अमर उजाला फेसबुक लाइव: डॉटर्स डे पर बेटियों ने साझा की सफलता की कहानी, पढ़कर होगा गर्व
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जिंदगी में रुकना मना है। मंजिल को पाना है तो चलते रहना होगा। बेटियों को उड़ने के लिए अब खुला आसमान मिलने लगा है। नन्हे पंखों से आज वह राफेल सी ऊंची उड़ान भर रही हैं। बेटियों की सफलता की कहानी कर्तव्य पथ पर अडिग रहकर रची गई है। इन्होंने अपने को हर कदम पर साबित किया है।
इंटरनेशनल डॉटर्स डे पर बेटियों ने अपने सपने और सफलता की दास्तां को देश के साथ साझा किया। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत शहर की सफल बेटियों को अपने मन की बात कहने का एक मंच दिया गया। अमर उजाला के फेसबुक लाइव में हुए संवाद में बेटियों ने अपने विचारों को समाज संग साझा किया, साथ ही कामयाबी के वो मंत्र बताए, जिन पर चलकर वे आगे बढ़ीं।
लाइव संवाद में हिस्सा बनीं बॉलीवुड अभिनेत्री भानी सिंह, भारत सरकार के स्त्री शक्ति चैंलेज पुरस्कार विजेता शिवि कपिल, एंटरप्रेन्योर अक्षिता श्रीवास्तव, पीसीएस परीक्षा 2018 में चयनित संजू कुमारी और पर्यावरणविद् दमनदीप कौर।
गुुनाह नहीं सपने देखना : भानी सिंह, बॉलीवुड अभिनेत्री
सपने देखना कोई गुनाह नहीं है। आप जो भी सपना देखें उसे पूरा करने की हिम्मत रखें। धीरे-धीरे बढ़ेंगी तो भी सफलता मिलेगी। सपनों को पूरा करने की यात्रा का पूरा मजा लीजिए। कोई व्यक्ति आपको निर्देशित कर सकता है, मेहनत नहीं कर सकता। मुझे खुद यहां तक पहुंचने में बहुत डर लगा, निर्णय लेने में घबराई। अभिनेत्री से पहले शिक्षिका बनी। कई ऑडिशन में बाहर कर दिया गया। कुछ नहीं हो रहा था तो जॉब छोड़ दी। मम्मी-पापा ने कहा काम नहीं कर रही हो तो शादी कर लो। तनाव भी आया। लेकिन खुद को उस तनाव से निकाला और आगे बढ़ी।
सफलता का मंत्र : वो करें जो मन करें। लक्ष्य पाने के लिए मेहनत करें। खुद पर भरोसा रखें। आप ही स्वयं को बना सकते हैं, कोई क्षेत्र खराब नहीं होता।
कभी हारना नहीं है : शिवी कपिल, स्त्री शक्ति चैलेंज विजेता
बेटियों को सामाजिक संघर्ष के साथ दिमागी रूप से भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन यह पक्का इरादा बना लें, कि कभी हारना नहीं हैं। क्योंकि हर रात के बाद सुबह होती है। हर आने वाला कल नई उम्मीदें, अवसर लेकर आता है। मैं इंजीनियरिंग की छात्रा रही, उसके बाद डिजायनिंग में मास्टर्स किया। मैं डॉक्टर नहीं हूं, लेकिन हेल्थ डिवाइस बनाती हूं। डॉक्टर्स को समझना आसान नहीं था, लेकिन हर दिन सीखती रही। अपनी हर हार को मैंने अपनी सफलता माना।
सफलता का मंत्र : कभी हार मत मानो। हमेशा चलते रहना चाहिए। जो इंसान यह समझ लेता है उसे कोई रोक नहीं सकता। अपनी पीछे की पीढ़ी, आने वाली पीढ़ी दोनों पर समाज को सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी है।
हर बेटी के जीवन में चुनौतियां : संजू कुमारी पीसीएस 2018 में चयनित
मेरे नहीं, बल्कि हर बेटी के जीवन में चुनौतियां आती हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि में विशेषकर बचपन से ही बता दिया जाता है कि आप स्वयं के लिए नहीं, दूसरों को खुश रखने के लिए बनी हैं। हमें यह अवसर नहीं दिया जाता कि खुद के बारे में भी सोच सकें। यहीं से अस्तित्व की लड़ाई शुरू होती है। मुझसे भी कुछ और करने को कहा, जबकि मैं अपने सपने खुद देखना, पूरा करना चाहती थी। मुझे लगा कि जो मेरा ख्वाब है वो गलत नहीं है तो मैं पीछे नहीं हटूंगी। इसलिए मुझे यहां तक पहुंचने में लंबा समय लगा।
सफलता का मंत्र : सपने देखें तो मेहनत भी करें। खुद सफल होकर दूसरों के लिए सफलता के रास्ते बनाएं। अपने बारे में जरूर सोचें।
लड़कियों को हमेशा जज किया जाता है : अक्षिता श्रीवास्तव एंटरप्रेन्योर
मैं अपने माता-पिता की अकेली संतान हूं। अक्सर लोग पिता से कहते थे कि बेटा नहीं है आपका कारोबार कौन संभालेगा। इसलिए मैंने बीफार्मा, एमफार्मा किया। माता-पिता हमेशा कहते हैं कि लोग क्या कहेंगे, इस पर ध्यान मत देना। शिक्षित होना और सभ्य होना दोनों में अंतर है। लड़कियों को आज भी जज किया जाता है।
सफलता का मंत्र : मत सोचो कि लोग क्या कहेंगे। आज तकनीकी, स्मार्ट फोन आगे बढ़ने के हजारों मौके दे रहा है। आत्मनिर्भर बनने के लिए इनका लाभ लें।
कचरे का करें सही प्रबंधन : दमनदीप कौर, पर्यावरणविद्
मैंने अपना जीवन पर्यावरण के नाम कर दिया है। इसलिए मैं सभी बेटियों को कचरे के सही प्रबंधन का संदेश देना चाहूंगी। अपनी रसोई व घर से निकले कचरे को तीन अलग डस्टबिन में डालें। हमारे घरों से निकलने वाले कचरे से लीचट नामक पदार्थ निकलकर भूगर्भ को प्रदूषित करता है। इस कचरे से विषैली गैसें निकलतीं हैं जो प्रदूषण फैलाती हैं। अपने यहां तीन डस्टबिन रखें और घर से ही कचरे का सही प्रबंधन कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। ईवेस्ट, किचन वेस्ट और अन्य कचरे को अलग अलग जगह रखें, ताकि इसका सही प्रबंधन हो सके।
सफलता का मंत्र : अपने सपनों को देखें, उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत भी करें। समाज, परिवार के साथ अपने लिए भी सोचें। रुकें नहीं और बढ़ते रहें।
पाठकों ने दीं शुभकामनाएं
संवाद के सजीव प्रसारण पर सुधि पाठकों और दर्शकों ने बेटियों के लिए शुभकामनाओं का गुलदस्ता सजा दिया। सभी बेटियों का उत्साह बढ़ाया। गौरी गोयल, शैफाली, अशोक श्रीवास्तव, सीमा अदलखा, रेनू शर्मा, डॉ. लता कुमार, रेनू, रीना शर्मा, सरिता जैन, माला सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
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