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सावधान! स्कीमर डिवाइस के जरिए डेबिट कार्ड का क्लोन बनाकर निकाली जा रही बैंक खातों से रकम

Fri, 02 Nov 2018 05:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Updated Fri, 02 Nov 2018 05:08 AM IST
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Debit card data theft with the help of Schemer device in shamli
atm - फोटो : फाइल फोटो

एटीएम से नकदी निकाल रहे हो तो जरा सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा ना हो कि कोई आपके डेबिट कार्ड का क्लोन बनाकर आपका बैंक बैलेंस खाली कर दे। शामली में इस तरह की ठगी के मामले साइबर सेल में लगातार सामने आ रहे हैं।   

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सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है। लोग भी ऑलाइन पेमेंट और शापिंग की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इनके बढ़ते चलन से ठगी के मामले भी सामने आने लगे हैं, जिससे साइबर क्राइम बढ़ रहा है। साइबर ठग आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा। शामली पुलिस कार्यालय के साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह के अनुसार एटीएम मशीन के इंसर्ट केबिन में स्कीमर डिवाइस की मदद से डेबिट कार्ड का डेटा चोरी कर क्लोन की मदद से डुप्लीकेट कार्ड तैयार कर ये ठगी की जा रही है।  
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केस : एक 
शामली निवासी इरशाद ने कुछ दिन पहले ही दिल्ली के रोहिणी इलाके के एक एटीएम से नकदी निकाली थी। तीन चार दिन बाद ही उसके बैंक एकाउंट से 79 हजार रुपये निकाल लिए गए। साइबर सेल की जांच में पता चला कि उस एटीएम में स्कीमर डिवाइस लगाकर डेबिट कार्ड का डेटा चुराया गया और क्लोन बना लिया गया था। एटीएम कीबोर्ड के ऊपर अस्थायी हिडेन कैमरे से पिन नंबर का पता लगा लिया गया था। इसमें कुछ रकम दिल्ली के एक एटीएम से निकाली गई, जबकि कुछ रकम का का़र्ड से शॉपिंग पेमेंट किया गया। 
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केस : दो 
इसी तरह कुड़ाना गांव के इंद्रसैन के एकाउंट से करीब 30 हजार की नकद राशि दिल्ली में एटीएम से निकाली गई और शॉपिंग पेमेंट किया गया।  हैरानी की बात थी कि जिस दिन ये रकम निकली उस दिन वह जयपुर में थे। साइबर सेल की जांच में पता चला कि इंदसैन ने भी दिल्ली के एटीएम से कुछ दिन पूर्व नकदी निकाली थी। इसके कुछ ही दिन बाद उनके एकाउंट से रकम निकाल ली गई। इस केस में भी स्कीमर डिवाइस और हिडेन कैमरे का इस्तेमाल किया गया।  

क्या है स्कीमर डिवाइस? 
ये प्लास्टिक के एक बॉक्स जैसा है। एटीएम मशीन के कार्ड इंसर्ट स्लॉट के ऊपर इसे अस्थायी रूप से इस तरह फिट किया जाता है कि यह देखने में स्लॉट ही नजर आता है। इसमें डेबिट कार्ड लगाते ही पूरा डेटा रीड कर लिया जाता है। मौका देखकर साइबर जालसाज इसे हटा लेते हैं और इसमें फीड डेटा को कापी कर डेबिट कार्ड के क्लोन तैयार कर लेते हैं। 

गुप्त कैमरे से लेते हैं पिन कोड  
एटीएम केबिन में ही एक अस्थायी कैमरा इस तरह लगाया जाता है, जिसका फोकस एटीएम में लगे कीपैड पर होता है। जब आप डेबिट कार्ड का पिन नंबर दबाते हैं तो कैमरे के माध्यम से यह रिकॉर्ड हो जाता है कि कौन-कौन से नंबर वाले बटन दबाए गए हैं। साइबर सेल के अनुसार ये काम दिल्ली में अधिक हो रहा है।  


ये रखें सावधानी 
ऐसे एटीएम से नगदी निकालें, जहां गार्ड हो। 
सुनसान इलाकों में लगाए गए एटीएम से बचें। 
पहले एटीएम इंसर्ट स्लाट को खींचकर देखें।
जांचें, किसी कैमरे का रुख कीपैड पर नहीं हो। 
कीपैड को दूसरे हाथ से कवर करके ही दबाएं।  
अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड किसी को न दें। 
पहचान के लिए कार्ड के पीछे अपने साइन करें।
खाते से लिंक मोबाइल के संदेशों पर सतर्क रहें।
कार्ड या खाते की जानकारी किसी को नहीं दें।
बैंक फोन पर कार्ड नंबर या पिन नहीं पूछता है।

साइबर क्राइम से बचने के लिए सावधानी जरूरी है। इस तरह की ठगी केवल थोड़ी सी लापरवाही से होती है। डेबिट या क्रेडिट कार्ड यूज करते वक्त कुछ सावधानियां रखी जाएं तो इस तरह की ठगी से बचा जा सकता है। वहीं, इरशाद के मामले में करीब 23 हजार रुपये वापस करा दिए गए हैं। इसके अलावा इंद्रसैन के मामले की जांच की जा रही है। 
-कर्मवीर सिंह, प्रभारी साइबर सेल।

 

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