अनिल जोशी बोले- त्रासदी से सीखे होते तो देश के दिल 'दिल्ली' में नहीं होता प्रदूषण का अटैक
पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि देश के दिल दिल्ली पर प्रदूषण का अटैक पड़ गया है। इससे गंभीर बात और क्या हो सकती है। अगर अब भी नहीं सुधरे तो कुछ नहीं बचेगा। हमारी प्रवृत्ति ये हो गई है कि जब प्रदूषण के कष्ट का समय होता है तब हल्ला मचाते हैं। जैसे ही प्रदूषण का स्तर नीचे आता है, फिर पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं। सीखना नहीं चाहते। उन्होंने बताया कि फरवरी से क्रांति की धरती मेरठ से पर्यावरण को बचाने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी बुधवार को डीएन कॉलेज में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का शुभारंभ करने आए आए थे। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशक में जितनी भी त्रासदी आईं, उनसे हमने कुछ नहीं सीखा। हम ऐसी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिसने आने वाली पीढ़ी के हिस्से की भी हवा, पानी और मिट्टी मार दिया है। आज सब जीडीपी के पीछे पागल हो रहे हैं। जिस दिन से विकास का सूचक आया वहीं से विनाश शुरू हो गया। सन् 1935 से 40 के बीच जीडीपी यूरोप से आई थी। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ सकल पर्यावरण उत्पाद का सूचक भी होना चाहिए। यह बताया जाए कि देश ने आर्थिक उन्नति के साथ कितना पानी जोड़ा, कितनी प्राण वायु ठीक की, कितनी मिट्टी ठीक की, कितना जंगल दिया?
हवा, पानी और जंगल के मुद्दे पर हो चुनाव
यूकेलिप्टिस और पॉपुलर से जंगल नहीं बनता। शहरीकरण ने सब बर्बाद कर दिया। पहले लोग वहां बसते थे, जहां पानी होता था। आज जहां हम बसते हैं, वहां पानी ले जाते हैं। पानी थक रहा है। हम अपने दायित्वों के प्रति सचेत नहीं हैं। अब वक्त आ गया है जब चुनाव हवा, मिट्टी, पानी और जंगल के मुद्दों पर लड़ा जाए। ये आम लोगों को समझना होगा। हम नकलची लोेग हैं। ब्रैंड ने देश को बर्बाद कर दिया है। हम बंदर की तरह नकल करते हैं। कौन सा जूता, कपड़ा खरीदना है, खेत में कौन सी खाद डालें, कौन सा पानी पीएं, ये हमें अभिनेता-अभिनेत्री बता रहे हैं। हर आदमी कार लेकर घूम रहा है। ऑड-ईवन से काम नहीं चलेगा, पर्यावरण के बारे में अगर संजीदा हैं तो हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर आ जाना चाहिए।
अब तो हवा का भी कारोबार खड़ा हो रहा
प्रदूषण के लिए सबसे बड़ा दोषी शहरीकरण है। पानी खराब होने पर विश्व में बोतलों का 53.8 अरब का व्यापार खड़ा हो गया है। ग्रोथ ऑफ रेट सात प्रतिशत है। अब हवा का नंबर लग गया, हवा के लिए भी प्यूरीफायर का व्यापार शुरू हो रहा है। सवाल ये है कि हम क्या कर रहे हैं। विकल्प भी कारोबारी निकाल रहे हैं। अच्छी हवा के लिए हम पहाड़ों की तरफ भाग रहे हैं। वहां भी हालात खराब हो रहे हैं। प्रकृति ने हमें पैदा किया, हम उसे ही मार रहे हैं। दिल्ली की हवा खराब हो रखी है। देश के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के यहां एयर प्यूरीफायर लग गए हैं या लग जाएंगे। पर यह बहुत घातक है। प्रकृति आपकी इम्युनिटी को बढ़ाती है, ऐसे प्यूरीफायर शरीर को भी खराब कर देते हैं।
मेरठ-उत्तराखंड से ही करेंगे क्रांति
अनिल जोशी ने कहा कि इटावा, इंदौर और मेरठ में जागरूक नागरिक हैं। मेरठ में क्रांति के संस्कार भी हैं। उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी। मेरठ और उत्तराखंड मिलेंगे तो देश में नई क्रांति की शुरुआत करेंगे। साइकिल यात्रा और गोष्ठी आदि के माध्यम से पर्यावरण बचाने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। फरवरी-मार्च से आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें हर वर्ग को भूमिका निभानी होगी।
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