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बागपत के लाल पर गर्व, किया जिले का नाम रोशन, जापान में मिला 'युवा वैज्ञानिक पुरस्कार'

Sat, 07 Sep 2019 10:48 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Sep 2019 10:48 AM IST
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Dr. Ramkaran Sharma of Baghpat has got Young Scientist Award in Japan
बागपत के डॉ. रामकरण शर्मा को जापान में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला - फोटो : अमर उजाला

बागपत जनपद में ट्योढ़ी गांव के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ. रामकरण शर्मा को जापान में बेहतर शोध पत्र प्रस्तुति करने पर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार दिया गया। 35 देशों के 150 वैज्ञानिकों में इनका शोध सर्वश्रेष्ठ रहा। डॉ. रामकरण शर्मा ने ‘औद्योगिक रसायन हमारी वायु एवं पानी को प्रदूषित कर रहे हैं’ विषय पर शोध प्रस्तुत कर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। 

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सऊदी अरब स्थित इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में यूरोपियन एवं अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ डॉ. रामकरण शर्मा शोध कार्य कर रहे हैं। परिवार के साथ वह यूनिवर्सिटी के कैंपस में रहते हैं। उन्हें श्रेष्ठ शोध कार्य के चलते पिछले साल इटली में बेस्ट रिसर्च अवार्ड से नवाजा गया था। डॉ. शर्मा ने जापान के फुकूका शहर में हुई विज्ञान प्रतियोगिता में भाग लिया। इसमें जापान के अलावा अमेरिका, फ्रांस, इटली, चीन, इंग्लैंड, जर्मनी, कोरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन और ताईवान समेत 35 देशों के 150 वैज्ञानिक शामिल रहे। एक सप्ताह तक चली प्रतियोगिता में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए इन 150 वैज्ञानिकों को पहले एक हजार वैज्ञानिकों में से चुना गया था। सभी वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद डॉ. रामकरण शर्मा के शोध पत्र को उच्च श्रेणी का पाया गया और उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के लिए चुना गया।
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ऐसे प्रस्तुत किया शोध
डॉ. शर्मा ने अपने शोध को प्रस्तुत करते हुए कहा कि औद्योगिक रसायन हमारी वायु एवं पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। समय के साथ हालात बदतर हो रहे हैं। यह हानिकारक रसायन मानव और जानवरों में कई घातक बीमारियों का कारण हैं। हर दूसरे सेकेंड में 310 किलोग्राम विषैले रसायनों को दुनिया भर की औद्योगिक सुविधाओं द्वारा हमारी वायु, भूमि और पानी में छोड़ा जाता है। प्रत्येक वर्ष उद्योग हमारे पर्यावरण में विषाक्त रसायनों की मात्रा बढ़ा रहे हैं। प्रतिवर्ष 2 मिलियन टन ऐसे केमिकल्स हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारी पैदा करते हैं। उद्योग में हानिकारक रसायनों को एंजाइमों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। लेकिन ये एंजाइम औद्योगिक कठोर परिस्थितियों में काम करने के मामले में विशिष्ट होना चाहिए। इस वैश्विक समस्या को हल करने के लिए ही जर्मनी, अमेरिका और सऊदी अरब के साथ काम कर रहे हैं। हम लाल समुद्र से बैक्टीरिया का उपयोग कर रहे हैं ताकि विशेष एंजाइमों को प्राप्त किया जा सके और उन्हें उद्योग में उपयोग किया जा सके।
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प्राइमरी स्कूल से निकला बागपत का लाल
डॉ. रामकरण शर्मा की प्राथमिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल में हुई। इसके बाद सरूरपुर खेड़की स्थित स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। जनता वैदिक डिग्री कॉलेज बड़ौत से बीएससी और एमएससी करने के बाद उन्होंने सीएसआईआर नेट-जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलो) की राष्ट्रीय स्तर परीक्षा क्वालीफाई की। डॉ. शर्मा ने उसके बाद आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की। यहां उनके आठ शोध पत्र प्रकाशित हुए। उन्हें आईआईटी दिल्ली की तरफ से भी उत्कृष्ट शोध के लिए पुरस्कृत किया गया।  आईआईटी दिल्ली से पीएचडी पूरी करने के बाद डॉ. रामकरण को अमेरिका में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ माइक्रोबॉयोलोजिस्ट की ओर से पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप (पीडीएफ) के लिए चुना गया जो एशिया के 50 से ज्यादा देशों में से किसी एक व्यक्ति को ही मिलती है।  

शिलादित्य के साथ किया शोध
अमेरिका में डॉ. रामकरण ने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर हरगोविंद खुराना के शिष्य रहे डॉ. शिलादित्य की प्रयोगशाला में पोस्ट डॉकटोरल फैलोशिप (पीडीएफ) पूरी की। उन्होंने मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना खोजने के नासा द्वारा वित्त पोषित अध्ययन में भूमिका निभाई। 

ऐसा है डॉ. रामकरण शर्मा का परिवार
डॉ. रामकरण शर्मा की पत्नी अनुपमा शर्मा दिल्ली आईआईटी से एम-टेक हैं। वह अमेरिका में फिजिक्स और मैथेमेटिक्स की असिसटेंट प्रोफेसर रह चुकी हैं। परिवार में एक बेटा और एक बेटी है।

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