मदरसों में फर्जीवाड़े का खुलासा, शिक्षक नकली, फिर भी भुगतान असली
मदरसों में तमाम सख्ती और जांच के बाद भी फर्जीवाड़ा रुक नहीं रहा है। अब दो मदरसों में शिक्षकों के वेतन भुगतान में फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिसमें एक मदरसे में स्नातक शिक्षक को परास्नातक दर्शाकर बढ़ा वेतन ले लिया गया। वहीं एक फर्जी मदरसे के तीन शिक्षकों का वेतन भी विभागीय सांठगांठ से निकाल लिया गया है। इस मामले में मंडलायुक्त के आदेश पर जांच हो रही है, लेकिन अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे रहे हैं।
मदरसा जामिया उम्मुल कुरा खैरनगर में तीन शिक्षक तैनात हैं। इनमें एक शिक्षिका फरहा दीबा की शैक्षिक योग्यता स्नातक है, लेकिन विभागीय सांठगांठ से फराह को परास्नातक दर्शाते हुए आधुनिक मदरसा के तहत छह माह का 72 हजार रुपये वेतन निकाल लिया गया।
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यह मदरसा अस्तित्व में ही नहीं है
वहीं दूसरी तरफ फैज ए आम नंगला साहू की जांच पहले हुई थी, जिसमें यह मदरसा अस्तित्व में ही नहीं है। इस मदरसे के नाम का एक बोर्ड पशुओं के बांधने वाले घेर में लगा रहा है। जांच में मदरसा फर्जी सिद्ध होने के बावजूद भी तीन शिक्षकों मौहममद फैजान, नेत्रपाल और ज्योति के नाम पर छह - छह माह का वेतन 72-72 हजार रुपये निकाल लिया गया। इन दोनों मदरसों ने फर्जीवाड़ा करते हुए सरकार को 2.88 लाख रुपये का चूना लगा दिया।
स्नातक और परास्नातक के वेतन में है 4 हजार का अंतर
मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत स्नातक शिक्षक का वेतन 8 हजार रुपये है। जिसमें राज्य सरकार दो हजार रुपये और केंद्र सरकार छह हजार रुपये देती है। जबकि परास्नातक शिक्षक को 15 हजार रुपये दिया जाता है। जिसमें केंद्र सरकार 12 हजार रुपये और राज्य सरकार 3 हजार रुपये देती है। इन मदरसा संचालकों ने केंद्र द्वारा दिये गये अंशदान को फर्जी तरीके से विभागीय सांठगांठ से निकाल लिया।
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