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संकट बरकार...मेडिकल में रेडियोथैरेपी के लिए अभी और इंतजार
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संकट बरकार...मेडिकल में रेडियोथैरेपी के लिए अभी और इंतजार
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में सात साल बाद शुरू हुई कैंसर के मरीजों की रेडियोथैरेपी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोबारा शुरू होने के बाद भी साढ़े तीन माह हो गए हैं, लेकिन नए मरीजों की रेडियोथैरेपी अभी भी अटकी हुई है।
मेडिकल कॉलेज में सात मई 2015 से मेडिकल में रेडियोथैरेपी नहीं हो रही थी। रेडियोएक्टिव सोर्स कोबाल्ट 60 की मदद से रेडियोथैरेपी होती है, जिसकी क्षमता क्षीण हो गई थी। तभी से हर साल कैंसर के 500 से अधिक लोगों को अलीगढ़ और जीटीबी रेफर किया जा रहा था। कोबाल्ट 60 आने के बाद 19 मई 2022 को रेडियोथैरेपी शुरू की गई। हालांकि इसका विधिवत दोबारा शुभारंभ 22 मई को कमिश्नर और जिलाधिकारी ने किया था। विकिरण अधिकारी डॉ. एके तिवारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के निर्देशानुसार जब तक कोई विकिरण अधिकारी नहीं आएगा, यह सुविधा नए मरीजों के लिए शुरू नहीं हो पाएगी। इसके बाद 15 जुलाई को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नए विकिरण अधिकारी की नियुक्ति कर दी और रेडियोथैरेपी चालू करने के निर्देश दिए। 30 जुलाई तक तो नए विकिरण अधिकारी ने ज्वाइन ही नहीं किया और इसके बाद से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से विकिरण अधिकारी के तौर पर रेडियोथैरेपी शुरू करने की उन्हें अनुमति नहीं मिल पा रही है।
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि न विकिरण अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई थी, लेकिन उन्होंने अभी उस संस्थान से इस्तीफा नहीं दिया है जहां वह सेवाएं देते हैं। इस कारण परमाणु नियामक बोर्ड से अभी अनुमति नहीं मिली है। नए मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी शुरू होने में अभी दिक्कत है। अनुमति के लिए परमाणु नियामक बोर्ड को पत्र लिखा गया है।
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मेडिकल में एक माह में लगते हैं 700 रुपये
मेडिकल में एक दिन की सिकाई के 35 रुपये लगते हैं। एक माह में सामान्यत: 20 दिन सिकाई होती हैं और सप्ताह में पांच दिन। इस तरह एक माह का खर्च 700 रुपये आता है। इतनी सिकाई के निजी अस्पताल एक से डेढ़ लाख रुपये तक लेते हैं।
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में सात साल बाद शुरू हुई कैंसर के मरीजों की रेडियोथैरेपी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोबारा शुरू होने के बाद भी साढ़े तीन माह हो गए हैं, लेकिन नए मरीजों की रेडियोथैरेपी अभी भी अटकी हुई है।
मेडिकल कॉलेज में सात मई 2015 से मेडिकल में रेडियोथैरेपी नहीं हो रही थी। रेडियोएक्टिव सोर्स कोबाल्ट 60 की मदद से रेडियोथैरेपी होती है, जिसकी क्षमता क्षीण हो गई थी। तभी से हर साल कैंसर के 500 से अधिक लोगों को अलीगढ़ और जीटीबी रेफर किया जा रहा था। कोबाल्ट 60 आने के बाद 19 मई 2022 को रेडियोथैरेपी शुरू की गई। हालांकि इसका विधिवत दोबारा शुभारंभ 22 मई को कमिश्नर और जिलाधिकारी ने किया था। विकिरण अधिकारी डॉ. एके तिवारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के निर्देशानुसार जब तक कोई विकिरण अधिकारी नहीं आएगा, यह सुविधा नए मरीजों के लिए शुरू नहीं हो पाएगी। इसके बाद 15 जुलाई को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नए विकिरण अधिकारी की नियुक्ति कर दी और रेडियोथैरेपी चालू करने के निर्देश दिए। 30 जुलाई तक तो नए विकिरण अधिकारी ने ज्वाइन ही नहीं किया और इसके बाद से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से विकिरण अधिकारी के तौर पर रेडियोथैरेपी शुरू करने की उन्हें अनुमति नहीं मिल पा रही है।
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प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि न विकिरण अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई थी, लेकिन उन्होंने अभी उस संस्थान से इस्तीफा नहीं दिया है जहां वह सेवाएं देते हैं। इस कारण परमाणु नियामक बोर्ड से अभी अनुमति नहीं मिली है। नए मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी शुरू होने में अभी दिक्कत है। अनुमति के लिए परमाणु नियामक बोर्ड को पत्र लिखा गया है।
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मेडिकल में एक माह में लगते हैं 700 रुपये
मेडिकल में एक दिन की सिकाई के 35 रुपये लगते हैं। एक माह में सामान्यत: 20 दिन सिकाई होती हैं और सप्ताह में पांच दिन। इस तरह एक माह का खर्च 700 रुपये आता है। इतनी सिकाई के निजी अस्पताल एक से डेढ़ लाख रुपये तक लेते हैं।