शुरू हुए कोल्हू: बनने लगा नया गुड़, देश के कोने कोने तक महकती है बिजनौर के गुड़ की खुशबू
मंडी में नए गुड़ की आवक शुरू
- चांदपुर गुड़ मंडी से देश के कोने-कोने में जाता है गुड़
विस्तार
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की कृषि उत्पादन मंडी में नए गुड़ की आवक शुरू हो गई है। गुड़ के नए सीजन के पहले दिन मंडी में दो नगों में किसानों के करीब 60 क्विंटल गुड़ की आवक रही। मंडी परिसर गुड़ की खुशबू से महक गया। चांदपुर मंडी कभी खांडसारी मंडी के नाम से जानी जाती थी, लेकिन आज गुड़ मंडी के नाम से पहचान बनाए हुए है।
मंडी में करीब 25 गुड़ आढ़ती हैं। मंडी में आने वाले गुड़ को आढ़ती देश के अन्य राज्यों में भेजते हैं। चांदपुर गुड़ मंडी से सीजन में प्रतिदिन 20 से 25 ट्रक गुड़ के लोड होकर देश के अन्य राज्यों में जाते हैं। क्षेत्र गांव बास्टा, सिंघा, अम्हेड़ा, पैजनिया आदि गांव में बड़ी तादाद में पावर कोल्हुओं का संचालन होता है, जिसमें गुड़ लड्डू बनाया जाता है, जो कि चांदपुर गुड़ मंडी में आता है। पांच दिन पूर्व गुड़ व्यापारियों ने नए गुड़ सीजन की शुरूआत के लिए मंडी परिसर में यज्ञ किया था। शुक्रवार को गुड़ सीजन के पहले दिन मंडी में नए गुड़ के दो नग आए।
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शुरू हुए कोल्हू, बनने लगा नया गुड़
पहाड़ी क्षेत्रों में गुड़ की मांग के चलते गन्ना कोल्हुओं का संचालन शुरू हो गया है। वर्तमान में दो कोल्हू संचालित हो चुके हैं, जिनपर 260 से 280 रुपये क्विंटल गन्ना खरीदा जा रहा है। पंद्रह दिन के अंदर सभी कोल्हुओं का संचालन शुरू हो जाएगा।
गांव कादराबाद, चौहड़वाला, भिक्कावाला, मीरापुर, रसूलपुर, रसूलाबाद, चकफेरी, नबाबपुरा तथा धारा व केहरीपुर आदि में करीब 48 गन्ना कोल्हू संचालित होते हैं। सितंबर माह के अंत या अक्टूबर माह के प्रारंभ में क्षेत्र के कोल्हू शुरू हो जाते हैं और गुड़ बनना शुरू हो जाता है। किसान मिल न चल पाने के कारण पैसों के लिए कोल्हुओं पर गन्ना आपूर्ति कर देते हैं।
कोल्हू संचालकों का कहना है कि इस समय गन्ने में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण एक क्विंटल गन्ने में सात से आठ किलो ही गुड़ बन रहा है। बाद में गुड़ की रिकबरी 11 से 13 किलो प्रति क्विंटल तक होती है। इस समय उन्हें चीनी की लाग लगाकर गुड़ बनाना पड़ रहा है। मंडी में गुड़ का भाव 42-43 रुपये किलो मिल रहा है। इन कोल्हुओं से गुड़ हल्द्वानी, काशीपुर तथा रामनगर की मंडियों में सप्लाई होता है। पहाड़ों पर नए गुड़ की अधिक मांग होने के चलते गुड़ वहां बेचा जाता है।