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अधिकारियों की खराब मंशा का शिकार शहर का विकास
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अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर के विकास पर संकट
मेरठ। नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर के विकास पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 13वें वित्त के खजाने से होने वाले विकास कार्य पर खर्च करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है, लेकिन अभी तक निगम प्रशासन टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं कर पाया है। अब इस धन को खर्च करने के लिए नगर निगम प्रशासन को दोबारा शासन से स्वीकृति लेनी होगी। इस प्रक्रिया में कम से कम दो माह लग सकते हैं। जिससे साफ हो रहा है कि फरवरी के बाद ही शहर में विकास कार्य शुरू हो पाएंगे।
महानगर में 13वें वित्त खजाने से कुछ नाला निर्माण के प्रस्ताव पास हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि पांच करोड़ से अधिक धनराशि से ये कार्य होने हैं। बाकी 17 करोड़ रुपये के विकास कार्य 14वें वित्त आयोग के खजाने से होने प्रस्तावित हैं। नगर निगम प्रशासन ने इनके टेंडर निकाले हैं। 25 दिसंबर को टेंडर प्रक्रिया की अंतिम तिथि है, लेकिन बताया जा रहा है कि टेंडर की तिथि आगे बढ़ सकती है। यानि विकास के लिए जो धन खर्च होना था समय पर प्रकिया पूरी न होने के कारण अब वह लैप्स हो जाएगा। यदि नगर निगम अफसर गंभीर रहकर समय से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लेते तो शहर का विकास प्रभावित न होता।
इस संबंध में चीफ इंजीनियर यशवंत कुमार का कहना है कि कोई भी टेंडर प्रक्रिया नगरायुक्त के आदेशानुसार ही की जाती है। निर्धारित समय तक धन खर्च न होने पर नियमानुसार शासन से स्वीकृति लेनी ही पड़ती है।
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मेरठ। नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर के विकास पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 13वें वित्त के खजाने से होने वाले विकास कार्य पर खर्च करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है, लेकिन अभी तक निगम प्रशासन टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं कर पाया है। अब इस धन को खर्च करने के लिए नगर निगम प्रशासन को दोबारा शासन से स्वीकृति लेनी होगी। इस प्रक्रिया में कम से कम दो माह लग सकते हैं। जिससे साफ हो रहा है कि फरवरी के बाद ही शहर में विकास कार्य शुरू हो पाएंगे।
महानगर में 13वें वित्त खजाने से कुछ नाला निर्माण के प्रस्ताव पास हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि पांच करोड़ से अधिक धनराशि से ये कार्य होने हैं। बाकी 17 करोड़ रुपये के विकास कार्य 14वें वित्त आयोग के खजाने से होने प्रस्तावित हैं। नगर निगम प्रशासन ने इनके टेंडर निकाले हैं। 25 दिसंबर को टेंडर प्रक्रिया की अंतिम तिथि है, लेकिन बताया जा रहा है कि टेंडर की तिथि आगे बढ़ सकती है। यानि विकास के लिए जो धन खर्च होना था समय पर प्रकिया पूरी न होने के कारण अब वह लैप्स हो जाएगा। यदि नगर निगम अफसर गंभीर रहकर समय से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लेते तो शहर का विकास प्रभावित न होता।
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इस संबंध में चीफ इंजीनियर यशवंत कुमार का कहना है कि कोई भी टेंडर प्रक्रिया नगरायुक्त के आदेशानुसार ही की जाती है। निर्धारित समय तक धन खर्च न होने पर नियमानुसार शासन से स्वीकृति लेनी ही पड़ती है।
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