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राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुश्किल हो गया था कारसेवकों को संभालना

Sat, 01 Aug 2020 02:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 02:27 AM IST
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During the Ram temple movement it was difficult to handle kar sevaks
राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुश्किल हो गया था कारसेवकों को संभालना
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मेरठ। राम मंदिर आंदोलन के दौरान लोगों में गजब का जोश था। इसके चलते पुलिस प्रशासन के लिए कारसेवकों को संभालना मुश्किल हो गया था। विवादित ढांचा क्षतिग्रस्त होने से पहले ही हिंदू संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जेल भेजे गए। वहां भी उन्होंने जेल प्रशासन की नींद हराम कर दी।
पुलिस लाइन में मच गया था हंगामा
भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग आज भी उस दौर को याद कर रोमांचित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 1992 में पुलिस ने कारसेवकों की गिरफ्तारी शुरू कर दी थी। उन्हें पुलिस लाइन लाया जा रहा था। यहां परीक्षितगढ़ के करीब 50 कारसेवक प्रधानाचार्य पदम सैन मित्तल के नेतृत्व में बस द्वारा पहुंचे। इन्होंने नारेबाजी कर माहौल ही बदल दिया। पुलिस इन्हें संभालने में लगी रही। इसी दौरान अंधेरा का लाभ उठाकर परीक्षितगढ़ से आए बिजेंद्र लौहरे समर्थकों के साथ वहां से खिसक गए। उन्होंने पुलिस लाइन में दीवारों पर राम मंदिर निर्माण के समर्थन में स्लोगन लिख डाले। पुलिस अधिकारियों की इस पर नजर पड़ी तो हंगामा हो गया।
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जेल पर कर लिया था कब्जा
पुलिस प्रशासन को अस्थायी जेलों की व्यवस्था करनी पड़ी थी। जानसठ के इंटर कॉलेज में अस्थायी जेल बनाई गई और वहां परीक्षितगढ़ एवं मेरठ के कारसेवक भेजे गए। डॉ. मुनेंद्र शर्मा बताते हैं कि अस्थायी जेल पर पुलिस का पहरा था। मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात तहसीलदार आते थे। एक बार कारसेवकों ने किसी बात से नाराज होकर उनकी धोती उतार दी थी। इसके बाद कॉलेज के एनसीसी आफिस का ताला तोड़कर वहां रखी डमी रायफल निकाल लीं और छत पर चढ़ गए। कॉलेज के चारों कोनों पर बनी गुबंद कारसेवकों ने तोड़ दीं। इससे पुलिस प्रशासन में चर्चा फैल गई कि कारसेवकों ने पुलिस के हथियार छीनकर जेल पर कब्जा कर लिया है। इस पर भारी फोर्स कालेज पहुंची तो जानकारी पाकर राहत की सांस ली। इस पर कारसेवकों को अगले दिन मुजफ्फरनगर की सूत मिल में बनाई अस्थायी जेल में स्थानांतरित कर दिया। वहां भी कारसेवकों ने खाने को लेकर हंगामा कर दिया। हंगामा इतना बढ़ा कि प्रशासन ने उन्हें रात में ही घर भेज दिया।
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