Meerut: बेटे के ड्रग तस्करी में पकड़े जाने का डर दिखाकर मां को किया डिजिटल अरेस्ट, 30 लाख की ठगी की कोशिश
मेरठ में साइबर ठगों ने बेटे को ड्रग तस्करी में पकड़े जाने का डर दिखाकर 64 वर्षीय महिला को डिजिटल अरेस्ट किया। पुलिस की सतर्कता से 30 लाख रुपये समय रहते फ्रीज करा लिए गए।
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मेरठ में साइबर ठगों ने अब एक बुजुर्ग मां की ममता को निशाना बनाया। ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के आराध्या हाइट्स की रहने वाली 64 वर्षीय सुदेश देवी को ठगों ने तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट किया। जालसाजों ने झूठ बोला कि बैंगलूरू में आईटी कंपनी में काम करने वाला उनका बेटा ड्रग तस्करी में पकड़ा गया है।
बेटे को बचाने की खातिर मां ने जमा पूंजी के 30 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में डाल दिए। हालांकि समय रहते बेटे से महिला की बात हो गई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत रकम को फ्रीज करा दिया। इससे महिला की जीवनभर की कमाई बच गई।
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सुदेश देवी जैसे ही बैंक से पैसे भेजकर बाहर निकलीं संयोग से उसी वक्त उनके बेटे का फोन आ गया। मां ने रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई। बेटे ने हैरान होकर कहा कि वह बिल्कुल सुरक्षित है और अपने ऑफिस में है। ठगी का अहसास होते ही सुदेश देवी ने बिना वक्त गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया। कॉल तुरंत ब्रह्मपुरी थाने ट्रांसफर हुई। ब्रह्मपुरी एसओ राजेश कांबोज और साइबर एक्सपर्ट की टीम ने गजब की फुर्ती दिखाई। पुलिस टीम तुरंत बैंक पहुंची और ट्रांजेक्शन को प्रोसेस होने से पहले ही रुकवाकर पूरी रकम फ्रीज करा दी।
एसपी सिटी ने बताया कि पुलिस की सतर्कता से पीड़िता का पैसा ठगने से बच गया है और जल्द ही उन्हें वापस मिल जाएगा। उधर खबर मिलते ही बेटा भी फ्लाइट से मेरठ के लिए रवाना हो गया है।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट में ठग पुलिस, सीबीआई , ईडी या नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। ठग वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में या थाने जैसे दिखने वाले सेटअप में बैठते हैं। डराते हैं कि उनका या उनके बच्चे का नाम गंभीर अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या मानव तस्करी में आया है। वे पीड़ित को आदेश देते हैं कि जब तक जांच चल रही है वे कैमरा बंद नहीं कर सकते, किसी से बात नहीं कर सकते और घर से बाहर नहीं जा सकते।
सावधानियां और बचाव के तरीके
-कोई भी असली जांच एजेंसी (पुलिस/सीबीआई) कभी भी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून है।
-अगर अधिकारी बनकर पैसों की मांग करे या पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो समझ जाएं कि यह फ्रॉड है।
-अगर ठग कहें कि आपका बेटा/बेटी या परिजन मुसीबत में हैं तो घबराने के बजाय फोन काटें और सीधे बच्चे या उनके दोस्तों को कॉल करें।
-अनजान कॉलर को अपना आधार नंबर, बैंक डिटेल्स या ओटीपी बिल्कुल न दें।
-ऐसी घटना हो तो 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।