{"_id":"68c6a97265f6430f90086778","slug":"donation-done-in-reverence-brings-welfare-to-ancestors-prapoorna-bharti-meerut-news-c-14-1-mrt1002-975601-2025-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रद्धा में किए दान से पूर्वजों का होता है कल्याण : ्प्रपूर्णा भारती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रद्धा में किए दान से पूर्वजों का होता है कल्याण : ्प्रपूर्णा भारती
विज्ञापन
शास्त्रीनगर स्थित राजवंश धर्मशाला में मासिक सत्संग समागम का हुआ आयोजन......संवाद
- दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से किया गया मासिक सत्संग
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शास्त्रीनगर स्थित राजवंश धर्मशाला में मासिक सत्संग हुआ। इसमें गुरु भक्ति का महत्व बताया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई। भजन और आध्यात्मिक प्रवचनों ने समागम को अलौकिक बना दिया।
कार्यक्रम में साध्वी प्रपूर्णा भारती ने श्राद्ध के अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि श्राद्ध शब्द संस्कृत धातु श्रद्धा से उत्पन्न हुआ है। इसका अर्थ है आस्था, विश्वास और समर्पण। श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं बल्कि एक आत्मिक प्रक्रिया है। हम कृतज्ञता के साथ अपने पूर्वजों के प्रति ऋण चुकाने का प्रयास करते हैं। साध्वी ने कहा कि हमारा वर्तमान हमारे पूर्वजों की तपस्या और परिश्रम का फल है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से दान करता है तो उसका और उसके पूर्वजों का भी कल्याण हो जाता है।
साध्वी ने कहा कि सतगुरु की कृपा से शिष्य का जीवन सकारात्मकता और दिव्यता से परिपूर्ण हो जाता है। उन्होंने साधकों को गुरु भक्ति के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में सामूहिक ध्यान सत्र ने साधकों को अपने विचारों को सकारात्मकता से परिपूर्ण करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शास्त्रीनगर स्थित राजवंश धर्मशाला में मासिक सत्संग हुआ। इसमें गुरु भक्ति का महत्व बताया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई। भजन और आध्यात्मिक प्रवचनों ने समागम को अलौकिक बना दिया।
कार्यक्रम में साध्वी प्रपूर्णा भारती ने श्राद्ध के अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि श्राद्ध शब्द संस्कृत धातु श्रद्धा से उत्पन्न हुआ है। इसका अर्थ है आस्था, विश्वास और समर्पण। श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं बल्कि एक आत्मिक प्रक्रिया है। हम कृतज्ञता के साथ अपने पूर्वजों के प्रति ऋण चुकाने का प्रयास करते हैं। साध्वी ने कहा कि हमारा वर्तमान हमारे पूर्वजों की तपस्या और परिश्रम का फल है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से दान करता है तो उसका और उसके पूर्वजों का भी कल्याण हो जाता है।
विज्ञापन
साध्वी ने कहा कि सतगुरु की कृपा से शिष्य का जीवन सकारात्मकता और दिव्यता से परिपूर्ण हो जाता है। उन्होंने साधकों को गुरु भक्ति के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में सामूहिक ध्यान सत्र ने साधकों को अपने विचारों को सकारात्मकता से परिपूर्ण करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ।
विज्ञापन