{"_id":"5d07f3ee8ebc3e32397f7397","slug":"eclipse-compensation-on-the-construction-of-expressway","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्रेस वे निर्माण पर मुआवजे का ग्रहण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक्सप्रेस वे निर्माण पर मुआवजे का ग्रहण
Tue, 18 Jun 2019 03:40 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Tue, 18 Jun 2019 03:40 AM IST
विज्ञापन
एक्सप्रेस वे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली से मेरठ का सफर 45 मिनट में पूरा होगा, इस दावे में फिलहाल पेंच फंस गया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और अधिकारी के अगले तीन माह में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे निर्माण पूरा होने के दावों को खेतों में खड़ी फसल झुठला रही है। चार चरणों में एक्सप्रेस-वे बनाने का काम चल रहा है। चौथे चरण में डासना से मेरठ तक निर्माण कार्य में सबसे ज्यादा देरी हो सकती है। क्योंकि यहां कई स्थानों पर तो अभी मुआवजे के मामले ही नहीं निपट सके हैं।
दरअसल चौथे चरण में डासना से मेरठ 32 किलोमीटर के निर्माण कार्य मेें कई स्थानों पर जमीन और सड़क का कार्य भी पूरा नहीं किया गया है। जिससे प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव के समय प्रोजेक्ट की गति धीमी होने से भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अभी इस चरण में मिट्टी बिछाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन कार्य की रफ्तार को देखते लग नहीं रहा कि अगस्त-2019 तक पूरी तरह से इसे कर लिया जाएगा।
क्या यहां से निकलेगा एक्सप्रेस वे
मेरठ के हिस्से के प्रमुख छोर पर शामिल गांव अच्छरौंडा से मोहिउद्दीनपुर तक निर्माण में अभी एक भी पिलर खड़ा नहीं हो सका है। कई माह से यहां मुआवजा न मिलने के कारण किसानों ने ज्वार को बो दिया। अभी भी खेतों में ज्वार लहलहा रही है। इस कार्य को पूरा होने में भी करीब दो माह से अधिक लग सकते हैं। जिससे एक्सप्रेस-वे का कार्य बाधित हो सकता है।
विज्ञापन
मानसून भी बनेगा बाधक
जुलाई-अगस्त में मानसून का आमद प्रोजेक्ट की रफ्तार में बाधक बनेगी। अभी कई स्थानों पर मिट्टी का बेस तैयार होना है। एक्सप्रेस-वे की सड़क पर कॉस्टिंग का कार्य भी होना है। बारिश होने से अंडरपास के सभी कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा। एनएचएआई बारिश से पहले अगर तेजी से कार्य को पूरा कर लेता है तो ठीक रहेगा नहीं तो प्रोजेक्ट पर फिर खतरा मंडरा जाएगा।
जल्द निपटा लेंगे मामले
जमीन अधिग्रहण के मामले लगभग सभी निपट चुके हैं। लगभग 50-60 प्रतिशत कार्य भी पूरा हो चुका है। कुछ मामले जो रह गए हैं उनका भी निस्तारण हो चुका है। तहसील में रिपोर्ट भेज दी गई है। मुआवजे का मामला निपटा लिया जाएगा। -अरविंद कुमार, मैनेजर, एनएचएआई
ये हैं चरण
01:
निजामुद्दीन से यूपी गेट
कुल दूरी - 8.7 किमी
काम शुरू - नवंबर 2016
उद्घाटन - मई 2018
प्रगति - कार्य पूरा हो चुका
02:
यूपी गेट से डासना
कुल दूरी - 19.2 किमी
कुल लागत - 1989 करोड़ रुपये
काम शुरू - छह नवंबर 2017
पूर्ण होने का लक्ष्य - 30 महीने
पूरा होने का दावा - सितंबर 2019
03:
डासना से हापुड़
कुल दूरी - 22 किमी
कुल लागत - 1057 करोड़ रुपये
काम शुरू - दिसंबर 2016
पूर्ण करने का लक्ष्य - 30 महीने
पूरा होने का दावा - जून 2019
04:
डासना से मेरठ
कुल दूरी - 32 किमी
कुल लागत - 1130 करोड़ रुपये
काम शुरू - अप्रैल 2018
पूर्ण करने का लक्ष्य - 18 महीने
पूरा होने का दावा - अगस्त 2019
विज्ञापन
दरअसल चौथे चरण में डासना से मेरठ 32 किलोमीटर के निर्माण कार्य मेें कई स्थानों पर जमीन और सड़क का कार्य भी पूरा नहीं किया गया है। जिससे प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव के समय प्रोजेक्ट की गति धीमी होने से भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अभी इस चरण में मिट्टी बिछाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन कार्य की रफ्तार को देखते लग नहीं रहा कि अगस्त-2019 तक पूरी तरह से इसे कर लिया जाएगा।
विज्ञापन
क्या यहां से निकलेगा एक्सप्रेस वे
मेरठ के हिस्से के प्रमुख छोर पर शामिल गांव अच्छरौंडा से मोहिउद्दीनपुर तक निर्माण में अभी एक भी पिलर खड़ा नहीं हो सका है। कई माह से यहां मुआवजा न मिलने के कारण किसानों ने ज्वार को बो दिया। अभी भी खेतों में ज्वार लहलहा रही है। इस कार्य को पूरा होने में भी करीब दो माह से अधिक लग सकते हैं। जिससे एक्सप्रेस-वे का कार्य बाधित हो सकता है।
विज्ञापन
मानसून भी बनेगा बाधक
जुलाई-अगस्त में मानसून का आमद प्रोजेक्ट की रफ्तार में बाधक बनेगी। अभी कई स्थानों पर मिट्टी का बेस तैयार होना है। एक्सप्रेस-वे की सड़क पर कॉस्टिंग का कार्य भी होना है। बारिश होने से अंडरपास के सभी कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा। एनएचएआई बारिश से पहले अगर तेजी से कार्य को पूरा कर लेता है तो ठीक रहेगा नहीं तो प्रोजेक्ट पर फिर खतरा मंडरा जाएगा।
जल्द निपटा लेंगे मामले
जमीन अधिग्रहण के मामले लगभग सभी निपट चुके हैं। लगभग 50-60 प्रतिशत कार्य भी पूरा हो चुका है। कुछ मामले जो रह गए हैं उनका भी निस्तारण हो चुका है। तहसील में रिपोर्ट भेज दी गई है। मुआवजे का मामला निपटा लिया जाएगा। -अरविंद कुमार, मैनेजर, एनएचएआई
ये हैं चरण
01:
निजामुद्दीन से यूपी गेट
कुल दूरी - 8.7 किमी
काम शुरू - नवंबर 2016
उद्घाटन - मई 2018
प्रगति - कार्य पूरा हो चुका
02:
यूपी गेट से डासना
कुल दूरी - 19.2 किमी
कुल लागत - 1989 करोड़ रुपये
काम शुरू - छह नवंबर 2017
पूर्ण होने का लक्ष्य - 30 महीने
पूरा होने का दावा - सितंबर 2019
03:
डासना से हापुड़
कुल दूरी - 22 किमी
कुल लागत - 1057 करोड़ रुपये
काम शुरू - दिसंबर 2016
पूर्ण करने का लक्ष्य - 30 महीने
पूरा होने का दावा - जून 2019
04:
डासना से मेरठ
कुल दूरी - 32 किमी
कुल लागत - 1130 करोड़ रुपये
काम शुरू - अप्रैल 2018
पूर्ण करने का लक्ष्य - 18 महीने
पूरा होने का दावा - अगस्त 2019