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भगवान के लिए किया जाने वाला कार्य समर्पण : कथावाचक
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संवाद न्यूज एजेंसी
किठौर। गांव फतेहपुर नारायण में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के रविवार को कथा महिमा का रसपान कराया। कथावाचक महेश कृष्ण शास्त्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तत्वबोध से भरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि इसमें नारद और भक्ति संवाद, सनत कुमार और नारद संवाद व गोकर्ण और धुंधकारी संवाद के माध्यम से इसकी महिमा का विस्तार किया गया है। शास्त्री ने बताया कि पहले संवाद में अर्पण, दूसरे में समर्पण और तीसरे में तर्पण की कथा है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार जो कार्य समाज के लिए किया जाए वह अर्पण है, जो भगवान के लिए किया जाए वह समर्पण है। जो पितरों के लिए किया जाए वह तर्पण कहलाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सत्य का ध्यान करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। यही सत्य भगवान कृष्ण का स्वरूप है। कथा के दौरान शास्त्री ने भागवत मंगलाचरण की चर्चा की, जिसमें भगवान वेदव्यास द्वारा सत्य का ध्यान किया गया है। उन्होंने श्रोताओं को भगवान के 24 अवतारों की कथा से भी परिचित कराया, जिसमें गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के आधार पर भागवत महापुराण की व्याख्या की गई है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु यदि जिज्ञासु बनकर कथा श्रवण करें तो उन्हें बहुत कुछ प्राप्त होगा। इस दौरान पूर्व विधायक सतवीर त्यागी, संदीप, विक्रांत, रामभजन, विनोद, अरुण, अजय, अनुज, रोहित राजेश देवी, रीना, डोली, प्रिंसी, मिस्टी व अन्य भक्त रहे।
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किठौर। गांव फतेहपुर नारायण में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के रविवार को कथा महिमा का रसपान कराया। कथावाचक महेश कृष्ण शास्त्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तत्वबोध से भरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि इसमें नारद और भक्ति संवाद, सनत कुमार और नारद संवाद व गोकर्ण और धुंधकारी संवाद के माध्यम से इसकी महिमा का विस्तार किया गया है। शास्त्री ने बताया कि पहले संवाद में अर्पण, दूसरे में समर्पण और तीसरे में तर्पण की कथा है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार जो कार्य समाज के लिए किया जाए वह अर्पण है, जो भगवान के लिए किया जाए वह समर्पण है। जो पितरों के लिए किया जाए वह तर्पण कहलाता है।
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उन्होंने कहा कि जीवन में सत्य का ध्यान करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। यही सत्य भगवान कृष्ण का स्वरूप है। कथा के दौरान शास्त्री ने भागवत मंगलाचरण की चर्चा की, जिसमें भगवान वेदव्यास द्वारा सत्य का ध्यान किया गया है। उन्होंने श्रोताओं को भगवान के 24 अवतारों की कथा से भी परिचित कराया, जिसमें गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के आधार पर भागवत महापुराण की व्याख्या की गई है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु यदि जिज्ञासु बनकर कथा श्रवण करें तो उन्हें बहुत कुछ प्राप्त होगा। इस दौरान पूर्व विधायक सतवीर त्यागी, संदीप, विक्रांत, रामभजन, विनोद, अरुण, अजय, अनुज, रोहित राजेश देवी, रीना, डोली, प्रिंसी, मिस्टी व अन्य भक्त रहे।
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