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दशलक्षण पर्व : दान के हैं चार प्रकार औषधि, अभय, शास्त्र और आहार

Mon, 31 Aug 2020 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 31 Aug 2020 12:45 AM IST
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dashlakshan parv: there are four types of  renounce medicine,  daunt lesness,  ethology and  food
जंबूद्वीप में दशलक्षण पर्व में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : MAWANA
दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन हस्तिनापुर के जंबूद्वीप पर उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। इसमें गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने बताया कि त्याग करने वाला मनुष्य निश्चिंत रहता है। त्याग से शांति मिलती है। इसलिए जीवन में त्याग धर्म को अपनाना चाहिए।
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जंबूद्वीप स्थित आचार्य शांति सागर प्रवचन हॉल में बने विशाल मंडल पर इंद्रों द्वारा 80 अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रात:काल भगवान के अभिषेक के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भगवान के मस्तक पर जल, दूध, दही, घी आदि से अभिषेक किया गया।
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भगवान से विश्व में शांति की कामना करते हुए महाशांतिधारा संपन्न की गई। संपूर्ण कार्यक्रम विधि-विधान पूर्वक वरिष्ठ प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन, पं. प्रवीण चंद जैन द्वारा संपन्न कराया गया। वहीं गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने कहा कि त्याग अर्थात दान करना। दान चार प्रकार का होता है औषधि, अभय, शास्त्र और आहार त्याग। पशु त्याग नहीं कर सकता है, क्योंकि मनुष्य योनि में ही त्याग धर्म का पालन किया जा सकता है।

शास्त्रों में आचार्यों ने कहा है कि त्याग की सदैव पूजा होती है। कहा जाता है कि दिगंबर मुद्रा देख लो त्याग करना सीख लो। संपूर्ण आरंभ एवं परिग्रह के त्यागी मुनिराज होते हैं। एक देशरूप मनुष्य त्याग करते हैै। इसलिए कहा जाता है कि जीवन में त्याग धर्म को अवश्य अपनाना चाहिए।

पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत मध्याह्न में माता सरस्वती एवं माता लक्ष्मी की महापूजा संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा संपन्न की गई। तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का वाचन प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता जी द्वारा किया गया। सायंकाल सत्र में पीठाधीश स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने उत्तम त्याग धर्म की व्याख्या की। सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतियोगिता एवं प्रश्न मंच की प्रस्तुति जंबूद्वीप परिवार के बच्चों द्वारा की गई।

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