंगा में इन अस्थियों को प्रवाहित किया गया। कोरोना काल में बहुत से ऐसे मृतक हैं जिन्हें अंत समय में अपनी संतान या रिश्तेदार से मुखाग्नि भी प्राप्त नहीं होती है। पिछले वर्ष अंतिम संस्कार के बाद सात लोगों की अस्थियों को भी कोई लेने नहीं आया था।
जन कल्याण कल्याण वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा और अन्य सदस्य गंगा मोटर कमेटी से अनुमति लेकर बुधवार सुबह सात बजे सूरजकुंड श्मशान पहुंचे। यहां सुबह फूल चुनने का कार्य चल रहा था। कोई अपने पिता की अस्थियां लेने आया था तो कोई अपने रिश्तेदार की अस्थियों को इकट्ठा कर रहा था। कमरा खुलते ही एक के बाद अस्थियां निकलते देख वहां खड़े लोग भी आश्चर्य चकित हो गए।
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गढ़ गंगा में पंडित ने किया दक्षिणा से इंकार
- समिति के पदाधिकारी अस्थियों को लेकर सुबह 9:30 बजे गढ़ गंगा पहुंचे। एक के बाद एक अस्थियों को देख आचार्यों ने मामले की जानकारी ली। इस दौरान पूजन करने वाले आचार्य ने दक्षिणा लेने से इंकार कर दिया। विधिविधान से पूजन किया गया। इस बीच काफी संख्या में स्थानीय लोग इस पुण्य कार्य में शामिल हुए। दुष्यंत रोहटा ने बताया कि मोटर बोट संचालक ने कहा कि वह भी इस पावन कार्य में हिस्सा बनना चाहता है और वह पैसा नहीं लेगा। बोट को गंगा में मध्य में ले जाकर अस्थि विसर्जन किया गया।
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