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‘हर-हर गंगे’ जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
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मनोहरपुर गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। बुद्ध पूर्णिमा पर क्षेत्र के अलग-अलग गंगा घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े। हर-हर गंगे के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और फिर घाट पर विराजमान पुरोहितों को दान दक्षिणा देकर धर्मलाभ कमाया। श्रद्धालुओं का गंगा में स्नान करने का सिलसिला सुबह से शाम तक चलता रहा।
सोमवार को वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई। इस दिन गंगा में डुबकी लगाने का अधिक महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष प्राप्ति की होती है। वैशाख में पड़ने वाली पूर्णिमा का अलग महत्व है। जिसे देखते हुए क्षेत्र के भीमकुंड, मखदूमपुर, फतेहपुर प्रेम गंगा घाट पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं का गंगा में स्नान करने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। तारापुर स्थित सागर कुटी के महंत सागर गिरी महाराज ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया। आज के ही दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ और उन्हें बोध ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस दौरान गंगा दर्शन करने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से हस्तिनापुर क्षेत्र में पहुंचते हैं।
सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का प्रतीक
ज्योतिषाचार्य विभोर भारद्वाज ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आत्म-निरीक्षण, अहिंसा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का प्रतीक है। इस दिन बौद्ध धर्म के लोग घर और मंदिरों में भगवान बुद्ध की मूर्ति के सामने अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते हैं।
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सोमवार को वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई। इस दिन गंगा में डुबकी लगाने का अधिक महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष प्राप्ति की होती है। वैशाख में पड़ने वाली पूर्णिमा का अलग महत्व है। जिसे देखते हुए क्षेत्र के भीमकुंड, मखदूमपुर, फतेहपुर प्रेम गंगा घाट पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं का गंगा में स्नान करने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। तारापुर स्थित सागर कुटी के महंत सागर गिरी महाराज ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया। आज के ही दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ और उन्हें बोध ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस दौरान गंगा दर्शन करने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से हस्तिनापुर क्षेत्र में पहुंचते हैं।
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सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का प्रतीक
ज्योतिषाचार्य विभोर भारद्वाज ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आत्म-निरीक्षण, अहिंसा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का प्रतीक है। इस दिन बौद्ध धर्म के लोग घर और मंदिरों में भगवान बुद्ध की मूर्ति के सामने अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते हैं।
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