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Meerut News: डूंगर में चर्म शोधन कारखाना बंद, एनजीटी के आदेश पर कार्रवाई
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रोहटा। गांव डूंगर में एनजीटी के आदेश पर चर्मशोधन कारखाने को सील करने पहुंची टीम और मौजूद पुलिस।
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- 100 साल पुरानी फैक्टरी से जुड़े 150 परिवारों के सामने रोजी-राेटी का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा (मेरठ)। एनजीटी के आदेश पर डूंगर गांव में 100 साल पुरानी चर्म शोधन फैक्टरी पर सोमवार को प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सील लगा दी गई। इस कार्रवाई के बाद फैक्टरी में काम करने वाले करीब 150 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
डूंगर गांव में पिछले कई दशकों से लगभग 150 परिवार चमड़ा रंगाई का कार्य कर अपनी आजीविका चला रहे थे। वर्ष 2004 में केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चार करोड़ रुपये की लागत से इस इकाई का उन्नयन भी किया गया था। उस समय इसे समूह के माध्यम से संचालित किया गया और एक समिति का गठन भी किया गया था।
आरोप है कि पिछले कई वर्षों से बिना अनुमति यह कार्य अवैध रूप से संचालित हो रहा था। फैक्टरी से निकलने वाले अपशिष्ट पानी से आसपास के खेतों की फसलें प्रभावित हो रही थीं। साथ ही यह प्रदूषित पानी नाले के माध्यम से पूठखास और आजमपुर गांव तक पहुंच रहा था, जिससे वहां के जल स्रोत भी दूषित पाए गए। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि की शिकायत भी की थी।
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इस मामले में पूठखास निवासी सूरजबली सैनी की शिकायत पर प्रदूषण विभाग ने जांच की, जिसमें पानी प्रदूषित पाया गया। इसके बाद मामला एनजीटी तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान जांच में प्रदूषण की पुष्टि हुई। एनजीटी ने प्रशासन को कई बार फैक्टरी बंदी के आदेश दिए, लेकिन यहां कार्यरत लोगों के रोजगार के कारण कार्रवाई टलती रही।
हाल ही में दो अप्रैल को हुई सुनवाई में एनजीटी ने जिलाधिकारी मेरठ को तलब कर दो सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। सोमवार को एसडीएम सदर दीक्षा जोशी, नगर मजिस्ट्रेट बृजेश सिंह, प्रदूषण विभाग के अधिकारी योगेश मिश्रा और पुलिस बल की मौजूदगी में फैक्टरी को सील कर दिया गया। इस दौरान सभी मुख्य द्वार, पंप और उपकरण सील किए गए। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और दिनभर क्षेत्र में आवागमन नियंत्रित किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सील तोड़ने या हस्तक्षेप करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने कार्रवाई को सही बताया
मजदूरों का कहना है कि वह पीढ़ियों से इसी कार्य पर निर्भर थे और अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वहीं, आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने प्रदूषण से राहत मिलने पर प्रशासन की कार्रवाई को सही बताया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा (मेरठ)। एनजीटी के आदेश पर डूंगर गांव में 100 साल पुरानी चर्म शोधन फैक्टरी पर सोमवार को प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सील लगा दी गई। इस कार्रवाई के बाद फैक्टरी में काम करने वाले करीब 150 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
डूंगर गांव में पिछले कई दशकों से लगभग 150 परिवार चमड़ा रंगाई का कार्य कर अपनी आजीविका चला रहे थे। वर्ष 2004 में केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चार करोड़ रुपये की लागत से इस इकाई का उन्नयन भी किया गया था। उस समय इसे समूह के माध्यम से संचालित किया गया और एक समिति का गठन भी किया गया था।
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आरोप है कि पिछले कई वर्षों से बिना अनुमति यह कार्य अवैध रूप से संचालित हो रहा था। फैक्टरी से निकलने वाले अपशिष्ट पानी से आसपास के खेतों की फसलें प्रभावित हो रही थीं। साथ ही यह प्रदूषित पानी नाले के माध्यम से पूठखास और आजमपुर गांव तक पहुंच रहा था, जिससे वहां के जल स्रोत भी दूषित पाए गए। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि की शिकायत भी की थी।
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इस मामले में पूठखास निवासी सूरजबली सैनी की शिकायत पर प्रदूषण विभाग ने जांच की, जिसमें पानी प्रदूषित पाया गया। इसके बाद मामला एनजीटी तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान जांच में प्रदूषण की पुष्टि हुई। एनजीटी ने प्रशासन को कई बार फैक्टरी बंदी के आदेश दिए, लेकिन यहां कार्यरत लोगों के रोजगार के कारण कार्रवाई टलती रही।
हाल ही में दो अप्रैल को हुई सुनवाई में एनजीटी ने जिलाधिकारी मेरठ को तलब कर दो सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। सोमवार को एसडीएम सदर दीक्षा जोशी, नगर मजिस्ट्रेट बृजेश सिंह, प्रदूषण विभाग के अधिकारी योगेश मिश्रा और पुलिस बल की मौजूदगी में फैक्टरी को सील कर दिया गया। इस दौरान सभी मुख्य द्वार, पंप और उपकरण सील किए गए। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और दिनभर क्षेत्र में आवागमन नियंत्रित किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सील तोड़ने या हस्तक्षेप करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने कार्रवाई को सही बताया
मजदूरों का कहना है कि वह पीढ़ियों से इसी कार्य पर निर्भर थे और अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वहीं, आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने प्रदूषण से राहत मिलने पर प्रशासन की कार्रवाई को सही बताया है।

रोहटा। गांव डूंगर में एनजीटी के आदेश पर चर्मशोधन कारखाने को सील करने पहुंची टीम और मौजूद पुलिस।