{"_id":"685c41a61855bf78c002ccc8","slug":"dr-krishna-bahadur-singh-was-a-thorn-in-the-eyes-of-the-government-meerut-news-c-27-1-bij1007-153108-2025-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार की आंखों में खटकते थे डॉ. कृष्ण बहादुर सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार की आंखों में खटकते थे डॉ. कृष्ण बहादुर सिंह
Thu, 26 Jun 2025 12:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Thu, 26 Jun 2025 12:06 AM IST
विज्ञापन
आपातकाल के बाद मीसा के अंतर्गत जेल से छूटने के बाद धामपुर में जीप से यात्रा निकालते कृष्ण बहादु
कोतवाली देहात/बिजनौर। 25 जून 1975 को लगे आपातकाल में जिले के लगभग 70 लोगों को जेल भेजा गया था। इस दौरान लगभग सौ लोग भूमिगत होकर पुलिस से बचे रहे। जनपद में आपातकाल में सरकार की आंख में सबसे अधिक खटकने वालों में धामपुर निवासी डॉ. कृष्ण बहादुर सिंह का नाम भी आता है। उस समय कृष्ण बहादुर सिंह जिले में संघ के पुराने कार्यकर्ता थे। इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान के संयोजक फीना निवासी इंजीनियर हेमंत कुमार ने बताया कि 1926 में जन्मे कृष्ण बहादुर सिंह ने गुरुकुल कांगड़ी से आयुर्वेदाचार्य की शिक्षा प्राप्त की तथा नेत्र चिकित्सा में डिप्लोमा किया और डॉक्टर कहलाए।
अपना चिकित्सालय धामपुर में खोलने के बाद ये शीघ्र ही प्रसिद्ध हो गए। धामपुर में ही ये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी जुड़ गए। इन्होंने अपना अधिकांश समय संघ कार्यों को समर्पित कर दिया और नागपुर में ओटीसी पूरी की। नागपुर में प्रशिक्षण के समय इनके साथ अटल बिहारी बाजपेई भी थे, जो बाद में देश के प्रधानमंत्री बने।
विज्ञापन
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कृष्ण बहादुर बिजनौर लौट आए और यहां नगर कार्यवाह तथा जिला संघ चालक का दायित्व निभाया। 25 जून 1975 में लगे आपातकाल में मीसा कानून के तहत इनको सरकार ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जहां इन्हें भारी प्रताड़ना मिली पर इन्होंने माफी नहीं मांगी।
बाद में जेल से छूटने की खुशी में नगरवासियों ने इनका भारी स्वागत किया। इनको जीप में बैठाकर भव्य स्वागत यात्रा निकाली गई। इस स्वागत यात्रा का एक फोटो इंजीनियर हेमंत कुमार ने अपनी पुस्तक जनपद बिजनौर का परिचय में प्रकशित किया है।
जेल जाने के कारण इनकी आर्थिक स्थित बहुत बिगड़ गई थी। डॉ. कृष्ण बहादुर सिंह फीना के मूल निवासी थे और इनका निधन धामपुर में 1997 में हुआ था। इन्हें अग्रणी लोकतंत्र सेनानियों में गिना जाता है।
विज्ञापन
क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान के संयोजक फीना निवासी इंजीनियर हेमंत कुमार ने बताया कि 1926 में जन्मे कृष्ण बहादुर सिंह ने गुरुकुल कांगड़ी से आयुर्वेदाचार्य की शिक्षा प्राप्त की तथा नेत्र चिकित्सा में डिप्लोमा किया और डॉक्टर कहलाए।
विज्ञापन
अपना चिकित्सालय धामपुर में खोलने के बाद ये शीघ्र ही प्रसिद्ध हो गए। धामपुर में ही ये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी जुड़ गए। इन्होंने अपना अधिकांश समय संघ कार्यों को समर्पित कर दिया और नागपुर में ओटीसी पूरी की। नागपुर में प्रशिक्षण के समय इनके साथ अटल बिहारी बाजपेई भी थे, जो बाद में देश के प्रधानमंत्री बने।
विज्ञापन
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कृष्ण बहादुर बिजनौर लौट आए और यहां नगर कार्यवाह तथा जिला संघ चालक का दायित्व निभाया। 25 जून 1975 में लगे आपातकाल में मीसा कानून के तहत इनको सरकार ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जहां इन्हें भारी प्रताड़ना मिली पर इन्होंने माफी नहीं मांगी।
बाद में जेल से छूटने की खुशी में नगरवासियों ने इनका भारी स्वागत किया। इनको जीप में बैठाकर भव्य स्वागत यात्रा निकाली गई। इस स्वागत यात्रा का एक फोटो इंजीनियर हेमंत कुमार ने अपनी पुस्तक जनपद बिजनौर का परिचय में प्रकशित किया है।
जेल जाने के कारण इनकी आर्थिक स्थित बहुत बिगड़ गई थी। डॉ. कृष्ण बहादुर सिंह फीना के मूल निवासी थे और इनका निधन धामपुर में 1997 में हुआ था। इन्हें अग्रणी लोकतंत्र सेनानियों में गिना जाता है।