{"_id":"5740cb6b4f1c1be71fac7bf6","slug":"dig-sameeksha","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीआईजी की समीक्षा में दरोगा का कारनामा उजागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीआईजी की समीक्षा में दरोगा का कारनामा उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 May 2016 02:34 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजियाबाद पुलिस पर हमले के आरोपी सपा नेता को क्लीन चिट देने वाले दरोगा सुरेंद्र सिंह राणा को शनिवार को डीआईजी ने सस्पेंड कर दिया। सपा नेता और उसके साथियों ने पुलिस पर हमला कर हत्या के मामले में नामजद आरोपी को छुड़ा लिया था। दरोगा के कारनामे का खुलासा डीआईजी की समीक्षा में हुआ। साथ ही डीआईजी ने तत्कालीन सीओ सदर देहात के खिलाफ भी जांच बैठा दी है।
गाजियाबाद के लोनी थानाक्षेत्र में पावी गांव में 22 अगस्त-2015 को युवक की गोली मारकर हत्या हुई थी। इसमें गांव का ही खालिद नामजद हुआ था। गाजियाबाद से भागकर आरोपी खालिद पचपेड़ा, भावनपुर इलाके में अपने रिश्तेदार आरिफ चौहान के घर छिपा हुआ था। आरिफ चौहान सपा नेता है।
आरोपी खालिद की सूचना पर गाजियाबाद और भावनपुर पुलिस ने करीब आठ माह पहले पचपेड़ा गांव में आरिफ के घर दबिश दी और खालिद को गिरफ्तार कर लिया। इस पर सपा नेता आरिफ और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर आरोपी खालिद को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर भगा दिया था।
विज्ञापन
इस मामले में गाजियाबाद के दरोगा मनीष चौहान ने भावनपुर थाने में आरिफ, फरमान, टौला और रब्बान को नामजद करते हुये एक दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इस मामले की विवेचना दरोगा सुरेंद्र सिंह राणा को सौंपी गई थी। दरोगा ने इस मामले में नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देते हुये मुकदमे में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी।
डीआईजी की समीक्षा में पकड़ा मामला
डीआईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने अपराध की समीक्षा में यह मामला पकड़ा। पुलिस अफसरों से नामजद आरोपी को क्लीन चिट देकर मुकदमे में एफआर लगाने पर सवाल किया। इस पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर डीआईजी ने शनिवार को विवेचक सुरेंद्र सिंह राणा को तलब किया और तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
सियासी दबाव में लगी एफआर
इस मुकदमे की फाइल लेकर शनिवार दोपहर दरोगा सुरेंद्र सिंह डीआईजी ऑफिस पहुंचे। डीआईजी के पूछने पर दरोगा ने बताया इस मुकदमे में पुलिस अधिकारी और एक सपा नेता का दबाव था। उनके कहने पर ही एफआर लगी। दरोगा ने बताया कि अधिकारियों के आदेश पर ही उन्होंने एफआर लगाई है। डीआईजी ने इस मामले से जुडे़ अधिकारियों की भी जांच करने को कहा है।
तत्कालीन सीओ से मांगा स्पष्टीकरण
इस मुकदमे में एफआर लगाने में तत्कालीन सीओ शिवराज सिंह यादव की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। डीआईजी ने उनसे तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, मामले में एसपी देहात को दोबारा जांच कराने के निर्देश दिये हैं। इस पर उन्होंने सीओ सदर देहात ज्ञानवती तिवारी से जांच करने की बात कही।
विज्ञापन
गाजियाबाद के लोनी थानाक्षेत्र में पावी गांव में 22 अगस्त-2015 को युवक की गोली मारकर हत्या हुई थी। इसमें गांव का ही खालिद नामजद हुआ था। गाजियाबाद से भागकर आरोपी खालिद पचपेड़ा, भावनपुर इलाके में अपने रिश्तेदार आरिफ चौहान के घर छिपा हुआ था। आरिफ चौहान सपा नेता है।
विज्ञापन
आरोपी खालिद की सूचना पर गाजियाबाद और भावनपुर पुलिस ने करीब आठ माह पहले पचपेड़ा गांव में आरिफ के घर दबिश दी और खालिद को गिरफ्तार कर लिया। इस पर सपा नेता आरिफ और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर आरोपी खालिद को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर भगा दिया था।
विज्ञापन
इस मामले में गाजियाबाद के दरोगा मनीष चौहान ने भावनपुर थाने में आरिफ, फरमान, टौला और रब्बान को नामजद करते हुये एक दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इस मामले की विवेचना दरोगा सुरेंद्र सिंह राणा को सौंपी गई थी। दरोगा ने इस मामले में नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देते हुये मुकदमे में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी।
डीआईजी की समीक्षा में पकड़ा मामला
डीआईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने अपराध की समीक्षा में यह मामला पकड़ा। पुलिस अफसरों से नामजद आरोपी को क्लीन चिट देकर मुकदमे में एफआर लगाने पर सवाल किया। इस पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर डीआईजी ने शनिवार को विवेचक सुरेंद्र सिंह राणा को तलब किया और तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
सियासी दबाव में लगी एफआर
इस मुकदमे की फाइल लेकर शनिवार दोपहर दरोगा सुरेंद्र सिंह डीआईजी ऑफिस पहुंचे। डीआईजी के पूछने पर दरोगा ने बताया इस मुकदमे में पुलिस अधिकारी और एक सपा नेता का दबाव था। उनके कहने पर ही एफआर लगी। दरोगा ने बताया कि अधिकारियों के आदेश पर ही उन्होंने एफआर लगाई है। डीआईजी ने इस मामले से जुडे़ अधिकारियों की भी जांच करने को कहा है।
तत्कालीन सीओ से मांगा स्पष्टीकरण
इस मुकदमे में एफआर लगाने में तत्कालीन सीओ शिवराज सिंह यादव की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। डीआईजी ने उनसे तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, मामले में एसपी देहात को दोबारा जांच कराने के निर्देश दिये हैं। इस पर उन्होंने सीओ सदर देहात ज्ञानवती तिवारी से जांच करने की बात कही।