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शिक्षकों व बच्चों की मॉनिटरिंग के लिए लागू हुई व्हाट्सएप उपस्थिति योजना पहले ही दम तोड़ गई

Wed, 28 Dec 2016 11:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Wed, 28 Dec 2016 11:51 AM IST
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Monitoring was implemented for teachers and children have died WhatsApp attendance plan
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों और बच्चों की नियमित उपस्थिति की मॉनिटरिंग को लागू हुई योजना दम तोड़ गई है। इस योजना में प्रतिदिन प्रत्येक स्कूल के हैडमास्टर को व्हाट्सएप के जरिये स्कूल के बच्चों और शिक्षकों की सामूहिक फोटो भेजनी थी, लेकिन शिक्षकों ने शासन का आदेश न बताते हुए इस योजना से किनारा कर लिया।

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बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति तो दूर, स्कूल से अनुपस्थित होकर भी एक-दो दिन बाद स्कूल आकर उपस्थिति दर्ज करने, बच्चों के स्कूल न आने, कम बच्चे आने पर भी मिड डे मील के लिए ज्यादा संख्या दर्शाने जैसी शिकायत आ रहीं थीं। इससे एक तरफ जहां शैक्षिक वातावरण पूरी तरह बिगड़ा हुआ था तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार भी चल रहा था। इन तमाम शिकायतों को दूर करने और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने व्हाट्सएप ग्रुप से प्रतिदिन उपस्थिति की मॉनिटरिंग करने की योजना लागू की। इस योजना के तहत प्रत्येक स्कूल के हैडमास्टर या वरिष्ठतम अध्यापक को प्रतिदिन स्कूल टाइम के 15 मिनट के भीतर उपस्थित शिक्षकों व बच्चों को साथ बैठाकर तथा पास में एक बोर्ड पर तैनात शिक्षकों, उपस्थित शिक्षकों की संख्या, पंजीकृत बच्चों और उपस्थित बच्चों की संख्या भी लिखते हुए फोटो भेजना था।
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ऐसे हुई मॉनिटरिंग
ब्लॉक स्तर पर ग्रुप गठित किये गये और प्रत्येक ग्रुप को कलक्ट्रेट की ई गवर्नेंस सेल, सीडीओ, बीएसए से जोड़ा गया। ई गवर्नेेंस सेल से इन फोटो को कंप्यूटर में फीड करते हुए बीएसए कार्यालय से उपलब्ध डेटा के अनुसार पूरी रिपोर्ट तैयार कर रोजाना डीएम को भेजी गई। जहां से बच्चों और शिक्षकों की कम उपस्थिति पर स्पष्टीकरण जारी हुए।
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खलबली मची पर आया सुधार
इस योजना के लागू होने से बेसिक शिक्षा के स्कूल एक सप्ताह में ही ढर्रे पर आ गए। अधिकांश ऐसे स्कूल जहां पंजीकृत बच्चों से आधे भी स्कूल नहीं आते थे, उनमें उपस्थिति 80-90 प्रतिशत तक पहुंच गई और शिक्षक भी समय पर स्कूल आना शुरू हो गये। लेकिन शिक्षकों में इससे खलबली मच गई। फोन न होने और नेट यूज करने पर होने वाले खर्च का बहाना बनाकर शिक्षकों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद शासन को पत्र लिखा, जहां से पता चला कि शासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं है। इसके बाद शिक्षकों ने बीएसए को पत्र लिखा कि वह फोटो नहीं भेजेंगे, यदि कार्रवाई हुई तो आंदोलन होगा। शिक्षकों ने इसके बाद से फोटो भेजना बंद कर दिया। अब जिले से 20-25 प्रतिशत स्कूलों के ही फोटो आ रहे हैं।


जल्दी ही शासनादेश के साथ शुरू होगी योजना
डीएम बी. चंद्रकला ने कहा कि हमारी देखा देखी अन्य जनपदों ने भी यह योजना शुरू की। उन्होंने इसे दंडात्मक कर दिया। जिससे शिक्षकों ने अपने संगठन में आवाज उठाई और शासनादेश की बात सामने आई। पश्चिम के शिक्षक तो संपन्न हैं और उनके पास फोन हैं, लेकिन पूर्वांचल में थोड़ा समस्या है। ऐसे में हमने ही इस तरफ अब ध्यान नहीं दिया। लेकिन मुख्यमंत्री के सचिव आमोद कुमार से इस संबंध में बात हुई है। स्मार्ट फोन योजना में शिक्षकों का भी पंजीकरण कराकर उन्हें फोन दिलाए जाएंगे और उसके बाद शासनादेश के साथ इस योजना को लागू कराया जाएगा। क्योंकि इस योजना से वास्तव में सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार आएगा।

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