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चिकित्सक ने नहीं की पोस्टमार्टम ड्यूटी, कटेगा एक दिन का वेतन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Apr 2017 01:49 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग में पोस्टमार्टम ड्यूटी से कतराने वाले चिकित्सकों की फेहरिस्त खासी लंबी है, लेकिन सख्त चेतावनी के बाद चिकित्सकों को ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. रजत कुमार सीएमओ के सख्त आदेश को दरकिनार कर पोस्टमार्टम ड्यूटी के समय गायब हो जा रहे हैं। सीएमओ ने उनका एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं, साथ ही स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला 29 मार्च का है। उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगी थी, लेकिन उन्होंने खुद को बीमार बताया और ड्यूटी पर नहीं आए। यह पहला मामला नहीं था, बल्कि इससे पहले भी वह ऐसा कई बार कर चुके हैं। ऐसे में विभाग ने इस बार सख्त एक्शन लिया है। डॉ. रजत कुमार उन चिकित्सकों में शुमार हैं जो अक्सर पोस्टमार्टम ड्यूटी से कतराते हैं। जनवरी में उन्होंने खुद को बीमार बताकर ड्यूटी करने से मना कर दिया था। ऐसे में एसीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार को स्वयं रात में एक बजे पोस्टमार्टम करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर डॉ. रजत की बीमारी को लेकर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने पत्र में सीएमओ को अवगत कराया था कि वह अक्सर पीएम ड्यूटी से गायब रहते हैं और खुद को बीमार बताते हैं। लिहाजा डॉ. रजत कुमार की बीमारी को लेकर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों का पैनल बनाया जाए, ताकि उनकी मेडिकल जांच हो सके। उस वक्त स्वास्थ्य विभाग कोई एक्शन लेने की बजाय मामले में लीपापोती करता रहा।
किसी छूट के आधार पर शासकीय काम से बचना घोर लापरवाही व नियमों का पालन न करने की श्रेणी में आते हैं। इस पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। डॉ. रजत कुमार का कार्य भी उसी श्रेणी में आता है, लेकिन विभाग सारे मामले को दबाता चला आया। उधर, डॉ. रजत पुराने ढर्रे पर ही चलते रहे। 29 मार्च को जब उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम के लिए निर्धारित थी, तो ऐसे में उन्होंने अपने आप को बीमार बताकर असमर्थता व्यक्त की। पोस्टमार्टम ड्यूटी लगाने वाले नोडल ऑफिसर डॉ. एसएस चौधरी एसीएमओ ने सीएमओ डॉ. वीपी सिंह को सारे मामले से अवगत कराया। उन्होंने पत्र में सीएमओ से कहा कि डॉ. रजत बीमारी का बहाना बनाकर ड्यूटी से गायब रहते हैं। इस बार सीएमओ डॉ. वीपी सिंह को उनका एक दिन का वेतन काटने और स्पष्टीकरण मांगने पर मजबूर होना पड़ा है। सीएमओ ने स्पष्ट लिखा है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
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मामला 29 मार्च का है। उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगी थी, लेकिन उन्होंने खुद को बीमार बताया और ड्यूटी पर नहीं आए। यह पहला मामला नहीं था, बल्कि इससे पहले भी वह ऐसा कई बार कर चुके हैं। ऐसे में विभाग ने इस बार सख्त एक्शन लिया है। डॉ. रजत कुमार उन चिकित्सकों में शुमार हैं जो अक्सर पोस्टमार्टम ड्यूटी से कतराते हैं। जनवरी में उन्होंने खुद को बीमार बताकर ड्यूटी करने से मना कर दिया था। ऐसे में एसीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार को स्वयं रात में एक बजे पोस्टमार्टम करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर डॉ. रजत की बीमारी को लेकर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने पत्र में सीएमओ को अवगत कराया था कि वह अक्सर पीएम ड्यूटी से गायब रहते हैं और खुद को बीमार बताते हैं। लिहाजा डॉ. रजत कुमार की बीमारी को लेकर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों का पैनल बनाया जाए, ताकि उनकी मेडिकल जांच हो सके। उस वक्त स्वास्थ्य विभाग कोई एक्शन लेने की बजाय मामले में लीपापोती करता रहा।
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किसी छूट के आधार पर शासकीय काम से बचना घोर लापरवाही व नियमों का पालन न करने की श्रेणी में आते हैं। इस पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। डॉ. रजत कुमार का कार्य भी उसी श्रेणी में आता है, लेकिन विभाग सारे मामले को दबाता चला आया। उधर, डॉ. रजत पुराने ढर्रे पर ही चलते रहे। 29 मार्च को जब उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम के लिए निर्धारित थी, तो ऐसे में उन्होंने अपने आप को बीमार बताकर असमर्थता व्यक्त की। पोस्टमार्टम ड्यूटी लगाने वाले नोडल ऑफिसर डॉ. एसएस चौधरी एसीएमओ ने सीएमओ डॉ. वीपी सिंह को सारे मामले से अवगत कराया। उन्होंने पत्र में सीएमओ से कहा कि डॉ. रजत बीमारी का बहाना बनाकर ड्यूटी से गायब रहते हैं। इस बार सीएमओ डॉ. वीपी सिंह को उनका एक दिन का वेतन काटने और स्पष्टीकरण मांगने पर मजबूर होना पड़ा है। सीएमओ ने स्पष्ट लिखा है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
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