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बिजनौर: आपसी संघर्ष में हाथी की मौत, वन विभाग के अधिकारियों में मचा हड़कंप

Fri, 24 May 2019 11:38 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 24 May 2019 11:38 PM IST
Death of elephant in Bijnor, dead body found in Kalagarh
कार्बेट टागर रिजर्व की कालागढ़ रेंज में गौजपानी के निकट मृत पड़ा हाथी - फोटो : अमर उजाला

बिजनौर में कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज में हाथी का शव मिला। विभाग के अधिकारियों का दावा है आपसी संघर्ष में हाथी की जान गई है। दूसरे हाथी की निगरानी शुरू कर दी गई है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल के अनुसार हाथी के दांत और अंग सुरक्षित पाए गए हैं। 



कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज के धारा ब्लॉक के कक्ष संख्या 16 में एक नर हाथी का शव मिलने पर वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। गश्ती दलों की सूचना पर अधिकारी और चिकित्सक मौके पर पहुंचे। उपनिदेशक ने मौके पर पहुंच कर जानकारी ली। कालागढ़ के उपप्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी, कालागढ़ के वनक्षेत्राधिकारी आरके भट्ट गश्ती दलों के साथ मौके पर पहुंचे। 

कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल ने बताया कि हाथी की आयु लगभग 55-60 वर्ष के बीच है। उसके शरीर पर दूसरे हाथी द्वारा किए गए हमले के निशान मिले हैं। जब हाथियों में आपसी संघर्ष होता है, तो दोनों एक दूसरे को जान से मार देने का प्रयास करते हैं। ऐसे में एक दूसरे के शरीर में दांत घुसा देते हैं। जिससे वह घायल हो जाता है। ऐसा ही इस हाथी के साथ हुआ है। इसके दांत व अंग सुरक्षित हैं। उपनिदेशक की उपस्थिति में हल्द्वानी के चिकित्सक डॉ. विमल कुमार ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। अत्यधिक रक्तस्राव और अधिक आयु होने के कारण वह तंदरुस्त हाथी का सामना नहीं कर सका। हाथी का शव लगभग एक दिन पुराना है।

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दूसरे हाथी की निगरानी के लिए बनाईं तीन टीम
कालागढ़ के उपप्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि संघर्ष में दूसरा हाथी भी घायल हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है। हाथी की तलाश और निगरानी के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है। कालागढ़ के वनक्षेत्राधिकारी से एक दो दिनों में दूसरे हाथी की रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह इलाका घने कोर जोन के बीच है। यहां वन्यजीवों का विचरण और प्रवास सबसे अधिक है। यहां आम आदमी के आने जाने पर रोक है। यह नो मैंस लैंड है। दूसरा हाथी अन्य हाथियों को भी निशाना बना सकता है या फिर उसकी सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में हाथी का पता लगाया जाना जरूरी है। 

आरके तिवारी का कहना है कि वनों में वन्यजीवों में मादा को लेकर अक्सर आपसी संघर्ष के मामले हो जाते हैं। इस संघर्ष का फैसला दूसरे की जान जाने पर ही हो पाता है।

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