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Meerut News: पूर्व विधायक व पूर्व चेयरमैन बाबू बशीर का इंतकाल
Mon, 26 Feb 2024 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 26 Feb 2024 12:50 AM IST
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कैराना में बाबू बशीर अहमद का फाइल फोटो-परिजन
कैराना (शामली)। पूर्व विधायक और छह बार नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके बाबू बशीर अहमद (92) का शनिवार की देर रात पानीपत के अस्पताल में बीमारी के चलते इंतकाल हो गया। उनके आवास पर सपा विधायक नाहिद हसन एवं नगर के हजारों लोग संवेदना व्यक्त करने पहुंचे तथा जनाजे में शामिल हुए। जनाजे की नमाज अदा कराने के बाद खुरगान रोड स्थित उनके पैतृक कब्रिस्तान में शव को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
बाबू बशीर अहमद को दो सप्ताह पूर्व निमोनिया होने पर पानीपत के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनको हार्ट अटैक भी आ गया था। शनिवार रात अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार सुबह करीब साढे 10 बजे उनके आवास से चले जनाजे में सपा विधायक नाहिद हसन, नगर पालिका चेयरमैन शमशाद अहमद, भाजपा नेता अनिल चैहान, अनुज चौहान, पूर्व चेयरमैन राशिद अली, हाजी अनवर हसन, साजिद अली, नसीम अहमद शामिल हुए। उनके जनाजे की नमाज प्राचीन ईदगाह परिसर में जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना ताहिर ने अदा काराई।
सन 1977 में जनता पार्टी से बने थे विधायक
कैराना। आजादी के बाद सन 1977 में जनता दल व भाजपा पार्टी का गठबंधन हुआ था। जिसमें जनता दल की ओर से कैराना विधानसभा से बाबू बशीर अहमद चुनाव लड़े थे। उनके सामने स्व. हुकुम सिंह कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े थे। बाबू बशीर अहमद करीब तीन हजार वोटों से चुनाव जीत गए थे। जो 1980 तक विधायक रहे। पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह एवं अख्तर हसन के साथ करीब चार बार बाबू बशीर अहमद का चुनावी मुकाबला हुआ।
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35 साल तक रहे पालिका अध्यक्ष
कैराना। बाबू बशीर अहमद सन 1964 से 2000 तक छह बार पालिका अध्यक्ष रहे। बताया गया कि कई बार उनका कार्यकाल पूरा नहीं हो सका। वे करीब 35 साल तक पालिका अध्यक्ष के पद पर रहे। आज भी उनके कार्यकाल के द्वारा किए गए विकास कार्यों की सराहना होती है।
17 साल तक पिता रहे ब्लॉक प्रमुख
कैराना । अपने जमाने के दिग्गज नेता रहे बाबू बशीर अहमद के पिता चौधरी मोहम्मद सादीन सन 1963 से 1979 तक कैराना ब्लॉक के प्रमुख रहे। पिता से ही बाबू बशीर अहमद को राजनीति की प्रेरणा मिली तथा वह भी अपने पिता की तरह राजनीति में सक्रिय रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ खाया था खाना
कैराना। 1988 में छड़ियान के मैदान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सभा को संबोधित किया था। जिसके बाद वें सीधे बाबू बशीर अहमद के आवास पर पहुंचे थे। उस समय नवरात्र के व्रत होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी ने बाबू बशीर अहमद के पास बैठ कर व्रत को भोजन ग्रहण किया था। इस दौरान राजनीति को लेकर दोनों के बीच काफी चर्चाएं हुई थी।
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बाबू बशीर अहमद को दो सप्ताह पूर्व निमोनिया होने पर पानीपत के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनको हार्ट अटैक भी आ गया था। शनिवार रात अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार सुबह करीब साढे 10 बजे उनके आवास से चले जनाजे में सपा विधायक नाहिद हसन, नगर पालिका चेयरमैन शमशाद अहमद, भाजपा नेता अनिल चैहान, अनुज चौहान, पूर्व चेयरमैन राशिद अली, हाजी अनवर हसन, साजिद अली, नसीम अहमद शामिल हुए। उनके जनाजे की नमाज प्राचीन ईदगाह परिसर में जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना ताहिर ने अदा काराई।
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सन 1977 में जनता पार्टी से बने थे विधायक
कैराना। आजादी के बाद सन 1977 में जनता दल व भाजपा पार्टी का गठबंधन हुआ था। जिसमें जनता दल की ओर से कैराना विधानसभा से बाबू बशीर अहमद चुनाव लड़े थे। उनके सामने स्व. हुकुम सिंह कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े थे। बाबू बशीर अहमद करीब तीन हजार वोटों से चुनाव जीत गए थे। जो 1980 तक विधायक रहे। पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह एवं अख्तर हसन के साथ करीब चार बार बाबू बशीर अहमद का चुनावी मुकाबला हुआ।
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35 साल तक रहे पालिका अध्यक्ष
कैराना। बाबू बशीर अहमद सन 1964 से 2000 तक छह बार पालिका अध्यक्ष रहे। बताया गया कि कई बार उनका कार्यकाल पूरा नहीं हो सका। वे करीब 35 साल तक पालिका अध्यक्ष के पद पर रहे। आज भी उनके कार्यकाल के द्वारा किए गए विकास कार्यों की सराहना होती है।
17 साल तक पिता रहे ब्लॉक प्रमुख
कैराना । अपने जमाने के दिग्गज नेता रहे बाबू बशीर अहमद के पिता चौधरी मोहम्मद सादीन सन 1963 से 1979 तक कैराना ब्लॉक के प्रमुख रहे। पिता से ही बाबू बशीर अहमद को राजनीति की प्रेरणा मिली तथा वह भी अपने पिता की तरह राजनीति में सक्रिय रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ खाया था खाना
कैराना। 1988 में छड़ियान के मैदान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सभा को संबोधित किया था। जिसके बाद वें सीधे बाबू बशीर अहमद के आवास पर पहुंचे थे। उस समय नवरात्र के व्रत होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी ने बाबू बशीर अहमद के पास बैठ कर व्रत को भोजन ग्रहण किया था। इस दौरान राजनीति को लेकर दोनों के बीच काफी चर्चाएं हुई थी।